योगी राज में 60 साल का इंतजार खत्म, PAK-बांग्लादेश से आए परिवारों को मिलेगा जमीन का मालिकाना हक: यूपी सरकार ने ‘भूमिधरी’ प्रस्ताव पर लगाई मुहर

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने दशकों से विस्थापित जीवन जी रहे हिंदू बंगाली और शरणार्थी परिवारों के लिए खुशियों का पिटारा खोल दिया है। सरकार ने राजस्व संहिता में बड़ा संशोधन करते हुए पीलीभीत, लखीमपुर खीरी, रामपुर और बिजनौर में बसे हजारों शरणार्थियों को उनकी जमीन का असली ‘मालिक’ (भूमिधर) बनाने का फैसला किया है। इसके साथ ही, मेरठ से कानपुर देहात भेजे गए 99 बंगाली परिवारों को मात्र 1 रुपए के मामूली रेंट पर जमीन देने का रास्ता भी साफ हो गया है।

अब नहीं कहलाएँगे अतिक्रमणकारी, मिलेगा सम्मान

विभाजन के समय भारत आए हजारों परिवार पिछले 50 से 70 सालों से अपनी ही जमीन पर ‘अतिक्रमणकारी’ का ठप्पा झेल रहे थे। मालिकाना हक न होने की वजह से ये किसान न तो बैंक से खेती के लिए कर्ज ले पाते थे और न ही सरकारी केंद्रों पर अपनी फसल बेच पाते थे।

अब उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता अध्यादेश, 2026 के जरिए सरकार ने इन परिवारों को जमीन का कानूनी अधिकार दे दिया है। इससे अब ये लोग आसानी से बैंक लोन ले सकेंगे और अपनी उपज सम्मान के साथ सरकारी सेंटरों पर बेच पाएँगे।

1 रुपए में मिलेगा घर और जमीन का पट्टा

कानपुर देहात के रसूलाबाद में विस्थापित हिंदू बंगाली परिवारों को बसाने की प्रक्रिया अब तेज हो गई है। मेरठ के मवाना से आए 99 परिवारों को कानपुर देहात के ग्राम भैंसाया और ताजपुर तरसौली में बसाया जा रहा है।

योगी सरकार ने तय किया है कि इन परिवारों से केवल 1 रुपए लीज रेंट लिया जाएगा। पट्टे के नियमों और कागजी कार्रवाई के लिए जिलाधिकारी को 27 मार्च 2026 को नए आदेश जारी कर दिए गए हैं। पहले पट्टे के प्रारूप को लेकर कुछ पेंच फँसा था, जिसे अब सुलझा लिया गया है।

इन लोगों को होगा सीधा फायदा

इस ऐतिहासिक फैसले का लाभ उन सभी परिवारों को मिलेगा जो भारत-पाकिस्तान विभाजन के समय विस्थापित हुए थे। इसमें वे लोग भी शामिल हैं जो नागरिकता संशोधन कानून (CAA 2019) के तहत भारतीय नागरिकता के हकदार हैं या जिन्हें अलग-अलग सरकारी योजनाओं के तहत बसाया गया था। पीलीभीत, रामपुर और लखीमपुर खीरी जैसे जिलों में रह रहे हजारों परिवारों का आर्थिक और सामाजिक स्तर अब इस फैसले से सुधरेगा।

अंत्योदय का संकल्प होगा पूरा

सरकार का मानना है कि इस संशोधन से समाज के सबसे निचले पायदान पर खड़े लोगों को सुरक्षा और सम्मान मिलेगा। जो लोग दशकों से अनिश्चितता के साये में जी रहे थे, उनके पास अब अपनी जमीन के पक्के कागज होंगे। राजस्व संहिता में इस बदलाव को सरकार ने अपने ‘अंत्योदय’ के लक्ष्य यानी आखिरी व्यक्ति तक विकास पहुँचाने की दिशा में एक बड़ी जीत बताया है।