उत्तर प्रदेश के गाजीपुर से समाजवादी पार्टी के सांसद अफजाल अंसारी की मुश्किलें लगातार बढ़ रही हैं। हथियार लाइसेंस से जुड़े मामलों में गाजीपुर में कुल पाँच FIR दर्ज की गई हैं, जिनमें से एक अफजाल अंसारी के खिलाफ भी है। हथियार लाइसेंस में गड़बड़ी के आरोपों के सिलसिले में उनके खिलाफ दर्ज ये लगातार तीसरी FIR है।
उत्तर प्रदेश पुलिस ने मुख्तार अंसारी, उसके परिवार, गैंग के सदस्यों और सहयोगियों से जुड़े हथियार लाइसेंसों की राज्य स्तरीय जाँच में कई गंभीर अनियमितताओं का खुलासा किया है। पुलिस का कहना है कि जाँच अभी जारी है और आगे भी नई कार्रवाई हो सकती है।
STF की जाँच में 80 से ज्यादा हथियारों का हुआ सत्यापन
यह पूरी कार्रवाई STF द्वारा जुटाई गई खुफिया जानकारी के आधार पर की गई। इसके बाद वाराणसी रेंज के पुलिस उपमहानिरीक्षक वैभव कृष्ण की निगरानी में विशेष जाँच कराई गई। जाँच का दायरा मुख्तार अंसारी के परिवार, IS-191 गैंग (मुख्तार अंसारी गिरोह) के सदस्यों और उनके सहयोगियों को जारी हथियार लाइसेंस तथा उन लाइसेंसों पर खरीदे गए हथियारों तक रखा गया।
इस दौरान 43 लाइसेंस धारकों से जुड़े 80 से अधिक हथियारों का भौतिक सत्यापन किया गया। जाँच में सामने आया कि कई मामलों में हथियारों और लाइसेंस से जुड़े रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं थे, जिससे संदेह और गहरा हो गया।
रिकॉर्ड गायब, फर्जी पते और अधिकारियों की मिलीभगत के संकेत
जाँच के दौरान सबसे बड़ा खुलासा यह हुआ कि गाजीपुर के जिलाधिकारी कार्यालय से हथियार लाइसेंस की मूल फाइलें और हथियारों की खरीद-बिक्री से जुड़े महत्वपूर्ण रिकॉर्ड गायब मिले। पुलिस को आशंका है कि कुछ लाइसेंस धारकों और हथियार अनुभाग में तैनात अधिकारियों की मिलीभगत से इन दस्तावेजों को हटाया गया।
ऐसा इसलिए किया गया ताकि हथियारों की वास्तविक स्थिति और उनके दुरुपयोग को छिपाया जा सके। जाँच में यह भी सामने आया कि एक मामले में आवेदक ने अपना वास्तविक पता छिपाकर फर्जी आवासीय पते के आधार पर हथियार लाइसेंस हासिल किया था। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क में शामिल सभी लोगों की भूमिका की जाँच कर रही है।
अफजाल अंसारी पर राइफल रिकॉर्ड गायब कराने का आरोप, SIT करेगी जाँच
गाजीपुर के पुलिस अधीक्षक इराज राजा के अनुसार, अफजाल अंसारी के खिलाफ नई FIR कोतवाली थाने में दर्ज की गई है। आरोप है कि अरुणाचल प्रदेश के अलोंग जिले से प्राप्त हथियार लाइसेंस के आधार पर खरीदी गई एक राइफल से जुड़े रिकॉर्ड में गड़बड़ी की गई।
पुलिस का कहना है कि हथियार को जमा करने, उसके दुरुपयोग और उससे जुड़े मूल रिकॉर्ड गायब कराने के कारण उसका भौतिक सत्यापन संभव नहीं हो सका। इस मामले में पूर्व आर्म्स क्लर्क गौरी शंकर लाल और सुग्रीव तिवारी को भी आरोपित बनाया गया है।
उनके खिलाफ भारतीय दंड संहिता (तत्कालीन IPC) की धारा 409, 120B और 419 के साथ आर्म्स एक्ट की धारा 21, 25 और 30 के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस मुख्यालय के अनुसार अफजाल अंसारी और उनके बेटे का नाम कई हथियार लाइसेंसों तथा उनसे जुड़े रिकॉर्ड के गायब होने के मामलों में सामने आया है।
वहीं मुख्तार अंसारी की फरार बीवी अफशां अंसारी के अलावा कई वर्तमान और सेवानिवृत्त सरकारी अधिकारियों, जिनमें पूर्व आर्म्स क्लर्क, राजस्व अधिकारी और पुलिसकर्मी शामिल हैं, की भूमिका भी जाँच के दायरे में है। इन सभी पाँच FIR की जाँच के लिए गाजीपुर के एडिशनल SP (सिटी) की अध्यक्षता में विशेष जाँच दल (SIT) का गठन किया गया है।
SIT को हथियार अनुभाग से जुड़े मौजूदा और पूर्व अधिकारियों की भूमिका की गहन जाँच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि मुख्तार अंसारी, उसके गैंग और सहयोगियों से जुड़े हथियार लाइसेंसों का सत्यापन अभी जारी है।

