प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार (29 अप्रैल 2026) को हरदोई से उत्तर प्रदेश के सबसे लंबे गंगा एक्सप्रेस-वे का उद्घाटन किया। पीएम मोदी ने जनसभा को संबोधित करते हुए कि ये एक्सप्रेस-वे UP के विकास की नई लाइफ लाइन बनेगा। साथ ही, उन्होंने ऐलान किया कि आगे चलकर इस एक्सप्रेस-वे को हरिद्वार से भी जोड़ा जाएगा। साथ ही, उन्होंने बंगाल में बंपर वोटिंग पर भी मतदाताओं को बधाई दी। इससे पहले हरदोई पहुँचकर पीएम मोदी ने एक्सप्रेस-वे के पास पौधारोपण किया और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ एक्सप्रेस-वे पर पैदल भी चले।
पीएम मोदी ने कहा, “UP को एक्सप्रेस-वे का वरदान, माँ गंगा का ही आशीर्वाद है। अब आप कुछ ही घंटों में संगम पहुँच सकते हैं और काशी में बाबा के दर्शन करके आ सकते हैं। जैसे माँ गंगा हजारों वर्षों से UP की और देश की जीवन रेखा रही हैं, वैसे ही आधुनिक प्रगति के इस दौर में उनके करीब से गुजरता ये एक्सप्रेस-वे UP के विकास की नई लाइफ लाइन बनेगा।”
Speaking at the inauguration of the Ganga Expressway in Hardoi. This transformative infrastructure project will boost connectivity and drive progress across Uttar Pradesh. https://t.co/UoFCdwSRmO
— Narendra Modi (@narendramodi) April 29, 2026
उन्होंने कहा, “मुझे खुशी है कि UP सरकार ने इस एक्सप्रेस-वे का नाम माँ गंगा के नाम पर रखा है, इसमें विकास का विजन भी झलकता है और हमारी विरासत के भी दर्शन होते हैं। मैं यूपी के करोड़ों लोगों को गंगा एक्सप्रेस-वे की बधाई देता हूँ।”
इसके साथ ही PM मोदी ने बंगाल चुनाव में बंपर वोटिंग को लेकर खुशी जताई। उन्होंने कहा, “बंगाल में जनता वोट देने के लिए बड़ी संख्या में घरों से निकल रही है। लंबी-लंबी कतारों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर छाई हुई हैं। पिछले 6-7 दशक में जो नहीं हुआ, जिसकी कल्पना भी मुश्किल थी, वैसे निर्भीक वातावरण में बंगाल में इस बार वोटिंग हो रही है। लोग भयमुक्त होकर वोट दे रहे हैं, ये देश के संविधान और देश के मजबूत होते लोकतंत्र का पुण्य प्रतीक है।”
परियोजना का आकार, लागत और डिजाइन
गंगा एक्सप्रेस-वे की कुल लंबाई 594 किलोमीटर है। इसे छह लेन के एक्सेस-कंट्रोल्ड ग्रीनफील्ड हाईवे के रूप में तैयार किया गया है जिसे भविष्य में आठ लेन तक बढ़ाया जा सकता है। इस पूरी परियोजना पर करीब 36,230 करोड़ रुपए की लागत आई है। इसकी डिजाइन स्पीड 120 किमी प्रति घंटा रखी गई है और अधिकांश संरचनाओं को पहले से ही आठ लेन के हिसाब से बनाया गया है ताकि भविष्य में विस्तार आसान हो।
किन जिलों को जोड़ता है यह एक्सप्रेसवे
यह एक्सप्रेस-वे मेरठ के बिजौली गाँव से शुरू होकर प्रयागराज बाईपास तक जाता है। इसके रास्ते में मेरठ, हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा, संभल, बदायूँ, शाहजहाँपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ़ और प्रयागराज कुल मिलाकर 12 जिले आते हैं। यह कॉरिडोर पश्चिमी, मध्य और पूर्वी उत्तर प्रदेश को एक ही हाई-स्पीड मार्ग से जोड़ता है जिससे क्षेत्रीय संतुलन और कनेक्टिविटी मजबूत होगी।

यात्रा समय और कनेक्टिविटी में बड़ा बदलाव
इस एक्सप्रेसवे के शुरू होने के बाद मेरठ से प्रयागराज तक का सफर जो पहले 10 से 12 घंटे का होता था वो अब घटकर लगभग 6 से 7 घंटे रह जाएगा। इससे न केवल आम यात्रियों को राहत मिलेगी बल्कि माल ढुलाई और औद्योगिक परिवहन भी तेज होगा। यह एक्सप्रेसवे नेशनल हाईवे और अन्य प्रमुख सड़कों से कई इंटरचेंज के जरिए जुड़ा है जिससे अलग-अलग शहरों तक सीधी पहुँच आसान होगी।
निर्माण मॉडल और इंजीनियरिंग की खासियत
गंगा एक्सप्रेसवे को 12 पैकेज में बाँटकर बनाया गया है जिनमें से बड़ा हिस्सा निजी क्षेत्र, खासकर अडानी ग्रुप द्वारा तैयार किया गया है। करीब 464 किलोमीटर हिस्से का निर्माण DBFOT (Design, Build, Finance, Operate and Transfer) मॉडल पर किया गया है, जिसमें निर्माण, फाइनेंस और संचालन की जिम्मेदारी निजी कंपनी के पास रहती है। निर्माण के दौरान बड़े पुल, अंडरपास, फ्लाईओवर, रेल ओवरब्रिज और कई इंटरचेंज बनाए गए हैं। गंगा और रामगंगा जैसी नदियों को पार करने के लिए लंबे पुल भी तैयार किए गए हैं।
डिजिटल हाईवे और यूटिलिटी कॉरिडोर
गंगा एक्सप्रेसवे के साथ 2 मीटर चौड़ा यूटिलिटी कॉरिडोर बनाया गया है, जो इसे डिजिटल हाईवे बनाता है। इसके भीतर ऑप्टिकल फाइबर, बिजली की लाइनें और गैस पाइपलाइन बिछाई जा सकती हैं। इस व्यवस्था के कारण सड़क को खोदने की जरूरत नहीं पड़ेगी। यही नेटवर्क 519 गाँवों तक ब्रॉडबैंड और 5G कनेक्टिविटी पहुँचाने में मदद करेगा और भविष्य में डेटा सेंटर जैसी सुविधाओं के लिए आधार बनेगा।

