भारत की सबसे बड़ी बिजली उत्पादक कंपनी NTPC (पूर्व में नेशनल थर्मल पावर कॉर्पोरेशन) ने अपने ऊर्जा कारोबार को पूरी तरह बदलने के लिए अब तक की सबसे बड़ी निवेश योजना का ऐलान किया है। कंपनी अगले 11 वर्षों में 16.68 लाख करोड़ (लगभग 175 अरब डॉलर) का पूँजीगत निवेश करेगी।
इस निवेश के जरिए NTPC का लक्ष्य कोयला आधारित बिजली उत्पादन से आगे बढ़कर स्वच्छ और बहुआयामी ऊर्जा कंपनी बनना है। कंपनी 2037 तक अपनी कुल उत्पादन क्षमता को लगभग तीन गुना बढ़ाकर 250 गीगावाट (GW) तक ले जाना चाहती है जबकि 2047 तक 30 GW परमाणु ऊर्जा क्षमता स्थापित करने की भी योजना है।
तीन चरणों में होगा निवेश, परमाणु ऊर्जा पर रहेगा बड़ा फोकस
NTPC के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक गुरदीप सिंह ने बताया कि वित्त वर्ष 2037 तक कंपनी करीब 16.68 लाख करोड़ का निवेश करेगी। उन्होंने कहा कि परमाणु ऊर्जा कंपनी के विकास का अगला बड़ा चरण होगी, जिसकी रफ्तार वित्त वर्ष 2032 के बाद तेज होगी।
NTPC unveils a ₹16.68 lakh crore capex plan to expand its generation capacity to 250 GW by 2037.
— Prasanna Viswanathan (@prasannavishy) July 29, 2026
From a predominantly coal-fired utility, it aims to transform into a diversified energy major with 136 GW of renewables by FY37, 30 GW of nuclear capacity by 2047, and a 38.9 GWh… pic.twitter.com/0ShMfIcouU
कंपनी पारंपरिक प्रेशराइज्ड हेवी वॉटर रिएक्टर (PHWR) के साथ-साथ नई और उन्नत परमाणु रिएक्टर तकनीकों पर भी काम कर रही है। कंपनी की निवेश योजना को तीन चरणों में बांटा गया है। पहले चरण में वित्त वर्ष 2026-27 के दौरान 1.08 लाख करोड़ खर्च किए जाएँगे, जिनमें से 56,000 करोड़ पहले ही उपयोग किए जा चुके हैं।
दूसरे चरण में वित्त वर्ष 2028 से 2032 के बीच 5.97 लाख करोड़ का निवेश होगा, जिसका अधिकांश हिस्सा नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं पर खर्च किया जाएगा। तीसरे चरण में वित्त वर्ष 2033 से 2037 के बीच 9.63 लाख करोड़ परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में लगाए जाएँगे।
तुलना करें तो NTPC अब तक हर साल लगभग 35,000 से 40,000 करोड़ का ही पूँजीगत निवेश करती रही है। इसी दिशा में देश के 10 राज्यों, जिनमें आंध्र प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र और तमिलनाडु शामिल हैं, में संभावित परमाणु ऊर्जा संयंत्रों के लिए उपयुक्त स्थलों का आँकलन शुरू कर दिया गया है।
नवीकरणीय ऊर्जा, बैटरी स्टोरेज और ग्रीन हाइड्रोजन पर भी बड़ा दांव
गुरदीप सिंह ने स्पष्ट कहा कि आने वाले वर्षों में नवीकरणीय ऊर्जा NTPC की वृद्धि का सबसे बड़ा आधार होगी। कंपनी की योजना मौजूदा 12 GW नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता को बढ़ाकर वित्त वर्ष 2032 तक 60 GW और वित्त वर्ष 2037 तक 136 GW करने की है।
इस विस्तार को मजबूत बनाने के लिए NTPC 38.9 GWh बैटरी एनर्जी स्टोरेज क्षमता विकसित कर रही है। इसके अलावा कंपनी 80 GW से अधिक पंप्ड स्टोरेज परियोजनाओं के विकास का लक्ष्य लेकर चल रही है, जिससे नवीकरणीय ऊर्जा के बेहतर भंडारण और उपयोग में मदद मिलेगी।
साथ ही आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम के पास पुडिमडाका में लगभग 1,200 एकड़ क्षेत्र में 1 लाख करोड़ की लागत से एक विशाल ग्रीन हाइड्रोजन हब भी विकसित किया जा रहा है। इस परियोजना में ग्रीन हाइड्रोजन के साथ-साथ उससे जुड़े ग्रीन ईंधन और रसायनों का भी उत्पादन किया जाएगा।
बढ़ती बिजली माँग को देखते हुए तैयार हो रही NTPC, परमाणु परियोजनाओं पर भी तेजी
नीति आयोग का अनुमान है कि भारत में बिजली की अधिकतम माँग वर्ष 2050 तक बढ़कर लगभग 750 GW पहुँच सकती है। जून में देश की पीक पावर डिमांड 271 GW के रिकॉर्ड स्तर तक पहुँच चुकी है। ऐसे में NTPC अपनी उत्पादन क्षमता को तेजी से बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है।
कंपनी का कहना है कि नवीकरणीय ऊर्जा के विस्तार के बावजूद कोयला आधारित संयंत्रों में कमी आने के बाद भी NTPC का कुल बिजली उत्पादन 24% की वार्षिक दर से बढ़ रहा है। गुरदीप सिंह ने कहा कि कंपनी भविष्य की ऊर्जा दौड़ में पीछे नहीं रहने वाली है।
इसी क्रम में NTPC और न्यूक्लियर पावर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (NPCIL) के संयुक्त उपक्रम अनुषक्ति विद्युत निगम लिमिटेड (ASHVINI) द्वारा राजस्थान के माही बांसवाड़ा में 2,800 मेगावाट क्षमता की परमाणु ऊर्जा परियोजना का निर्माण भी किया जा रहा है।

