फ्री कोचिंग, युवाओं को AI ट्रेनिंग और ‘शक्ति की सप्तधारा’… जानें- PM मोदी के स्वतंत्रता दिवस के भाषण की बड़ी बातें, कहा- देश को दिमागी नक्सलियों से बचाएँ

पीएम मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लालकिले की प्राचीर से विकसित भारत के संकल्प की बात कही और इसके लिए युवाओं से लेकर महिलाओं तक के विकास की बात कही। अपने 76 मिनट के स्पीच में उन्होंने नक्सलियों पर वार किया और कहा कि हथियार वाले नक्सली तो चले गए लेकिन दिमाग वाले नक्सली मौके की तलाश में रहते हैं।

आजादी के बाद 15 अगस्त पर पहली बार लाल किले पर वंदे मातरम गूँजा। इसको लेकर पीएम मोदी ने कहा कि देश के लोग वंदे मातरम के 150 वर्ष मना रहे हैं, तो इससे बड़ा उत्तम अवसर क्या हो सकता है।

युवाओं के लिए सुनहरे भविष्य की कामना करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार 1 साल में 1 करोड़ युवाओं को एआई स्किल्स की ट्रेनिंग देगी। युवाओं को फ्री ऑनलाइन कोचिंग देगी ताकि गरीब और मिडिल क्लास वर्ग के बच्चों की शिक्षा में कमी न आए और उनके परिवार पर पैसों को लेकर जो बोझ पड़ता है, उसे कम किया जा सके। उन्होंने Gen Z से विशेष अपील करते हुए उनसे राष्ट्र निर्माण में योगदान देने की अपील की।

महिलाओं के आरक्षण पर विपक्ष को साथ आने का आह्वान किया

पीएम मोदी ने महिलाओं को लोकसभा-विधानसभा में 33 फीसदी आरक्षण देने के लिए विपक्ष को भी साथ देने की बात कही। उन्होंने कहा कि समय की माँग है इसलिए मैं सभी विपक्षी दलों को साथ आने का आह्वान किया और कहा कि महिलाओं के सम्मान में आप भी जुड़िए और क्रेडिट लीजिए, लेकिन माताओं-बहनों को हक दीजिए।

देश को हर क्षेत्र में आगे आने की जरूरत पर फोकस करते हुए उन्होंने कहा, “कुछ चीजें मैंने बताई है लेकिन मैं इससे भी आगे सोचता हूँ। मैं जरा देश को झकझोरना चाहता हूँ, मैं देश की शक्ति को भी झकझोरना चाहता हूँ। देश यानी केवल सरकार नहीं होती है, देश का मतलब हर नागरिक जुड़ता है। क्या हम सोच नहीं सकते कि फॉर्च्यून 500 की चर्चा तो हम बहुत सुनते हैं, आने वाले 1 दशक में इन फॉर्च्यून 500 में 50 कंपनियाँ भारत की क्यों न हों, ये लक्ष्य हमारा क्यों नहीं होना चाहिए।”

भारत का भी एक बैंक टॉप 5 बैंकों में भी होना चाहिए- पीएम

उन्होंने कहा कि समय की माँग है कि दुनिया की 5 बड़ी फार्मा कंपनियों में भारत की भी 1-2 फार्मा कंपनियों का नाम गूँजना चाहिए। समय की मांग है कि ग्लोबल लीडरशिप अब हमारे हाथ में होनी चाहिए? सामर्थ्य है, हमारा लंबा इतिहास भी है, भाषाओं पर हमारा प्रभुत्व है, हमें विश्व में पहुँचना चाहिए…हमारे ऐसे ब्रांड हों, जिससे दुनिया आकर्षित होती है। हमारे ब्रांड हमारी पहचान हो और विश्व के लिए एक डेस्टिनेशन बन जाए, हमें इसके लिए काम करना होगा।

80वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर देश को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि मैं राज्य सरकारों को कहना चाहता हूँ, स्थानीय स्वराज्य की संस्थाओं को कहना चाहता हूँ, भारत सरकार का भी ये दायित्व है कि हमें अपने सुधारों की गति बढ़ानी होगी। हम बीते हुए काल के नीति नियमों पर नहीं चल सकते हमें आने वाले काल के अनुसार नीति नियमों को गढ़ना होगा।”

‘शक्ति की सप्त धारा’ का किया आह्वान

उन्होंने कहा, “आज लाल किले की प्राचीर से मैं देश के सामने ‘शक्ति की सप्त धारा’ का आह्वान करता हूं। आने वाले 5-7 साल में, जो पिछले 5-7 दशक में नहीं हुआ उस ‘सप्त धारा’ के सामर्थ्य से, उसकी शक्ति से हम देश को नई ऊंचाई और गति देंगे और नए लक्ष्यों को पार करने वाले सामर्थ्य देंगे। इसके साथ-साथ देश की युवा शक्ति के सामर्थ्य का भी भरपूर राष्ट्र निर्माण में उपयोग होगा, उनकी शक्ति जोड़ी जाएगी।

सप्तधारा की चर्चा करते हुए उन्होने कहा, “आने वाले दिनों में जब मैं सप्त धारा की बात करता हूं तो उसकी पहली शक्ति है मैन्यूफैक्चरिंग पावर… इस सप्त धारा की दूसरी शक्ति है, कृषि और खाद्य उत्पादन… मेरी सप्त धारा की तीसरी शक्ति है, प्रौद्योगिकी और नवाचार… सप्त धारा की चौथी शक्ति है गति शक्ति… हमारी पांचवी सप्त धारा की शक्ति रक्षा बल है… हमारी सप्त धारा की छठी शक्ति है, ग्रीन इकॉनमी और ब्लू इकॉनमी… हमारी सप्त धारा की सांतवीं धारा है और दुनिया के लिए इसका अपना भी महत्व है जो है, भारत की ‘सॉफ्ट पावर’।”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से 80वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर देश को संबोधित करते हुए कहा, “एक समय था जब मैं आत्मनिर्भरता की बात कर रहा था तो कुछ एयरकंडीशनर चेंबर में बैठकर सोचने वाले लोग हमें बता रहे थे कि ग्लोबलाइजेशन का क्या होगा लेकिन पूरी दुनिया देख रही है कि पिछले 1 दशक में ऐसा लग रहा है कि लोगों ने ग्लोबलाइजेशन बोलना ही बंद कर दिया।”

पीएम मोदी ने कहा,”जहाँ से ग्लोबलाइजेशन की आवाजें आती थीं, अब वो आवाजें सुनाई नहीं देती है, लेकिन दुर्भाग्य से इस संकट के कालखंड में कुछ लोगों ने अपना रुतबा दिखाने के लिए संसाधनों को वेपनाइज्ड करने का खेल खेला है। दुनिया अपने पास जो कुछ भी है उसे वेपनाइज्ड करने में लगी है। संसाधनों का वेपनाइज्ड, पेट्रोल, डीजल, खाद, दवाईयाँ, इतना ही नहीं भूभाग को भी वेपनाइज्ड किया जा रहा है। ऐसे समय अगर हम आत्मनिर्भर के मंत्र को लेकर 10 साल सही दिशा में न चले होते तो हम ऐसी चुनौतियों का मजबूती से सामना कैसे करते।”