पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। चुनाव और विधानसभा की 12 शरणार्थी सीटों को लेकर चल रहे विरोध प्रदर्शन अब हिंसक रूप ले चुके हैं।
इसी बीच पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने एक टीवी इंटरव्यू में बड़ा बयान देते हुए कहा है “PoK में सरकार विरोधी प्रदर्शन कर रहे लोगों को वह भारत की तरह पाकिस्तान का दुश्मन मानते हैं। ऐसे लोगों से किसी तरह की बातचीत नहीं की जाएगी।”
उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब PoK में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच हुई हिंसा में कई लोगों की मौत होने का दावा किया जा रहा है और पूरे इलाके में तनाव बना हुआ है।
12 शरणार्थी सीटों को लेकर क्यों हो रहा है विरोध?
PoK विधानसभा में कुल 53 सीटें हैं। इनमें 8 सीटें महिलाओं, टेक्नोक्रेट्स और अन्य आरक्षित वर्गों के लिए हैं, जबकि बाकी 45 सीटों पर चुनाव होते हैं। इन 45 सीटों में 12 सीटें उन कश्मीरी शरणार्थियों के लिए आरक्षित हैं, जो 1947 और उसके बाद जम्मू-कश्मीर से पाकिस्तान चले गए थे।
इन सीटों के मतदाता PoK में नहीं, बल्कि पाकिस्तान के पंजाब, खैबर पख्तूनख्वा और दूसरे इलाकों में रहते हैं। जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) का आरोप है कि इन 12 सीटों के जरिए इस्लामाबाद की राजनीतिक पार्टियाँ PoK की सरकार के गठन में दखल देती हैं।
कई बार इन्हीं सीटों के नतीजों से विधानसभा में बहुमत का समीकरण बदल जाता है। इसलिए JAAC की माँग है कि PoK की सरकार चुनने का अधिकार सिर्फ वहाँ रहने वाले लोगों के पास होना चाहिए और 12 शरणार्थी सीटों की व्यवस्था खत्म की जानी चाहिए। पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) समेत कई विपक्षी दल भी चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठा चुके हैं।
प्रदर्शन के दौरान हिंसा, मौतों को लेकर अलग-अलग दावे
मंगलवार को जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के बैनर तले करीब 5 हजार लोग रावलाकोट से मुजफ्फराबाद की ओर मार्च निकाल रहे थे। संगठन का आरोप है कि सुरक्षा बलों ने बिना किसी उकसावे के प्रदर्शनकारियों पर गोली चला दी। शुरुआती रिपोर्टों में 30 लोगों की मौत और 50 से ज्यादा लोगों के घायल होने की बात कही गई।
वहीं JAAC के नेताओं का दावा है कि पिछले 48 घंटों में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की कार्रवाई में कम से कम 31 नागरिकों की जान गई है। उनका यह भी कहना है कि 5 जून से शुरू हुए आंदोलन के बाद से अब तक 80 से अधिक नागरिकों की मौत हो चुकी है। हालाँकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
दूसरी ओर पाकिस्तान सरकार ने इन आरोपों को खारिज किया है। सरकार का कहना है कि प्रदर्शनकारी आधुनिक हथियारों से लैस थे और उन्होंने पहले सुरक्षाबलों पर हमला किया, जिसके बाद जवाबी कार्रवाई की गई।
हिंसा के बाद पूरे PoK में अतिरिक्त सेना, पैरा मिलिट्री और आर्म्ड कॉन्स्टेबुलरी तैनात कर दी गई है। इलाके में धारा-144 लागू कर इंटरनेट सेवाएँ भी बंद कर दी गई हैं।
आंदोलन जारी रखने का ऐलान, पाकिस्तान सरकार पर उठ रहे सवाल
JAAC के वरिष्ठ नेता सरदार उमर नजीर कश्मीरी ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान की सुरक्षा एजेंसियाँ आंदोलन को दबाने के लिए लगातार बल प्रयोग कर रही हैं। उन्होंने कहा कि लोग पीछे हटने वाले नहीं हैं और जब तक उनकी माँगें पूरी नहीं होतीं, आंदोलन जारी रहेगा।
JAAC के एक अन्य नेता सरदार अमन कश्मीरी ने भी साफ कहा कि, “हम पीछे नहीं हटेंगे। हम मुजफ्फराबाद तक मार्च करेंगे। अगर केवल एक व्यक्ति भी बचा रहेगा, तब भी यह मार्च जारी रहेगा।” उन्होंने पाकिस्तान की सेना को चेतावनी देते हुए कहा कि PoJK के लोग अपने अधिकारों की लड़ाई जारी रखेंगे।
इस बीच मीरपुर से भी एक गंभीर घटना सामने आई है। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, बिलाल मस्जिद में नमाज के दौरान गोलीबारी हुई, जिसमें मौलाना इनायतुल्लाह की मौत हो गई। हालाँकि इस घटना की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हो सकी है।
उधर पाकिस्तान के वरिष्ठ पत्रकार शहजाद इकबाल ने भी सरकार के दावों पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि मीडिया को PoJK में स्वतंत्र रिपोर्टिंग की अनुमति नहीं दी जा रही है।
उन्होंने यह भी पूछा कि यदि प्रदर्शनकारी वास्तव में भारत के इशारे पर काम कर रहे थे, जैसा सरकार दावा करती है, तो उनकी 38 में से 36 माँगें आखिर क्यों मान ली गईं। उनके मुताबिक सरकार के पास इन सवालों का कोई स्पष्ट जवाब नहीं है।
भारत ने चुनाव प्रक्रिया को बताया दिखावटी
भारत ने भी PoK में हो रहे चुनावों को खारिज करते हुए इन्हें दिखावटी कवायद बताया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि पाकिस्तान इस पूरी प्रक्रिया के जरिए अपने अवैध कब्जे और मानवाधिकार उल्लंघनों पर पर्दा डालने की कोशिश कर रहा है।
ख्वाजा आसिफ इससे पहले भी विवादित बयान दे चुके हैं। जून में उन्होंने सिंधु जल संधि को लेकर कहा था कि यदि पाकिस्तान की जल सुरक्षा को खतरा महसूस हुआ तो वह भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ देगा।
अब PoK में प्रदर्शनकारियों को भारत की तरह पाकिस्तान का दुश्मन बताने वाले उनके ताजा बयान ने पूरे विवाद को और ज्यादा राजनीतिक बना दिया है। फिलहाल क्षेत्र में तनाव बना हुआ है और घटनाओं को लेकर अलग-अलग पक्षों के दावे सामने आ रहे हैं, जबकि स्वतंत्र रूप से सभी दावों की पुष्टि सीमित बनी हुई है।

