हिंदू कोई संज्ञा नहीं बल्कि विशेषण, भारत में रहने वाला हर व्यक्ति हिंदू: RSS सर संघचालक मोहन भागवत, कहा- संघ राजनीतिक नहीं, ये समाज को जोड़ने वाला संगठन

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के 100 वर्ष पूरे होने के अवसर पर मुंबई के वर्ली स्थित नेहरू सेंटर में ‘मुंबई व्याख्यानमाला’ के तहत एक भव्य और ऐतिहासिक कार्यक्रम आयोजित किया गया।

इस कार्यक्रम में RSS प्रमुख मोहन भागवत ने संघ की भूमिका, भारतीयता की अवधारणा और ‘हिंदू’ शब्द की उत्पत्ति पर बात की और कहा हिंदू संज्ञा नहीं, विशेषण है, भारत में रहने वाले सभी हिंदू ही हैं। उन्होंने कहा, “संघ ने पहले से तय किया कि संपूर्ण समाज को संगठित करने के अलावा संघ को और कोई दूसरा काम नहीं करना है। जिसको आप आरएसएस कहते हो, आप कैसे कहते हो पता नहीं। बहुत से लोग कहते हैं कि नरेंद्र भाई प्रधानमंत्री हैं। आरएसएस के प्रधानमंत्री हैं। उनकी एक पॉलिटिकल पार्टी है। वो बीजेपी है, जो अलग है। उसमें बहुत स्वयंसेवक है, प्रभावी भी हैं।”

अपने संबोधन में मोहन भागवत ने स्पष्ट किया कि RSS कोई राजनीतिक पार्टी नहीं है, हालाँकि इससे जुड़े कुछ लोग राजनीति में सक्रिय हैं। उन्होंने कहा कि संघ का मूल उद्देश्य समाज को जोड़ना, सांस्कृतिक चेतना को मजबूत करना और राष्ट्र निर्माण में योगदान देना है।

भागवत ने कहा कि हम विश्व गुरु बनेंगे, लेकिन सिर्फ भाषणों से नहीं बल्कि उदाहरणों के जरिए। अगर आप भारतीय हैं तो ये हुनर आपको विरासत में मिला है। भारत के मुस्लिम और ईसाई भारत के हैं। उन्होंने कहा कि भारत में चार तरह के हिंदू हैं। पहले वो जो गर्व से कहते हैं कि हम हिंदू हैं। दूसरे वो जो कहते हैं कि हम हिंदू हैं तो क्या? इसमें गर्व करने वाली क्या बात है। तीसरे, वो जो कहते हैं कि धीरे से बोलो कि हम हिंदू हैं। अगर आप हमसे घर में पूछेंगे तो हम आपको बताएँगे कि हम हिंदू हैं और चौथे, वो जो भूल गए हैं कि हम हिंदू हैं, या फिर जिन्हें भूलने को विवश किया गया है कि वे हिंदू हैं।

भागवत ने ‘हिंदू’ शब्द की उत्पत्ति पर बात करते हुए इसे केवल एक धर्म तक सीमित न मानकर एक सांस्कृतिक और सभ्यतागत पहचान बताया। उन्होंने कहा कि भारतीय होना केवल नागरिकता नहीं, बल्कि एक स्वभाव है, एक ऐसा जोड़ने वाला स्वभाव, जो विविधता में एकता की भावना को मजबूत करता है। उन्होंने सभी धर्मों के प्रति सम्मान, अनुशासन, सेवा और सामाजिक एकता को मजबूत करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया, ताकि राष्ट्र का समग्र विकास सुनिश्चित किया जा सके।