वाराणसी में मणिकर्णिका घाट पर मसाने की होली पर विवाद, डोम राजा परिवार ने रोकने की रखी माँग: दाह संस्कार रोकने की दी चेतावनी

उत्तर प्रदेश के वाराणसी में मणिकर्णिका घाट पर होने वाली ‘मसान की होली’ इस बार विवादों में आ गई है। डोम राजा परिवार के वंशज विश्वनाथ चौधरी ने जिला प्रशासन को ज्ञापन देकर इस आयोजन पर रोक लगाने की माँग की है। उनका कहना है कि यह परंपरा शास्त्रसम्मत नहीं है और इससे महाश्मशान की गरिमा प्रभावित हो रही है।

मणिकर्णिका घाट पर दशकों से रंगभरी एकादशी के बाद चिता की राख से होली खेलने की परंपरा चली आ रही है। मान्यता है कि भगवान शिव विवाह के बाद माता गौरी को काशी लाए थे और उनके गणों की इच्छा पूरी करने के लिए यह परंपरा शुरू हुई। समय के साथ यह आयोजन अघोरी और तांत्रिक परंपराओं से जुड़ गया।

डोम राजा परिवार और श्री काशी विद्वत परिषद से जुड़े विद्वानों का तर्क है कि किसी पुराण में मसाने की होली का उल्लेख नहीं है। उनका आरोप है कि आयोजन के दौरान हुड़दंग और गलत व्यवहार से श्मशान की पवित्रता भंग होती है। उन्होंने इसे रोकने के लिए दाह संस्कार तक को रोकने की दी चेतावनी दी।

वहीं आयोजकों का कहना है कि काशी स्वयं महाश्मशान है, जहाँ मृत्यु को भी उत्सव की तरह देखा जाता है। फिलहाल प्रशासन दोनों पक्षों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश में है।