ईरान के नए नेतृत्व को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बेहद सनसनीखेज और डराने वाला बयान दिया है। ट्रंप ने साफ शब्दों में कहा, “ईरान के नए नेता के लिए हमारे दिमाग में जो लोग थे, उनमें से ज्यादातर मर चुके हैं। अब जो नया समूह सामने आया है, वे भी रिपोर्ट्स के आधार पर शायद जल्द ही मर चुके होंगे।” ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत के बाद उनके बेटे मोजतबा खामेनेई को ईरान का नया ‘सुप्रीम लीडर’ चुन लिया गया है।
PRESIDENT TRUMP ON WHO SHOULD BECOME IRAN'S NEW LEADER:
— Fox News (@FoxNews) March 3, 2026
"Well, most of the people we had in mind are dead…we had some in mind from that group that is dead. Now we have another group. They may be dead also based on reports." pic.twitter.com/diN7rfNKwY
अमेरिका की बड़ी तैयारी: अब हथियारों का मरेगा अंबार
ट्रंप की धमकी केवल शब्दों तक सीमित नहीं है। अमेरिका ने ईरान पर हमलों के बीच एक बड़ा कदम उठाया है। शुक्रवार (6 मार्च 2026) को व्हाइट हाउस में रक्षा क्षेत्र के बड़े ठेकेदारों (Defense Contractors) की एक हाई-लेवल मीटिंग बुलाई गई है। इस मीटिंग का मकसद युद्ध के लिए हथियारों का उत्पादन तेजी से बढ़ाना है, जिससे संकेत मिलते हैं कि आने वाले दिनों में मध्य पूर्व (Middle East) में टकराव और भी भीषण हो सकता है।
मोजतबा खामेनेई का चुनाव और IRGC का दबाव
अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत के बाद मौलवियों के समूह ‘द असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स’ ने 56 वर्षीय मोजतबा को मुल्क की बागडोर सौंपी है। ईरान की अपनी व्यवस्था ‘वंशवाद’ (अब्बू के बाद बेटे को सत्ता) के खिलाफ रही है, लेकिन कहा जा रहा है कि ईरान की ताकतवर फौज IRGC ने मौलवियों पर भारी दबाव बनाया ताकि मोजतबा को ही सर्वोच्च नेता चुना जाए। मोजतबा के फौज के साथ पुराने और बेहद मजबूत रिश्ते रहे हैं।
कोम शहर पर इजरायली हमला: क्या निशाने पर थे नए लीडर?
जिस वक्त ‘कोम’ शहर में नए सुप्रीम लीडर के नाम पर मुहर लगाने के लिए मौलवी जुटे थे, ठीक उसी समय इजरायल ने वहाँ जोरदार हमला कर दिया। हालाँकि अभी तक किसी बड़े जानी नुकसान की खबर नहीं है, लेकिन इस हमले ने पूरी दुनिया को हिला दिया है। उधर लेबनान में भी इजरायली हमले में 6 लोगों की मौत हो गई है। जंग की आग अब सऊदी अरब और कुवैत जैसे खाड़ी देशों तक महसूस की जा रही है।

