पाकिस्तान की संघीय कैबिनेट ने प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की अध्यक्षता में तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान (TLP) पर राष्ट्रीय सुरक्षा के मद्देनजर बैन लगाने की मंजूरी दे दी है। यह फैसला पंजाब सरकार की सिफारिश के बाद लिया गया, जिसमें TLP के हालिया हिंसक प्रदर्शनों और पुलिसकर्मियों की मौत का हवाला दिया गया।
बैठक में गृह मंत्रालय ने एक विस्तृत रिपोर्ट पेश की, जिसके बाद TLP की संपत्तियाँ जब्त करने, बैंक खातों को सीज करने और सोशल मीडिया अकाउंट ब्लॉक करने जैसे कदम उठाने का निर्णय लिया गया। यह फैसला पाकिस्तान के राजनीतिक और मजहबी परिदृश्य में एक बड़ा मोड़ माना जा रहा है।
कैसे बढ़ी टीएलपी की मुश्किलें
पंजाब की मुख्यमंत्री मरियम नवाज की अध्यक्षता में हुई बैठक में तय किया गया कि मुरीदके में हिंसा फैलाने और पुलिसकर्मियों की मौत में शामिल टीएलपी नेताओं के खिलाफ आतंकवाद विरोधी अदालतों में मुकदमा चलाया जाएगा।
13 अक्टूबर 2025 को मुरीदके में TLP द्वारा आयोजित ‘गाजा मार्च’ के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तीव्र झड़पें हुईं। इस झड़प में एक SHO की मौत, 48 पुलिस और रेंजर्स कर्मी घायल, तीन TLP कार्यकर्ता और एक राहगीर की मौत हुई। हिंसा के बाद पंजाब सरकार ने संघीय सरकार से इस संगठन पर प्रतिबंध लगाने की सिफारिश की।
कैबिनेट की बैठक में क्या हुआ
इस्लामाबाद में हुई कैबिनेट बैठक में TLP की गतिविधियों पर गृह मंत्रालय ने विस्तृत रिपोर्ट पेश की। रिपोर्ट में कहा गया कि संगठन के हालिया प्रदर्शन राष्ट्रीय सुरक्षा और कानून-व्यवस्था के लिए खतरा बनते जा रहे हैं। इसके बाद कैबिनेट ने संविधान के अनुच्छेद 17 और आतंकवाद विरोध अधिनियम 1997 के तहत टीएलपी पर बैन लगाने की अनुमित दी।
टीएलपी क्या है?
तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान (TLP) एक अति-दक्षिणपंथी इस्लामी पार्टी है जो सुन्नी इस्लाम के बरेलवी मत को मानती है। इसकी स्थापना 2015 में इस्लामी विद्वान खादिम हुसैन रिजवी ने की थी। इसका मुख्य उद्देश्य पाकिस्तान के ईशनिंदा कानूनों की रक्षा करना है। वर्तमान में इसका सरगना खादिम हुसैन रिजवी का बेटा साद रिजवी है। TLP देश को सख्त शरिया कानून के तहत चलाने की माँग करती है और इस्लाम या पैगंबर का अपमान करने वाले किसी भी व्यक्ति के लिए मृत्युदंड की माँग करती है।
यह संगठन सरकार पर दबाव बनाने के लिए हिंसक विरोध प्रदर्शनों के इस्तेमाल के लिए जाना जाता है। यह पंजाब के राज्यपाल सलमान तासीर की हत्या करने वाले पुलिस गार्ड मुमताज कादरी का बचाव करने के बाद सुर्खियों में आया था। तासीर ने ईशनिंदा कानूनों की आलोचना की थी। 2017 में, चुनावी शपथ समारोह में बदलाव को पैगंबर के लिए अपमानजनक बताते हुए इसने इस्लामाबाद में फैजाबाद इंटरचेंज को ब्लॉक किया था, जिसके परिणामस्वरूप कानून मंत्री जाहिद हामिद को इस्तीफा देना पड़ा था।
TLP को पाकिस्तानी फौज का एक हिस्सा भी माना जाता है, जिसने कथित तौर पर 2018 में पीएमएल-एन के प्रतिकार के रूप में इसका इस्तेमाल किया था।

