अपने इस दावे को साबित करने के लिए निलंबित इंजीनियर ने सीधे सूरत नगर निगम के म्युनिसिपल कमिश्नर (नगर निगम आयुक्त) के साथ हुई व्हाट्सएप चैट भी कोर्ट के सामने पेश कर दी है। यह मामला गुजरात हाई कोर्ट पहुँचने के बाद 1 जुलाई 2026 को नगर निगम के 5 इंजीनियरों को नौकरी से निलंबित कर दिया गया था।
સુરત નાસિરનગર ડિમોલિશન કેસમાં મોટો ખુલાસો..! કમિશનર અને સસ્પેન્ડેડ ઈજનેરની ચેટ વાયરલ
— NewsCapital Gujarat (@NewsCapitalGJ) July 15, 2026
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व्हाट्सएप चैट में मिले कार्रवाई के निर्देश
अदालत में पेश की गई इस व्हाट्सएप चैट में 21 मई 2026 की तारीख साफ-साफ दिखाई दे रही है। आपको बता दें कि नासिरनगर में डिमोलिशन की यह पूरी कार्रवाई मई महीने के आखिरी दिनों में की गई थी। इस चैट के भीतर ‘म्युनिसिपल कमिश्नर’ नाम से सेव किए गए एक मोबाइल नंबर से फॉरवर्ड किया गया मैसेज दिखाई दे रहा है।
इस वायरल मैसेज में साफ तौर पर लिखा था कि वार्ड नंबर 7 में चंद्रशेखर आजाद ब्रिज के पास स्थित इलाके से तुरंत अतिक्रमण हटाया जाए। इसके साथ ही मैसेज में निर्देश देते हुए लिखा गया था कि ‘इसे जल्द से जल्द पूरा करें।’ इसके जवाब में निलंबित इंजीनियर सुजल प्रजापति की तरफ से ‘जी सर’ लिखकर भेजा गया था।
काम पूरा होने पर भेजे गए वीडियो
इस मामले में सिर्फ 21 मई ही नहीं, बल्कि 29 और 30 मई की बातचीत के सबूत भी अदालत के सामने आए हैं। 30 मई को नासिरनगर इलाके में डिमोलिशन की कार्रवाई पूरी हो गई थी। इसके ठीक बाद इंजीनियर ने कथित तौर पर इस पूरी कार्रवाई के Video म्युनिसिपल कमिश्नर को भेजे थे। उधर से उस नंबर से इन वीडियो पर जवाब भी बकायदा वापस आया था।
इसके बाद जब इस डिमोलिशन कार्रवाई को लेकर बड़ा विवाद शुरू हो गया, तो दोनों पक्षों के बीच बातचीत हुई थी। चैट में दिखाई दे रहा है कि विवाद बढ़ने के बाद दोनों के बीच कुछ मीडिया रिपोर्टों और खबरों का भी आदान-प्रदान हुआ था। इन सबूतों से साफ है कि बड़े अधिकारी इस पूरी कार्रवाई से लगातार जुड़े हुए थे।
वरिष्ठ अधिकारियों पर जिम्मेदारी से भागने का आरोप
इंजीनियर सुजल प्रजापति ने अपने हलफनामे में वरिष्ठ अधिकारियों पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा है कि डिमोलिशन शुरू होने से लेकर इसके खत्म होने के बाद तक, पूरी कार्रवाई पर बड़े अधिकारियों की लगातार नजर बनी हुई थी। इस पूरे मामले की हर एक स्तर पर बड़े अधिकारियों द्वारा निगरानी की जा रही थी।
लेकिन जैसे ही यह पूरा विवादित मामला गुजरात हाई कोर्ट पहुँचा और बड़े अफसरों पर सवाल उठने लगे, तब वरिष्ठ अधिकारियों ने चालाकी से खुद को इस पूरे मामले से अलग करना शुरू कर दिया। इंजीनियर ने यह भी बड़ा दावा किया है कि संकट बढ़ने पर उन्होंने कई बार कमिश्नर को फोन किया था। लेकिन कुछ ही कॉल्स के बाद कमिश्नर की तरफ से उनका फोन उठाना पूरी तरह बंद कर दिया गया।
क्या है नासिरनगर का पूरा विवाद?
यह पूरा गंभीर विवाद 30 मई को सूरत के नासिरनगर इलाके में हुई एक बहुत बड़ी डिमोलिशन कार्रवाई से जुड़ा हुआ है। नगर निगम की इस कार्रवाई के दौरान इलाके के करीब 100 निर्माणों को पूरी तरह से हटा दिया गया था। इसके बाद जब इस कार्रवाई पर जनता और मीडिया में भारी विवाद खड़ा हुआ, तो किसी भी बड़े अधिकारी ने इसकी जिम्मेदारी लेने की हिम्मत नहीं दिखाई।
हैरानी की बात यह है कि शुरुआत में सूरत नगर निगम ने आधिकारिक बयान जारी कर कह दिया था कि उसने यह कार्रवाई करवाई ही नहीं है। इसके बाद मामले की गहराई से जाँच करने के लिए एक विशेष समिति का गठन किया गया था। वहीं दूसरी तरफ, इस कार्रवाई से प्रभावित हुए पीड़ित पक्ष ने न्याय के लिए सीधे गुजरात हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। अब इस चैट के सामने आने के बाद कोर्ट क्या रुख अपनाता है, यह देखना बेहद अहम होगा।

