विषय: अर्बन नक्सल

जेएनयू, प्रदर्शन, हिंसा, मीडिया बदसलूकी

‘चल निकल दलाल… तेरी माँ की…’- रिपब्लिक भारत का रिपोर्टर देखते ही प्रदर्शनकारी ने दिखाई अपनी हकीकत

सोशल मीडिया पर वामपंथी गिरोह के लोगों द्वारा रिपब्लिक टीवी को केंद्र सरकार का गुणगान करने वाले चैनल के रूप में प्रदर्शित किया जाता है। ऐसे में इस चैनल के रिपोर्टर को देखकर जेएनयू प्रदर्शनकारी के द्वारा माँ की गाली देना वामपंथियों के विरोध से ज्यादा मोदी व हिंदू घृणा दर्शाती है।
JNU, वामपंथी, नक्सल

500 नक्सली JNU में घुस आए थे, जान बचा कर जंगलों से भागा: BPSC अफसर की आपबीती

"...लेकिन 5 मिनट के अंदर ही ऐसा लगा कि हॉस्टल के शीशे टूट रहे हैं, मैं लॉबी में गया, देखा नकाबपोश लोग हाथों में लोहे का रॉड तथा डंडे लिए पेरियार हॉस्टल के हरेक कमरे में घुसते चले जा रहे हैं, और डंडों से बेतरतीब प्रहार करके दरवाजे और खिड़कियों को तोड़ रहे हैं।"
अखिल गोगोई, मेधा पाटेकर

जिसे कॉन्ग्रेसी CM ने भी माना था माओवादी, उस अखिल गोगोई के मेधा पाटेकर से क़रीबी संबंध

आज भाजपा का विरोध कर रहा अखिल कभी कॉन्ग्रेस को वोट न देने की अपील करता था। असम और अरुणाचल प्रदेश में बाँध प्रोजेक्ट्स को बंद कराने के लिए अखिल गोगोई ने लोगों को जम कर भड़काया था। उसके कारण नेशनल हाइड्रोइलेक्ट्रिक पॉवर कारपोरेशन (NHPC) के कई डैम प्रोजेक्ट्स में रुकावट आई थी।
स्वामी विवेकानंद, JNU

JNU माओवंशियों ने विवेकानंद की प्रतिमा को किया बदरंग, लोगों ने कहा – ‘ये ह%#मी, Pak से भी खतरनाक’

JNU वालों ने एक बार फिर साबित किया कि उन्हें अर्बन नक्सली, माओवादी, गद्दार, देश के दुश्मन, एंटी-नेशनल जैसे खिताबों से क्यों नवाज़ा जाता है। अपने ही शिक्षकों का अपहरण, दिल्ली की सड़कों को जाम करने के बाद अब उन्होंने अपने परिसर में लगी स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा को अपना निशाना बनाया है।
कविता कृष्णन

राम मंदिर पर फ़ैसले के बाद वामपंथी गैंग में सिर-फुटव्वल, चल रहा फॉलो-अनफॉलो का खेल

कविता कृष्णन ने आरोपों की झड़ी लगा दी। उन्होंने लिखा कि ध्रुव राठी कभी अपनी आलोचना को स्वीकार नहीं करता है। बकौल कविता कृष्णन, स्वस्थ आलोचना को नज़रअंदाज़ करने वाला ध्रुव कभी इस बात को नहीं समझता कि उसे काफ़ी कुछ सीखने की ज़रूरत है।
सुधा भारद्वाज, वर्नोन गोंजाल्विस और अरुण फरेरा

अर्बन नक्सल: सुधा भारद्वाज, वर्नोन गोंजाल्विस और अरुण फरेरा को बेल नहीं, भीमा-कोरेगाँव हिंसा की रची थी साजिश

पुलिस के अनुसार तीनों कथित एक्टिविस्ट्स 4 ऐसे संगठनों से जुड़े थे, जो प्रतिबंधित माओवादी संगठन के मुखौटे के रूप में काम करते हैं। वर्नोन और फरेरा नक्सली संगठन में भर्ती के लिए के लिए भी लोगों को उकसा रहे थे।
समलैंगिकता, जम्मू कश्मीर, वामपंथी

समलैंगिक कार्यकर्ताओं ने J&K पर ‘प्रवचन’ दे रहे वामपंथियों को किया बेइज्जत, कविता कृष्णन ने बताया संघी

'गे फॉर जेके' के कार्यकर्ताओं ने कविता कृष्णन सहित अन्य वामपंथियों को आइना दिखाते हुए उन्हें बताया कि भारत का संविधान उन्हें मान्यता देता है कि जम्मू कश्मीर के संविधान में उनके लिए कोई जगह नहीं थी।
गौतम नवलखा, रंजन गोगोई

अर्बन नक्सल गौतम नवलखा की याचिका पर सुनवाई से अलग हुए CJI गोगोई, कहा- कोई अन्य बेंच सुने

महाराष्ट्र सरकार ने अनुरोध किया था कि इस सम्बन्ध में किसी भी प्रकार का आदेश पारित करने से पहले उसकी बात सुनी जानी चाहिए। हाईकोर्ट ने गौतम नवलखा के ख़िलाफ़ दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने से इनकार करते हुए इसे गंभीर मामला करार दिया था।
Howdy Modi, Urban Naxals

रोहिंग्या से नेहरू तक, Howdy Modi पर लोगों ने अर्बन नक्सलियों के कुतर्कों को एक-एक कर काटा

अनैतिक मार्केटिंग के तीन “सी” (Convince, Confuse और Corrupt) का इस्तेमाल करने की पुरजोर कोशिश की गई और किसी तरह से Howdy Modi से कुछ अच्छा न निकल जाए, ये प्रयास हुआ। थोड़ी सी फजीहत पर जो मान जाए वो लिबटार्ड कैसा? इसलिए इतनी बेइज्जती पर उनका मन नहीं भरा।
भीमा कोरेगाँव हिंसा

भीमा कोरेगाँव हिंसा: DU प्रोफेसर के घर पुणे पुलिस ने मारा छापा, नक्सलियों से सम्बन्ध की आशंका

हनी बाबू डीयू के प्रोफ़ेसर हैं और 'द कमिटी ऑफ सिविल राइट्स एक्टिविस्ट्स' के सदस्य हैं। इस कमिटी का गठन जीएन साईबाबा द्वारा किया गया था। डीयू प्रोफ़ेसर साईबाबा को 2017 में महाराष्ट्र की एक अदालत द्वारा आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई गई थी।
सुरेंद्र गाडलिंग, सुधीर धावले

जाँच आयोग के सामने पलटे अर्बन नक्सल, रिटायर जज बोले- वापस जेल में डाल दो

सुधीर धावले ने एक आवेदन दाखिल कर आयोग के समक्ष बयान देने का आग्रह किया था। धावले एल्गार परिषद के आयोजकों में से एक था। एल्गार परिषद ने माओवादियों के समर्थन से भीमा कोरेगाँव युद्ध की बरसी पर हिंसा भड़काई थी।
वॉर एंड पीस

क्या कोर्ट ने लियो टॉलस्टॉय की ‘वॉर एंड पीस’ पुस्तक को लेकर आपत्ति जताई? जानिए सच

क्या कोर्ट ने लियो टॉलस्टॉय की क्लासिक कृति 'वॉर एंड पीस' को लेकर आपत्ति जताई और अर्बन नक्सल के घर में यही पुस्तक मिली? सोशल मीडिया के ठेकेदार कह रहे हैं कि मोदी भी तो ये पुस्तक पढ़ते हैं। जानिए इस प्रोपगंडा के पीछे की सच्चाई।

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