सवाल उनसे है जो गाय, गोबर और गौमूत्र का नाम सुनते ही मजाक बनाने लगते हैं- जब यही व्यवस्था किसान का खर्च घटाकर उसकी आय बढ़ा रही है और तो उपहास किस बात का है?
हमें समझने की जरूरत है कि तथाकथित किसान संगठन कैसे अक्सर कृषि सुधारों के रास्ते और किसानों के विकास में बाधा बनते हैं। यही स्थिति तीनों कृषि कानूनों के समय भी देखी गई।
उर्वरकों की उपलब्धता, आपूर्ति व्यवस्था, कालाबाजारी पर नियंत्रण और किसानों तक समय पर खाद पहुँचाने में योगी आदित्यनाथ सरकार की कार्यशैली उल्लेखनीय रही है।