अमेरिका ने कीमतों के बहाने हटाया ईरानी तेल से बैन, समुद्र में मौजूद तेल खरीद सकेंगे सभी देश: भारत जैसे देशों को मिलेगा फायदा

दुनियाभर में कच्चे तेल (Crude Oil) की आसमान छूती कीमतों और भारी किल्लत के सामने आखिरकार अमेरिका को झुकना पड़ा है। ट्रंप प्रशासन ने ईरान से जुड़े तेल पर लगे कड़े प्रतिबंधों में 30 दिनों की अस्थायी छूट देने का बड़ा ऐलान किया है।

अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने शुक्रवार (20 मार्च 2026) को इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि पिछले दो हफ्तों में यह तीसरी बार है जब अमेरिका ने तेल प्रतिबंधों में ढील दी है। इससे पहले रूस को भी इसी तरह की राहत दी गई थी।

बाजार में आएगा 140 मिलियन बैरल तेल

प्रशासन द्वारा जारी नए लाइसेंस के मुताबिक, 20 मार्च से 19 अप्रैल 2026 के बीच जहाजों में लोड किए गए ईरानी कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों को बेचने की अनुमति दे दी गई है। स्कॉट बेसेंट का मानना है कि इस छूट से ग्लोबल मार्केट में करीब 140 मिलियन बैरल तेल की आवक होगी। यह कदम अमेरिका-ईरान युद्ध की वजह से ऊर्जा बाजार पर बने भारी दबाव को कम करने और तेल की महँगाई से जूझ रहे देशों को राहत देने के लिए उठाया गया है।

अमेरिका की चाल

हैरानी की बात यह है कि अमेरिका इस ढील को अपनी रणनीति का हिस्सा बता रहा है। बेसेंट ने कहा कि अमेरिका असल में ईरानी तेल का इस्तेमाल खुद तेहरान के खिलाफ ही कर रहा है। कीमतों को कंट्रोल में रखकर अमेरिका दुनिया में अपनी धाक बनाए रखना चाहता है। यह एक तरह का आर्थिक दांव है जिससे तेल की वैश्विक सप्लाई भी बनी रहे और अमेरिका का दबदबा भी कम न हो।

जारी रहेगा ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’

भले ही अमेरिका ने तेल की बिक्री में छूट दी है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि उसने ईरान के प्रति अपना रुख नरम कर लिया है। स्कॉट बेसेंट ने स्पष्ट किया कि ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ (Operation Epic Fury) पहले की तरह ही जारी रहेगा। इसका सीधा संदेश यह है कि अमेरिका ऊर्जा की कीमतों को नियंत्रित करने के साथ-साथ ईरान पर अपना सैन्य और कूटनीतिक दबाव कम नहीं होने देगा।