उत्तर प्रदेश के रामपुर में अब अवैध निर्माणों पर चलेगा सीएम योगी का बुलडोजर। जी हाँ, समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता मोहम्मद आजम खान के ड्रीम प्रोजेक्ट ‘मौलाना मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी’ पर प्रशासन का बड़ा बुलडोजर चलने की तैयारी में है।
रामपुर विकास प्राधिकरण (RDA) ने यूनिवर्सिटी परिसर में बनी 40 इमारतों में से 38 को पूरी तरह अवैध घोषित कर दिया है। प्राधिकरण ने इन सभी 38 अवैध भवनों को गिराने (ध्वस्तीकरण) का सख्त आदेश जारी कर दिया है।
यूपी प्रशासन ने जौहर यूनिवर्सिटी प्रबंधन को इस अवैध निर्माण को खुद हटाने के लिए महज 15 दिनों की मोहलत दी। जिलाधिकारी अजय कुमार द्विवेदी ने साफ कहा है कि अगर यूनिवर्सिटी प्रबंधन ने 15 दिन के भीतर इन अवैध इमारतों को खुद नहीं हटाया, तो रामपुर विकास प्राधिकरण नियमानुसार खुद बुलडोजर चलाकर इन्हें ध्वस्त कर देगा।
इन अवैध हिस्सों को तोड़ने में जितना भी खर्चा होगा, वो भी आजम खान से ही वसूला जाएगा। यह बड़ी कार्रवाई उत्तर प्रदेश की योगी सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत की गई है। वर्तमान में आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम रामपुर जेल में बंद हैं, जिन्हें 17 नवंबर 2025 से दो पैन कार्ड रखने के मामले में 7 साल की सजा भुगतनी पड़ रही है।
बिना नक्शे के बनीं 38 इमारतें
रामपुर विकास प्राधिकरण ने यह कार्रवाई क्षेत्रीय अवर अभियंता की एक जाँच रिपोर्ट के आधार पर शुरू की थी। जाँच में सामने आया कि जौहर यूनिवर्सिटी के विशाल परिसर में कुल 40 भवन बने हुए हैं। जब इनके कागजातों की बारीकी से जाँच की गई, तो पता चला कि इनमें से केवल दो भवनों के नक्शे (मानचित्र) ही वैध रूप से पास हैं।
बाकी 38 भवनों का कोई भी स्वीकृत नक्शा प्रशासन के पास नहीं मिला। इसके बाद प्राधिकरण ने यूनिवर्सिटी प्रबंधन को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब माँगा था। संतोषजनक जवाब न मिलने पर दोनों पक्षों की विस्तृत कानूनी सुनवाई की गई, जिसके बाद यह भारी-भरकम अवैध निर्माण ढहाने का फैसला लिया गया।
यूनिवर्सिटी की दलीलें खारिज
सुनवाई के दौरान जौहर यूनिवर्सिटी की तरफ से यह दलील दी गई थी कि यह यूनिवर्सिटी रामपुर सदर तहसील के ग्राम सिंगनखेड़ा में स्थित है। यह इलाका 27 सितंबर 2024 से पहले रामपुर विकास प्राधिकरण के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता था। प्रबंधन का कहना था कि निर्माण बहुत पहले हुए थे, इसलिए इन्हें अवैध नहीं कहा जा सकता।
रामपुर के जिलाधिकारी अजय कुमार द्विवेदी ने यूनिवर्सिटी के इन सभी तर्कों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि साल 2024 से पहले यह पूरा क्षेत्र जिला पंचायत के अधीन आता था। नियमों के मुताबिक, उस समय भी किसी भी निर्माण के लिए सक्षम सरकारी संस्था से नक्शा पास करवाना कानूनी रूप से अनिवार्य था।
कानून की जानकारी होने पर भी लापरवाही
जिलाधिकारी ने बताया कि जाँच में पाया गया कि यूनिवर्सिटी ने अपने मेडिकल कॉलेज और एकेडमिक ब्लॉक के रूप में केवल दो ही भवनों के नक्शे जिला पंचायत से पास कराए थे। इससे यह पूरी तरह साबित होता है कि यूनिवर्सिटी प्रबंधन को नक्शा पास कराने के नियमों और पूरी सरकारी प्रक्रिया की अच्छी तरह जानकारी थी।
इसके बावजूद उन्होंने बाकी के 38 भवनों के लिए नक्शा पास कराने की कोई अनुमति नहीं ली। प्रशासन ने इसे एक बड़ी और जानबूझकर की गई लापरवाही माना है। इसी वजह से उत्तर प्रदेश नगर नियोजन एवं विकास अधिनियम, 1973 की धारा 27(1) और धारा 59 के तहत यह सख्त कार्रवाई अमल में लाई जा रही है।
आजम खान का गिरता सियासी साम्राज्य
आजम खान समाजवादी पार्टी के संस्थापक सदस्यों में से एक हैं। वह रामपुर सीट से रिकॉर्ड 10 बार विधायक चुने जा चुके हैं। इसके अलावा वह सांसद और राज्य सरकार में बेहद ताकतवर कैबिनेट मंत्री भी रहे हैं। राजनीति के साथ रामपुर में यह भव्य यूनिवर्सिटी बनाना उनका सबसे बड़ा सपना था।
अब आजम खान की मुश्किलें चारों तरफ से घिर चुकी हैं। एक तरफ जहाँ वह खुद जेल की सजा काट रहा हैं, वहीं दूसरी तरफ उनका यह ड्रीम प्रोजेक्ट भी कानूनी संकट में फँस गया है। इससे पहले जून के महीने में भी आजम खान के ‘मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट’ को आयकर विभाग ने एक बड़ा नोटिस भेजा था, क्योंकि जाँच में इस ट्रस्ट के भीतर बड़े पैमाने पर पैसों की हेराफेरी (वित्तीय अनियमितताएँ) पाई गई थी। यही ट्रस्ट इस यूनिवर्सिटी को चलाता है। अब 15 दिन बाद प्रशासन इस मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई का कदम उठाएगा।

