हिंसा के दौरान पुलिस की गोली से ओम प्रकाश मेहता नाम के व्यक्ति की मौत हो गई थी, जिस पर प्रधानमंत्रा बालेन शाह ने दुख जताया है। हिंसा की वजह से 6 शहरों में अनिश्चितकालीन कर्फ्यू लगा दिया गया है।
दरअसल 26 जुलाई को काँवड़ यात्रा के दौरान डीजे और तेज संगीत बजाने पर मुस्लिम समुदाय ने आपत्ति जताई। इस दौरान हिंसक झड़प हो गई जिसमें कई लोग घायल हुए। स्थिति को नियंत्रित करने पहुँची पुलिस ने गोलियाँ चलाई और इससे ओम प्रकाश मेहता की मौत हो गई जबकि 22 लोग घायल हुए। घटना की उच्चस्तरीय जाँच के आदेश दिए गये हैं और प्रधानमंत्री बालेन शाह ने मुआवजे का एलान किया। मौत के विरोध में पूरे तराई क्षेत्र में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए।
घटना पर दुख जताते हुए नेपाल के प्रधानमंत्री ने कहा कि मृतक के परिजनों को न्याय मिलेगा और प्रभावित लोगों को मुआवजा दिया जाएगा। उन्होंने मृतक को श्रद्धांजलि देते हुए घायलों के स्वस्थ ठीक होने की कामना की।
उन्होंने कहा कि सुरक्षाकर्मी की गोली लगने से नागरिक की मौत होना काफी गंभीर मामला है। इसकी जाँच शुरू कर दी गई है और जो भी दोषी होंगे उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने लोगों से संयम बनाए रखने की अपील की।
एपीएफ ने दी थी दंगे की चेतावनी
नेपाल के सीमा सुरक्षा और दंगों को नियंत्रित करने वाले एपीएफ ने 3 साल पहले सरकार को चेताया था कि तराई क्षेत्र में जातीय और धार्मिक तनाव हो सकते हैं। लेकिन तत्कालीन नेतृत्व ने इस पर ध्यान नहीं दिया।
दरअसल नेपाल के तराई क्षेत्र में मुस्लिम आबादी तेजी से बढ़ी है। यहाँ मदरसे और मस्जिद बन गए हैं। इस इलाके में मुस्लिम आबादी न के बराबर थी जो अब 5 फीसदी से ऊपर जा चुकी है। ये करीब 14.83 लाख के करीब है।
गुप्त रिपोर्ट में दावा किया गया था कि कई मुस्लिम संगठनों को इंटरनेशनल गैर सरकारी संगठनों से मदद मिल रही है। यहाँ सांप्रदायिक ध्रुवीकरण हो रहा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि हाल के वर्षों में अलग अलग देशों में हुए जातीय, धार्मिक और भाषाई संघर्षों से सबक लेने की जरूरत है और इसका समय रहते हल निकालना जरूरी है। एएफपी ने छोटे-मोटे विवादों को अनसुलझा छोड़ने पर इसका व्यापक असर पड़ने और हिंसा भड़कने की आशंका पर जोर दिया है।

