कोलकाता में CEO ऑफिस का घेराव करने के पीछे निकला 2 TMC पार्षदों का हाथ: FIR दर्ज, चुनाव आयोग बोला- पुलिस ने नहीं लिया एक्शन तो हम लेंगे

पश्चिम बंगाल में चुनाव से पहले माहौल गरमाया हुआ है। कोलकाता पुलिस ने राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) दफ्तर के बाहर बिना इजाजत प्रदर्शन करने के आरोप में TMC के दो पार्षदों समेत 6 लोगों पर FIR दर्ज की है।

वहीं, मालदा में न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाने के मामले में ISF उम्मीदवार शाहजहाँ कादरी सहित 18 लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया है। इस पूरे विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने भी बंगाल सरकार को जमकर फटकार लगाई है।

कोलकाता: पुलिस की बात अनसुनी करने पर फँसे पार्षद

मामला 31 मार्च और 1 अप्रैल की रात का है, जब कोलकाता के स्ट्रैंड रोड पर स्थित चुनाव आयोग के दफ्तर (CEO ऑफिस) के बाहर भारी भीड़ जमा हो गई थी। पुलिस का कहना है कि वहाँ धारा 163 लागू थी, यानी भीड़ इकट्ठा करने की मनाही थी।

इसके बावजूद TMC पार्षद सचिन सिंह और शांति रंजन कुंडू ने अपने समर्थकों के साथ वहाँ नारेबाजी की। पुलिस के बार-बार हटने के आदेश के बाद भी जब प्रदर्शनकारी नहीं माने, तो पुलिस ने सरकारी काम में बाधा डालने और नियमों के उल्लंघन के तहत मामला दर्ज कर लिया।

मालदा: जब न्यायिक अधिकारियों को बनाया गया बंधक

विवाद की जड़ मालदा में चल रही ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ (SIR) की प्रक्रिया है। यहाँ विरोध इतना उग्र हो गया कि प्रदर्शनकारियों ने सात न्यायिक अधिकारियों को कई घंटों तक बंधक बना लिया। पुलिस का आरोप है कि इंडियन सेक्युलर फ्रंट (ISF) के उम्मीदवार शाहजहाँ अली कादरी ने ही भीड़ को भड़काया था। पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए कादरी और 18 अन्य उपद्रवियों को दबोच लिया है।

सुप्रीम कोर्ट की कड़ी फटकार: ‘यह सबसे ज्यादा बँटा हुआ राज्य है’

मालदा की घटना पर देश की सबसे बड़ी अदालत ने गहरी नाराजगी जाहिर की है। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस सूर्यकांत ने पश्चिम बंगाल सरकार को फटकार लगाते हुए कहा कि राज्य में हर चीज को राजनीतिक चश्मे से देखा जा रहा है।

जस्टिस सूर्यकांत ने बेहद सख्त लहजे में कहा, “दुर्भाग्य से, आपका राज्य सबसे ज्यादा विभाजित (बँटा हुआ) है। हमें नहीं पता कि असली उपद्रवी कौन है, लेकिन जो हुआ वह बहुत दुखद है।” कोर्ट ने साफ किया कि न्यायिक अधिकारियों के साथ ऐसी बदसलूकी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।