महाराष्ट्र के नासिक में TCS के दफ्तर में हिंदू महिलाओं से यौन उत्पीड़न और धर्मांतरण की कोशिश के मामले में आए दिन गंभीर खुलासे हो रहे हैं। इस मामले की जाँच के लिए गठित विशेष जाँच दल (SIT) को अब तक 20 से ज्यादा शिकायतें मिल चुकी हैं। ये शिकायतें उस हेल्पलाइन नंबर पर दर्ज की गई हैं जिसे खास तौर पर इस मामले से जुड़ी जानकारी और आरोपों के लिए जारी किया गया था।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन शिकायतों में से कम से कम 4 महिलाओं ने गंभीर आरोप लगाए हैं। हालाँकि, मामले की गंभीरता के बावजूद जाँच एजेंसियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह बनी हुई है कि शिकायतकर्ता अब तक सामने आने और FIR दर्ज कराने के लिए नहीं आई हैं। यही कारण है कि जाँच की प्रक्रिया धीमी हो रही है।
🔴 #BREAKING | नासिक TCS धर्मांतरण केस में 20 नई शिकायतें, हेल्पलाइन नंबर पर लोगों ने की शिकायत#NashikTCSCase | @ranjanasingh95 pic.twitter.com/Nm9UDplpin
— NDTV India (@ndtvindia) April 22, 2026
पुलिस सूत्रों के अनुसार, हेल्पलाइन पर आई कई शिकायतें कार्यस्थल पर उत्पीड़न और धार्मिक भावनाएँ आहत होने से जुड़ी हैं। लेकिन इन शिकायतों को कानूनी कार्रवाई में बदलने के लिए जरूरी है कि पीड़ित खुद सामने आकर अपना बयान दर्ज कराएँ। अधिकारियों का मानना है कि इसके पीछे कई वजहें हो सकती हैं, जिनमें सामाजिक दबाव, नौकरी या करियर पर पड़ने वाला असर और पहचान उजागर होने का डर प्रमुख हैं।
वहीं, NDTV की एक रिपोर्ट में नासिक TCS कांड को लेकर कहा गया है कि जब पीड़िताओं ने इस मामले की शिकायत करने की कोशिश की तो वरिष्ठ अधिकारियों से बार-बार उन्हें नजरअंदाज किया। एक पीड़िता का कहना है कि जब उन्होंने इस मामले को लेकर कंपनी हेड से शिकायत की तो उसे जवाब मिला कि ‘तुमको क्यों हाईलाइट होना है, जाने दो, छोड़ दो’।
पीड़िता ने जून 2023 में अपने क्वालिटी और ट्रेनिंग मैनेजर से मौखिक रूप से शिकायत की थी लेकिन कार्रवाई करने के बजाय उसे यह कहकर टाल दिया गया कि आरोपित का चरित्र पहले से ही संदिग्ध है इसलिए उसे खुद सतर्क रहना चाहिए और अकेले नहीं रहना चाहिए। टीम लीडर ने भी इसी तरह की सलाह देकर मामले को नजरअंदाज कर दिया।

