विषय: हिन्दू-मुस्लिम विवाद

प्रतीकात्मक चित्र (India Today से साभार)

ट्रेन में हुई आपसी लड़ाई को अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के छात्र ने दिया साम्प्रदायिक रंग

जीआरपी के इंस्पेक्टर ने मीडिया से बात करते हुए दावा किया है कि मामला मज़हबी हिंसा का नहीं, आपसी विवाद का है। घायलों और कुछ सहयात्रियों के बीच ट्रेन से उतरने को लेकर विवाद हुआ, जिसके बाद वह हिंसा में बदल गया।
हिन्दू लड़की, अपहरण

आबिद, दानिश, कैश ने 15 साल की हिन्दू लड़की को किया अगवा, पथराव और आगजनी से बढ़ा तनाव

मामला सामने आने के बाद ग्रामीणों का एक समूह मुख्य आरोपी आबिद के परिवार से बातचीत करने गया, जहाँ दोनों समुदाय के बीच बवाल मच गया। इसके बाद घरों को जला दिया गया। देर शाम एक गली में लगभग 15 दुकानों को भीड़ ने आग लगा दी।
मुहर्रम जुलूस, नरकटियागंज

मुहर्रम के जुलूस में गूँजा ‘पाकिस्तान ज़िंदाबाद’ और ‘हिंदुस्तान मुर्दाबाद’, मचाया उपद्रव

आर्यसमाज चौक पर हमेशा की तरह कुछ लोग समूह बना कर बातचीत कर रहे थे। जैसे ही मुस्लिमों ने उन्हें देखा, वे 'हिंदुस्तान मुर्दाबाद' का नारा लगाने लगे। मुहर्रम के जुलूस में शामिल लोगों ने 'पाकिस्तान जिंदाबाद' के नारे भी लगाए।
बेगूसराय

प्राइवेट ट्यूटर मोहम्मद मुर्तुजा ने किया 6 वर्षीय दलित बच्ची का बलात्कार, FIR दर्ज, आरोपित फरार

पीड़िता के चाचा ने बताया कि मुर्तुजा इससे पहले भी कई छात्रों का यौन शोषण कर चुका है लेकिन अपनी इज्जत के कारण पीड़ित परिवारों ने मामले को दबा दिया।
नॉनवेज बिरयानी, धोखा

13 गाँव के 10000 लोग (हिंदू+मुसलमान) आमंत्रित, प्रसाद के नाम पर धोखे से खिला दी भैंसे की बिरयानी

पीर की मजार पर उर्स के आयोजन में हिस्सा लेने आए हिंदुओं को धोखे से मांसाहारी बिरयानी खिलाई गई - वो भी प्रसाद के नाम पर। न तो प्रसाद बाँटने वाले ने, न ही प्रसाद बनवाने वाले ने यह घोषणा कि बिरयानी में भैंसे का मांस मिला हुआ है। जब उन लोगों को खाने के दौरान मांस और हड्डियाँ मिलीं तो...
कश्मीर

हम मुसलमानों ने 2 कश्मीरियों को मार डाला: 370 पर कॉन्ग्रेसी मुस्लिम नेता ने दिखाया आईना

"पूरे देश में कश्मीरी मुस्लिम सुरक्षित हैं, लेकिन कश्मीर में 370 खत्म होने के बाद से दो बेग़ुनाह मुस्लिमों को जान से मारा जा चुका है। किसने मारा हिन्दुओं ने? नहीं। एक को मुस्लिम आतंकियों ने मारा और दूसरे को पत्थरबाज मुसलमानों ने!"
हिंदू-मुस्लिम विवाद

हिंदुओं से पिट गए? उसे गोली क्यों नहीं मारी? आप मुस्लिम समुदाय पर एक धब्बा हैं – हरियाणा के जज फ़ख़रुद्दीन

जज फ़ख़रुद्दीन ने हिंदुओं के बारे में कहा कि उनके पास ऐसी कोई ताक़त नहीं है जिससे वो मुसलमानों के सामने टिक सकें। उन्होंने कहा, "आप एक पिस्तौल के साथ आएँ। मैं यहीं हूँ। हर बात की ज़िम्मेदारी मैं लूँगा।"
NRC, ओवैसी को फ़टकार

सेक्युलरिज़्म के कुली मुसलमान नहीं, हिन्दू हैं ओवैसी जी, यही हमारी ताकत है और यही अभिशाप

आज भी केवल 15-20% होने के बाद भी मुसलमान शांति से रात को सो पाते हैं तो इसलिए क्योंकि जानते हैं कि 79% हिन्दू आबादी के बावजूद कोई हिन्दू साम्प्रदायिक होकर कोई पागलपन करने, हिंसा करने दौड़ पड़ा तो उसे रोकने आज के 'डर का माहौल' में भी पहले हिन्दू ही खड़े होंगे। हिन्दुओं का दुर्भाग्य यह है कि हम अपनी प्रकृति से ही सेक्युलरिज़्म के कुली हैं।
कृष्ण जन्माष्टमी

जन्माष्टमी की झाँकी पर पथराव, फरसा व अन्य हथियारों का इस्तेमाल भी: UP के बरेली में तनाव, देखें Video

जहाँ पत्थरबाजी की गई, वो मुस्लिम बहुल गाँव है। कृष्ण जन्माष्टमी पर परंपरा स्वरूप कृष्ण की झाँकी निकाले जाने की तैयारी थी, लेकिन जुमे की नमाज़ के चलते झाँकी का समय दोपहर 3 बजे रखा गया। इसके बावजूद 3 बजे जैसे ही झाँकी गाँव के चौराहै पर पहुँची, तो मुस्लिम समुदाय ने...
पत्रकारिता के समुदाय विशेष के लिए दलित दलित तभी है जब अपराधी हिन्दू हो, सवर्ण हो (तस्वीर साभार: स्वराज्य)

दलित की इज्जत लूटने आने वाला मुसलमान नंगा भी हो तो मीडिया गिरोह पीड़िता का ही मुँह दबा देता है

जब संजीव नेवर की शिकायत पर राष्ट्रीय SC आयोग ने हस्तक्षेप किया तो जाँच में निकल कर आया कि पुलिस ने कई सारी गलतियाँ की थीं। SHO को मूल FIR बदलने के लिए निलंबित कर दिया गया, और बदले के इरादे से पीड़ित परिवार पर दाखिल दो FIRs नकली निकलीं, और पीड़ितों को पुलिस सुरक्षा दी गई।
विवेकानंद

विवेकानंद का ‘सर्व-धर्म-समभाव’ इस्लाम के लिए एक मौका था, मुसलमानों को सोचना होगा क्यों गँवा दिया

मुसलमानों को यह सोचने की ज़रूरत है कि विवेकानंद के 'सर्व-धर्म-समभाव' वाले पन्ने पर क्यों विभाजन की खूनी दास्ताँ लिखी, क्यों मुस्लिम-बहुल कश्मीर को हिन्दू-बहुल भारत का साथ मंज़ूर नहीं और क्यों कश्मीरी पंडितों के साथ वो किया, जो उन्हें नहीं करना चाहिए था।
श्रीविल्लीपुतुर जीयार स्वामी (साभार: स्वराज्य)

तमिलनाडु में मठ के स्वामी को समन, कहा था अब मूर्तियों पर इस्लामी हमले नहीं होते

इस अनोखे मंदिर में लोगों की अपार श्रद्धा है। यही वजह है कि भगवान अति वरदार भले ही 40 वर्ष तक जल समाधि में रहते हों, लेकिन पूरे साल इस मंदिर में भक्तों की भीड़ जुटती है। इससे पहले वर्ष 1979 में भगवान अति वरदान ने मंदिर के पवित्र तालाब से बाहर आकर भक्तों को दर्शन दिए थे।

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