बंगाल में ममता बनर्जी के खिलाफ ‘मुस्लिम गठबंधन’, हुमायूँ कबीर के साथ आए SPDI और फुरफुरा शरीफ: कॉन्ग्रेस को भी दिया न्योता

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव नजदीक हैं। इससे पहले राज्य में चुनावी माहौल गर्म है। 27 प्रतिशत मुस्लिम संख्या वाले प्रदेश में मुस्लिम गठबंधन बनाने की कवायद तेज हो गई है। इस गठबंधन का उद्देश्य सिर्फ TMC और BJP के अलावा तीसरा रास्ता तैयार हो सके, खासकर उन इलाकों में जहाँ मुस्लिम संख्या ज्यादा है।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, मुर्शिदाबाद के बेलदंगा के पास एक जगह पर मंच और बैनर देखे गए जिन पर बाबरी मस्जिद के नए रूप का जिक्र लिखा है और यह वही जगह है जहाँ से राजनीतिक चर्चा जोर पकड़ रही है। ये मंच हुमायूं कबीर जैसे नेताओं ने लगाए हैं, जिन्होंने पहले TMC छोड़ी है और अब खुद की पार्टी बनाकर मुस्लिमों के हित की राजनीति करते हैं।

इस दिशा में फुरफुरा शरीफ मस्जिद का संगठन इंडियन सेकुलर फ्रंट (ISF) के नौशाद सिद्दीकी ने भी प्रस्ताव रखा है कि एक संयुक्त मोर्चा बनाकर TMC और BJP दोनों को चुनौती दी जाए। इसके अलावा हुमायूं कबीर की जनता उन्नयन पार्टी (JUP) छोटे-छोटे दल भी इस बातचीत में शामिल हैं और चाहते हैं कि यह गठबंधन जल्दी से जल्दी बनाया जाए। इस गठबंधन में प्रतिबंधित संगठन PFI से जुड़ा SDPI भी शामिल हो सकता है।

गौर करने वाली बात है JUP ने कॉन्ग्रेस को भी इस गठबंधन का हिस्सा बनने का न्योता दिया है। हालाँकि, JUP के हुमायूं कबीर ने कहा कि अगर कॉन्ग्रेस न्योता कबूल नहीं करती है, तो उसके बिना ही गठबंधन बनाया जाएगा।

इंडियन एक्सप्रेस की ही रिपोर्ट में इस गठबंधन से होने वाले TMC को नुकसान पर भी बात की गई। रिपोर्ट के मुताबिक, सच यह है कि अभी तक TMC ने पश्चिम बंगाल में मजबूत पकड़ बनाई हुई है। साल 2011 के बाद से पार्टी लगातार सत्ता में है और महिला वोटर्स के साथ-साथ मुस्लिम वोटर्स पर भी अच्छी पकड़ रखती है। इसी वजह से TMC का वोट शेयर कई जिलों में बढ़ा है और पार्टी ने कई सीटें जीती हैं।

लेकिन अगर मुस्लिम मोर्चा वाकई में मजबूत हो गया, तो कुछ खास इलाकों में TMC को मुश्किल का सामना करना पड़ सकता है। खासकर वो जिले जिनमें मुस्लिम वोटरों की संख्या अधिक है, जिनमें मुर्शिदाबाद, मालदा और उत्तर दुर्गापुर जैसे जिले शामिल हैं। वहाँ अगर वोट बँटते हैं, तो TMC की जीत आसान नहीं रहेगी।