एक तरफ कमलनाथ सरकार के विधायकों का इस्तीफा देने का सिलसिला जारी है, जो कि इस्तीफा देने वालों की संख्या 19 से बढ़कर 22 पहुँच गई है। वहीं एक तरफ तो कमलनाथ सरकार का गिरना तय माना जा रहा है तो दूसरी ओर बीजेपी ने अपना गणित फिट करने की जुगत शुरू कर दी है।
13 मार्च को राज्यसभा चुनाव के लिए नॉमिनेशन का आखिरी दिन है। कहा जा रहा है कि सिंधिया खुद के लिए राज्यसभा सीट या मध्य प्रदेश कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष का पद चाहते थे। लेकिन अब बात बिगड़ गई है।
गृह मंत्रालय ने यह प्रतिक्रिया एबीपी न्यूज़ की उन दो रिपोर्ट्स के पब्लिश होने पर दी जिसमें कहा गया था कि गृह मंत्रालय दिल्ली हिंसा से निपटने के दिल्ली पुलिस के तरीके से असंतुष्ट है और वह इसके लिए जिम्मेदार पुलिस अधिकारियों पर कार्यवाही कर सकता है।
राजस्थान के सीकर निवासी मृतक हेड कॉन्स्टेबल रतनलाल वर्ष 1998 में कॉन्स्टेबल के पद पर दिल्ली पुलिस में भर्ती हुए थे। सोमवार को दिल्ली के गोकुलपुरी में हुई सीएए के नाम पर हुई हिंसा में हेड कॉन्स्टेबल रतनलाल बुरी तरह जख्मी हो गए थे। गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराए गए जवान ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया था।
अमित शाह ने पत्र में लिखा है कि रतन लाल एक बहादुर एवं कर्तव्यनिष्ठ पुलिसकर्मी थे, जिन्होंने कठिन चुनौतियों का सामना किया और एक सच्चे सिपाही की तरह उन्होंने देश की सेवा में अपने जीवन का सर्वोच्च बलिदान दिया है।
दिल्ली में शांति बहाली को लेकर अमित शाह के नेतृत्व में हाई लेवल मीटिंग हुई। इस दौरान पुलिस-विधायकों के बीच समन्वय, पर्याप्त बल की तैनाती और अफवाहों को नियंत्रित करने पर मुख्य रूप से चर्चा की गई।
केंद्रीय गृह राज्य मंत्री जी किशन रेड्डी ने कहा है कि हिंसा में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने बताया कि दो महीने से ज्यादा समय से धरना चल रहा था। लेकिन, कल जिस तरह हिंसा हुई वह बर्दाश्त नहीं है।
“गृह मंत्री अमित शाह ने दिल्ली चुनाव के कैंपेनिंग के दौरान कहा कि ईवीएम का बटन इतने गुस्से के साथ दबाना कि बटन यहाँ दबे और करंट शाहीन बाग के अंदर लगे। क्या कोई गृह मंत्री ऐसा भाषण दे सकता है? इसलिए मैं कहती हूँ कि अमित शाह भारत के होम मिनिस्टर नहीं हैं, वह देश के हेट मिनिस्टर का काम कर रहे हैं।”
"गृह मंत्री अमित शाह जी से मिला। बहुत ही फलदायी मुलाकात रही। दिल्ली से जुड़े तमाम मुद्दों पर चर्चा हुई। हम दोनों सहमत हुए कि दिल्ली के विकास के लिए मिलकर काम करेंगे।"
राँची में आयोजित विशाल कार्यक्रम में पूर्व सीएम की हुई घर वापसी। बकौल शाह, 2014 में बीजेपी अध्यक्ष बनने के बाद भी उन्होंने मरांडी को पार्टी में लाने का प्रयास किया था।