पहले मौलाना जर्जिस ने बताया ‘नमाजी’, अब सपा के पूर्व सांसद एसटी हसन ने कहा- राम-कृष्ण हो सकते पैगंबर

उत्तर प्रदेश में भगवान श्रीकृष्ण और श्रीराम को लेकर छिड़ा धार्मिक विवाद अब और ज्यादा गहरा गया है। मौलाना जर्जिस अंसारी के बाद अब समाजवादी पार्टी (सपा) के पूर्व सांसद एसटी हसन का भी एक विवादित बयान सामने आया है। मुरादाबाद में शनिवार (18 जुलाई) को एसटी हसन ने मौलाना के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि श्रीराम और श्रीकृष्ण भी मुस्लिम पैगंबर हो सकते हैं।

इस पूरे मामले की शुरुआत दो दिन पहले हुई थी। इटावा का रहने वाला मौलाना जर्जिस अंसारी ने भगवान कृष्ण पर विवादित बयान दिया था, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि भगवान श्रीकृष्ण धर्म से मुस्लिम थे और 5 वक्त की नमाज अदा करते थे। मौलाना के इस आपत्तिजनक बयान के बाद लखनऊ की हजरतगंज कोतवाली समेत कई जगहों पर उनके खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज कराई गई।

अब जानते है सपा नेता एसटी हसन ने क्या कहा?

मुरादाबाद में पत्रकारों से बात करते हुए सपा के पूर्व सांसद एसटी हसन ने इस विवाद को और हवा दे दी। उन्होंने कहा, “कई मुस्लिम स्कॉलर्स (विद्वानों) का ऐसा मानना है कि हो सकता है श्रीराम और श्रीकृष्ण दुनिया में आए 1 लाख 24 हजार पैगंबरों में से एक हों।” उन्होंने दलील दी कि इतने लंबे समय में इतिहास की कई बातें बदल जाती हैं, इसलिए वह इस पर कोई पक्की टिप्पणी नहीं कर सकते।

एसटी हसन ने आगे कहा कि वे दोनों बहुत बड़ी हस्ती थे और उन्होंने पूरी इंसानियत को बहुत बड़ी सीख दी थी। हालाँकि, एक तरफ जहाँ मौलाना जर्जिस अंसारी के खिलाफ देश भर में गुस्सा है, वहीं सपा नेता द्वारा मौलाना के दावों का समर्थन करने के बाद विवाद और बढ़ गया है। हिंदू समाज के लोग इसे अपने आराध्य देवों के इतिहास को बदलने और उनका अपमान करने की सोची-समझी साजिश बता रहे हैं।

गीता के श्लोक की गलत व्याख्या: जानिए क्या है श्लोक का असली अर्थ

धार्मिक जानकारों और संस्कृत के विद्वानों का कहना है कि मौलाना जर्जिस अंसारी ने अपने फायदे के लिए श्रीमद्भगवद्गीता के एक श्लोक की बिल्कुल गलत व्याख्या की है। उन्होंने अपने हिसाब से अर्थ निकालकर लोगों को गुमराह करने की कोशिश की है। असल में इस पूरे श्लोक में कहीं भी नमाज, नमाज के तरीके या इस्लाम शब्द का कोई जिक्र तक नहीं है।

आखिर मौलाना जर्जिस अंसारी ने जलसे में क्या बयान दिया था?

मौलाना जर्जिस ने भगवान श्रीकृष्ण को लेकर यह विवादित बयान 23 जून को झारखंड के देवघर में आयोजित एक जलसे के दौरान दिया था। मौलाना ने मंच से हूबहू यह कहा था, “हमारे भाई अगर बुरा ना मानें, तो कृष्ण जी भी पाँचों वक्त की नमाज पढ़ा करते थे। यकीन ना आए तो श्रीमद्भागवत गीता का छठा अध्याय का दसवां मंत्र देख लीजिए। श्लोक में कृष्ण जी अर्जुन से कह रहे हैं कि हे अर्जुन! ईश्वर की जब पूजा करो तो पूरे शरीर का योग करो। योगी, यूपी वाला नहीं। पूरे शरीर का योग करो। यानी पूजा सिर्फ खड़े होकर नहीं, पूरे शरीर के साथ होनी चाहिए और पूरे शरीर का योग होना चाहिए।”

मौलाना जर्जिस ने आगे कहा, “आज हिंदू धर्म में चले जाइए, सिर्फ ऐसे हाथ उठाएँगे, ‘ओम नमः शिवाय’, बस हो गई पूजा। ये हिंदू-मुस्लिम अगर ये अपनी किताबें पढ़ लें, योगी जी बड़े भक्त बनते हैं राम के… अगर अपनी किताबें पढ़ लें, तो यकीन मानिए इस्लाम से मोहब्बत करने लगेंगे। क्योंकि इस्लाम ये मुसलमानों का धर्म है ही नहीं सिर्फ, ये उनका भी धर्म है। इसी दीन और इसी धर्म को रामचंद्र जी ने भी पेश किया है, कृष्ण जी ने भी पेश किया है। ये सिर्फ मुसलमानों का नहीं है।”