पागल-खतरनाक कुत्तों को सुप्रीम कोर्ट ने दी मारने की इजाजत, सड़कों से हटाने के पुराने आदेश को भी रखा कायम: कहा- बिना भय के जीने का है सबको अधिकार

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि नागरिकों की सुरक्षा सर्वोपरि है। खतरनाक, पागल या लाइलाज कुत्तों के मामले में जरूरत पड़ने पर इच्छामृत्यु यानी यूथेनेशिया दी जा सकती है। कोर्ट के मुताबिक, नियमों का पालन करते हुए अच्छी नीयत से काम करने वाले अधिकारियों को किसी भी दंडात्मक कार्रवाई या FIR से डरने की जरूरत नहीं है। जनता के हित को देखते हुए नगर निगम और दूसरे प्राधिकारियों को ये अधिकार दिए गए हैं।

कोर्ट ने आवारा कुत्तों को सड़क से हटाने के अपने फैसले को बरकरार रखते हुए ये बातें कही हैं। कोर्ट ने कहा है कि सार्वजनिक स्थलों से हटाए गए कुत्तों को केवल शेल्टर में ही रखा जाए।

जस्टिस विक्रम नाथ, संदीप मेहता और एनवी अंजेरिया की खंडपीठ ने स्टे डॉग मामले की सुनवाई के दौरान ये बातें कही। कोर्ट ने कहा कि खतरनाक और आक्रामक कुत्तों को इच्छामृत्यु दिया जा सकता है। कोर्ट ने नवंबर 2025 को एक आदेश में सड़क से आवारा कुत्तों को हटाने के आदेश दिए थे। इस रुख को एक बार फिर साफ किया गया है।

सुप्रीम कोर्ट के मुताबिक, सम्मान के साथ जीने के अधिकार में बिना डर के जीने का अधिकार भी शामिल है। लोगों को आवारा कुत्तों के काटने के डर से मुक्ति मिलनी चाहिए। राज्य मूक दर्शक बन कर नहीं रह सकता। कोर्ट इस जमीनी हकीकत को नजरअंदाज नहीं कर सकता। बच्चे और बुजुर्ग खास तौर पर इसके शिकार हो रहे हैं।