अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने और संघर्ष विराम जैसे प्रयासों की चर्चा के बीच हालात फिर से बिगड़ गए हैं। समुद्री सुरक्षा से जुड़ी घटनाओं, जहाजों पर हमलों और उसके बाद हुई सैन्य कार्रवाई ने कुछ ही दिनों में दोनों देशों को दोबारा सीधे टकराव की स्थिति में ला दिया है।
सीजफायर के प्रस्ताव के बाद कैसे शुरू हुआ नया तनाव?
23 जून 2026 को संयुक्त राष्ट्र ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में फंसे जहाजों को सुरक्षित निकालने के लिए ईरानी और ओमानी जलक्षेत्र से दो नए समुद्री मार्गों की घोषणा की। हालाँकि ईरान ने इस योजना को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि इसकी घोषणा उससे बिना चर्चा किए की गई।
इसके बाद 25 जून को ओमान के तट के पास ताइवानी ऑपरेटेड जहाज ‘एवर लवली’ पर संदिग्ध ईरानी ड्रोन हमला हुआ। इस हमले में जहाज को नुकसान पहुँचा, लेकिन चालक दल सुरक्षित रहा। अमेरिका ने इस घटना को दोनों पक्षों के बीच बनी सहमति के उल्लंघन के रूप में देखा।
हमलों और जवाबी कार्रवाई ने कैसे बढ़ाया संघर्ष?
26 जून को अमेरिका ने ईरान पर सैन्य कार्रवाई करते हुए मिसाइल और ड्रोन स्टोरेज साइट्स के साथ तटीय रडार ठिकानों को निशाना बनाने का दावा किया। इसके अगले दिन IRGC ने क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी बलों पर जवाबी हमलों की बात कही, जबकि बहरीन ने अपने क्षेत्र की ओर कई ड्रोन आने की जानकारी दी।
इसी दौरान ब्रिटेन की मैरिटाइम ट्रेड ऑपरेशंस एजेंसी ने होर्मुज में एक और टैंकर के प्रोजेक्टाइल की चपेट में आने की सूचना दी। तनाव और बढ़ गया जब अमेरिकी US सेंट्रल कमांड ने दूसरी लहर के हमले शुरू किए और कहा कि उसने ईरान की सैन्य निगरानी व्यवस्था, संचार प्रणाली, एयर डिफेंस साइट्स, ड्रोन स्टोरेज सुविधाओं और समुद्री माइन बिछाने की क्षमता को निशाना बनाया।
इसके जवाब में 28 जून 2026 को ईरान ने बहरीन और कुवैत में अमेरिकी बलों पर जवाबी हमलों का दावा करते हुए कहा कि किसी भी ‘दुश्मन आक्रामकता’ का ‘कड़ा और निर्णायक जवाब’ दिया जाएगा। अमेरिका का दावा है कि ईरान ने सीजफायर समझौते का उल्लंघन करते हुए एक तेल टैंकर पर ड्रोन हमला किया था, जिसके जवाब में यह कार्रवाई की गई।
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने बताया कि उसकी नौसेना और एयरोस्पेस फोर्स ने संयुक्त अभियान चलाते हुए कुवैत और बहरीन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं। IRGC के अनुसार यह कार्रवाई हालिया अमेरिकी हमलों के जवाब में की गई।
संगठन ने यह भी कहा कि सीजफायर का उल्लंघन इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन की पहली शर्त के खिलाफ है और इससे सभी कूटनीतिक प्रक्रियाएँ पूरी तरह रुक सकती हैं।

