Sunday, July 14, 2024
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शराब और बस के बाद अब दिल्ली में टॉयलेट घोटाला! डिप्टी CM मनीष सिसोदिया के खिलाफ जाँच की माँग, प्रतिबंधित कंपनी को ठेका देने का आरोप

दिल्ली सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कुमार ने आगे आरोप लगाया कि सिसोदिया ने खुद 2021 में दो साल के लिए इस कंपनी को उसके खराब प्रदर्शन के लिए प्रतिबंधित किया था। वहीं, हाई कोर्ट ने भी उस कंपनी को अपने खराब रिकॉर्ड के लिए कोई क्लीन चिट नहीं दी है।

दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया (Manish Sisodia) पर कॉन्ग्रेस ने ‘टॉयलेट घोटाले’ का आरोप लगाया है। दिल्ली कॉन्ग्रेस के नेताओं ने मंगलवार (20 सितंबर, 2022) को इस सिलसिले में उप-राज्यपाल (LG) वी के सक्सेना से मुलाकात की और पब्लिक टॉयलेट में कांट्रैक्ट की जाँच कराने की माँग की। उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली सरकार शहर में सार्वजनिक शौचालयों का प्रबंधन गैर सरकारी संगठनों की जगह एक प्रतिबंधित कंपनी को सौंपने की योजना बना रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दिल्ली कॉन्ग्रेस अध्यक्ष अनिल कुमार की अध्यक्षता में पार्टी के नेताओं के प्रतिनिधिमंडल ने एलजी को एक ज्ञापन सौंपा। इसमें उन्होंने दिल्ली सरकार की योजना में भ्रष्टाचार का दावा करते हुए पब्लिक टॉयलेट में वेस्टर्न टॉयलेट सीट लगाने के कांट्रैक्ट की जाँच कराने की माँग की है। अनिल कुमार ने सिसोदिया पर आरोप लगाते हुए पूछा कि जिस कंपनी को उन्होंने खुद प्रतिबंधित किया है, अब उसे टेंडर क्यों दिया जा रहा है?

कुमार के अनुसार, “18 अगस्त को 559 सार्वजनिक सुविधा परिसरों में 18620 शौचालयों के निर्माण के लिए एक डिबार्ड कंपनी को ठेका देने का निर्णय लिया गया था। दिल्ली सरकार टेंडर जारी करने के लिए पारंपरिक ई-प्रोक्योरमेंट वेबसाइट के बजाए GeM पोर्टल पर गई और सीधे एक प्रतिबंधित कंपनी को ठेका देने की पेशकश की।”

दिल्ली सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कुमार ने आगे आरोप लगाया कि सिसोदिया ने खुद 2021 में दो साल के लिए इस कंपनी को उसके खराब प्रदर्शन के लिए प्रतिबंधित किया था। वहीं, हाई कोर्ट ने भी उस कंपनी को अपने खराब रिकॉर्ड के लिए कोई क्लीन चिट नहीं दी है।

दिल्ली कॉन्ग्रेस के मुताबिक, 8 जून को आदेश में जब GeM पोर्टल की निविदा शर्तों में कहा गया था कि खराब प्रदर्शन के ट्रैक रिकॉर्ड वाली कंपनी निविदा बोली में भाग नहीं ले सकती हैं, तो उस कंपनी को निविदा बोली में भाग लेने की अनुमति कैसे दी गई?

बता दें कि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की नेतृत्व वाली दिल्ली की आम आदमी पार्टी की सरकार पर इससे पहले शराब और बस घोटाले का आरोप भी लग चुका है। शराब पॉलिसी से किन-किन लोगों को लाभ पहुँचाने की कोशिश की गई और यह कैसे-कैसे अंजाम दिया गय, इसको लेकर एक शख्स ने विस्तार से बताया था। उसने बताया कि इसमें आम आदमी पार्टी के नेताओं को कई सौ करोड़ रुपए का लाभ पहुँचा है और जिनको फायदा पहुँचा है, उन सभी ने अरविंद केजरीवाल को पैसे दिए हैं।

वहीं, बीते दिनों दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना (Delhi Lieutenant Governor VK Saxena) ने आम आदमी पार्टी सरकार द्वारा बस खरीद मामले से जुड़ी घोटाले की जाँच सीबीआई (CBI) को सौंपी थी। 

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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