‘उधार’ के मेडल से नोबेल विजेता नहीं बनेंगे ट्रंप: मारिया मचाडो ने गिफ्ट किया अपना पुरस्कार, तो नोबेल सेंटर ने ली चुटकी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया मचाडो के बीच हुए एक ‘नोबेल गिफ्ट’ ड्रामे ने पूरी दुनिया का ध्यान खींच लिया है। 15 जनवरी 2026 को मारिया ने अपना नोबेल शांति पुरस्कार ट्रंप को ‘भेंट’ कर दिया और ट्रंप ने इसे खुशी-खुशी ‘स्वीकार’ भी कर लिया।

लेकिन इस बीच, ओस्लो स्थित नोबेल शांति केंद्र ने सोशल मीडिया पर एक लंबी पोस्ट डालकर ट्रंप की चुटकी ली और साफ कर दिया कि मेडल भले ही इधर-उधर हो जाए, लेकिन ‘नोबेल विजेता’ का खिताब कभी ट्रांसफर नहीं किया जा सकता।

ट्रंप की खुशी और व्हाइट हाउस का वो पल

गुरुवार (15 जनवरी 2026) को व्हाइट हाउस में ट्रंप और मारिया मचाडो की मुलाकात हुई। इस दौरान मारिया ने अपना नोबेल पदक ट्रंप को सौंप दिया। ट्रंप, जो लंबे समय से नोबेल जीतने का सपना देख रहे हैं, इतने गदगद हुए कि उन्होंने तुरंत सोशल मीडिया (Truth Social) पर पोस्ट किया।

ट्रंप ने इसे ‘आपसी सम्मान का शानदार तरीका’ बताते हुए मारिया को शुक्रिया कहा। ट्रंप ने दुनिया को यह दिखाने की कोशिश की कि भले ही आधिकारिक कमेटी ने उन्हें नोबेल न दिया हो, लेकिन एक विजेता ने खुद उन्हें अपना मेडल दे दिया है।

नोबेल कमेटी ने कर दिया ‘खेला’

जैसे ही ट्रंप की पोस्ट वायरल हुई, नोबेल पीस सेंटर ने एक दिलचस्प पोस्ट के जरिए ट्रंप को आईना दिखा दिया। सेंटर ने बताया कि 196 ग्राम के इस सोने के मेडल का मालिक तो बदला जा सकता है (जैसे यूक्रेन के लिए नीलामी में बेचा गया मेडल), लेकिन नोबेल पुरस्कार के नियम बहुत सख्त हैं।

उन्होंने साफ शब्दों में लिखा, “एक बार नोबेल पुरस्कार की घोषणा हो जाए, तो इसे न तो वापस लिया जा सकता है, न साझा किया जा सकता है और न ही किसी दूसरे को ट्रांसफर किया जा सकता है।” यानी ट्रंप के पास मेडल तो रह सकता है, लेकिन वे ‘नोबेल विजेता’ नहीं कहलाएँगे।

कुर्सी की चाहत और नोबेल का मोह

डोनाल्ड ट्रंप सालों से खुद को नोबेल का हकदार बताते रहे हैं। उन्होंने इसके लिए पाकिस्तान के आसिम मुनीर और यूक्रेन के जेलेंस्की जैसे नेताओं से अपना नाम नॉमिनेट भी करवाया था। वहीं मारिया मचाडो ने यह मेडल ट्रंप को इसलिए दिया क्योंकि ट्रंप ने वेनेजुएला में अमेरिकी दखल का समर्थन किया था।

हालाँकि, ट्रंप ने मारिया के बजाय वेनेजुएला के पूर्व उपराष्ट्रपति का साथ देकर उन्हें राजनीतिक झटका दिया था, फिर भी मारिया ने ट्रंप को रिझाने के लिए यह दाँव खेला। अब मेडल ट्रंप की मेज पर है, लेकिन ‘विजेता’ का टैग अब भी उनके लिए एक सपना ही है।