‘चिकन नेक’ पर अब मोदी सरकार रखेगी नजर, नए हाईवे और इंफ्रास्ट्रक्चर पर होगा काम: ममता बनर्जी ने लंबे समय तक अटकाया, अब शुभेंदु सरकार ने दी मंजूरी

पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की सरकार ने सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) को 120 एकड़ भूमि हस्तांतरित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके अलावा सबसे संवेदनशील और रणनीतिक इलाके ‘चिकन नेक कॉरिडोर’ को लेकर भी बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया गया है। वहाँ लंबे समय से अटके पड़े हाईवे प्रोजेक्ट्स को आखिरकार मंजूरी मिल गई है।

माना जा रहा है कि शुभेंदु सरकार ने आते ही उन फाइलों को आगे बढ़ाया, जो पिछले काफी समय से रुकी हुई थीं। इससे अब केंद्र सरकार को इस अहम इलाके में सड़क और इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत करने का रास्ता साफ हो गया है।

दरअसल, उत्तर-पूर्व भारत को देश के बाकी हिस्से से जोड़ने वाला सिलिगुड़ी कॉरिडोर यानी ‘चिकन नेक‘ देश की सुरक्षा के लिहाज से बेहद अहम माना जाता है। लेकिन यहाँ कई नेशनल हाईवे प्रोजेक्ट्स लंबे समय से मंजूरी और जमीन से जुड़े मामलों में फँसे हुए थे। अब शुभेंदु सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए अहम हाईवे स्ट्रेच को केंद्र की एजेंसियों NHAI और NHIDCL को सौंपने की मंजूरी दे दी है। इससे न सिर्फ सड़क परियोजनाओं में तेजी आएगी बल्कि सेना और सुरक्षा एजेंसियों की ताकत भी बढ़ेगी।

शुभेंदु सरकार ने हटाए पुराने रोडब्लॉक

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये सड़क परियोजनाएँ काफी समय से फाइलों में अटकी हुई थीं। केंद्र सरकार लगातार राज्य से मंजूरी माँग रही थी, लेकिन काम आगे नहीं बढ़ पा रहा था। नई सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने खुद इस मामले को प्राथमिकता दी और लंबित फाइलों को तेजी से क्लियर कराया। इसी के बाद केंद्र सरकार की एजेंसियों को काम सौंपने का रास्ता साफ हुआ।

आखिर क्या है ‘चिकन नेक कॉरिडोर’?

‘चिकन नेक’ या सिलिगुड़ी कॉरिडोर पश्चिम बंगाल का वह पतला इलाका है जो पूरे उत्तर-पूर्व भारत को देश के बाकी हिस्से से जोड़ता है। यह करीब 60 किलोमीटर लंबा है और कुछ जगहों पर इसकी चौड़ाई सिर्फ 20 से 22 किलोमीटर तक रह जाती है। एक तरफ नेपाल, दूसरी तरफ बांग्लादेश और ऊपर भूटान व चीन की सीमा होने की वजह से यह इलाका रणनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील माना जाता है।

केंद्र ने क्यों लिया कंट्रोल?

केंद्र सरकार का कहना है कि इन हाईवे प्रोजेक्ट्स का काम काफी समय से अटका हुआ था। सड़क चौड़ीकरण, मरम्मत और नए इंफ्रास्ट्रक्चर का काम नहीं हो पा रहा था। सुरक्षा एजेंसियों का भी मानना था कि अगर इस इलाके में बेहतर सड़कें होंगी तो सेना और भारी सैन्य उपकरणों की आवाजाही तेज और आसान होगी। खासतौर पर सिक्किम और उत्तर-पूर्वी राज्यों तक पहुंच मजबूत करने के लिए यह जरूरी माना जा रहा है।

चिकन नेक कॉरिडोर को भारत की ‘लाइफलाइन’ कहा जाता है। अगर किसी संकट की स्थिति में यह रास्ता बाधित होता है तो उत्तर-पूर्व के कई राज्यों का संपर्क देश के बाकी हिस्से से प्रभावित हो सकता है। यही वजह है कि यहां पहले से सेना, एयर डिफेंस सिस्टम और दूसरी सुरक्षा एजेंसियां तैनात हैं। हाल के वर्षों में इस इलाके की सुरक्षा को लेकर कई बार चिंता जताई गई है।

रेलवे और सुरंग की भी तैयारी

सिर्फ सड़क ही नहीं, केंद्र सरकार इस इलाके में रेलवे नेटवर्क को भी मजबूत करने की योजना बना रही है। रेलवे मंत्री अश्विनी वैष्णव पहले ही कह चुके हैं कि चिकन नेक कॉरिडोर में अंडरग्राउंड रेलवे कॉरिडोर बनाने की योजना पर काम चल रहा है, ताकि किसी आपात स्थिति में भी संपर्क बना रहे।