Tuesday, July 16, 2024
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नूँह दंगों में AAP नेता जावेद को बचाने में जुटी पार्टी: CCTV के बहाने पुलिस FIR पर सवाल, स्थानीय कह रहे – ‘सोहना में दंगा मतलब जावेद का नाम एक नंबर पर’

एक स्थानीय व्यक्ति ने बताया कि अगर आम आदमी पर हत्या का आरोप होता तो उन्हें न सिर्फ उठा लिया जाता, बल्कि टॉर्चर भी किया जाता। उन्होंने बताया कि उस दिन कोई आम आदमी दंगों की सुन कर आता ही नहीं, फिर भी जावेद अहमद आया।

हरियाणा के मेवात के नूँह में हुए दंगों में एक नाम जो सामना आया है, वो है AAP नेता जावेद अहमद का। आपको याद होगा कि दिल्ली दंगों के मुख्य अभियुक्तों में भी AAP का ही तत्कालीन पार्षद रहा ताहिर हुसैन शामिल था। उसने अपने घर को हिन्दुओं पर हमले के लिए लॉन्चपैड बना दिया था और सशस्त्र दंगाइयों की भीड़ का नेतृत्व किया था। उस समय भी AAP शुरू में उसके बचाव में थी। ठीक उसी तरह, अब पार्टी अपने नेता जावेद अहमद को बचाने में लग गई है। इसके लिए FIR तक को झुठला रही है।

जावेद अहमद हरियाणा में ‘आम आदमी पार्टी’ का स्टेट कोऑर्डिनेटर है। 31 जुलाई, 2023 को सोहना में ‘बजरंग दल’ के कार्यकर्ता प्रदीप कुमार की हत्या के मामले में उसके खिलाफ FIR दर्ज की गई है। हालाँकि, जावेद अहमद का दावा है कि वो घटना के वक्त वहाँ से 100 किलोमीटर दूर था, इसीलिए इस वारदात में उसकी संलिप्तता का सवाल ही नहीं उठता है। अगर आप याद करेंगे तो पाएँगे कि एक वीडियो बना कर ताहिर हुसैन ने भी दावा किया था कि वो खुद पीड़ित है और बार-बार पुलिस को कॉल कर रहा था।

कई विश्लेषकों ने उसके इस वीडियो को फर्जी और एडिट किया हुआ भी बताया था। अब आते हैं वापस नूँह दंगे पर, जिसमें नल्हड स्थित प्राचीन शिव मंदिर को चारों तरफ से निशाना बना कर गोलीबारी की गई। ये हमला ‘ब्रिजमंडल जलाभिषेक यात्रा’ के दौरान किया गया था। स्थिति ये हुई कि भीड़ अस्पताल तक में घुस गई और मरीजों को मारा-पीटा। हरियाणा के गृह मंत्री अनिल विज ने भी इसे सुनियोजित साजिश के तहत हुआ हमला माना। आखिर भीड़ के पास इतने अत्याधुनिक हथियार आए कहाँ से, ये अभी तक चर्चा का विषय है।

जावेद अहमद को लेकर ऑपइंडिया का स्टिंग, जानिए स्थानीय लोगों ने क्या बताया

ऑपइंडिया की टीम नूँह में ग्राउंड पर पहुँची थी, जहाँ उसने ये स्टिंग किया। इस स्टिंग में स्थानीय लोगों ने बताया कि जावेद का यहाँ बहुत दहशत है। इस दौरान एक व्यक्ति ने बताया कि जावेद की उम्र 50 के आसपास है, लेकिन वो खुद को मेंटेन (फिट) रखता है। उन्होंने बताया कि जावेद युवाओं को जिम कराने से लेकर उनका पूरा सर्कल बना रखा है। उन्होंने बताया कि भाजपा से पहले कॉन्ग्रेस की सरकार थी, उस दौरान ‘सोनिया गाँधी के किसी करीबी अहमद’ से उसकी अच्छी-खासी जान-पहचान थी।

इस दौरान इन लोगों ने बताया कि पूरे सोहना में जावेद के खिलाफ कोई नहीं बोलेगा, क्योंकि उसका खौफ है। उन्होंने ये भी बताया कि निकिता तोमर हत्याकांड में भी इसका कुछ न कुछ हाथ था, इसका भतीजा इसमें शामिल था। बता दें कि बता दें कि फरीदाबाद के बल्लभगढ़ में कॉलेज के सामने निकिता तोमर की तौसीफ और रहमान की हत्या कर दी थी। स्थानीय लोगों ने कुछ साल पहले एक अन्य दंगे में भी जावेद का हाथ होने की बात कही और कहा कि अरावली की पहाड़ियों पर से पत्थर चलता था।

उन्होंने बताया कि कई डम्फर चलते थे। लोगों ने बताया कि कॉन्ग्रेस पार्टी से रिश्ते के कारण जावेद अहमद बचता रहा है। उन्होंने ये भी बताया कि नूँह से कॉन्ग्रेस का विधायक चौधरी आफताब अहमद, जावेद अहमद का चाचा है। उन्होंने बताया कि चाचा-भतीजे की कॉन्ग्रेस आलाकमान से सीधी बातचीत थी। उन्होंने बताया कि 2009-10 में तहसील को विकसित करने के लिए एक मास्टर प्लान आया था। उन्होंने इलाके में अवैध खनन की बात भी स्वीकारी। नूँह में ही जुलाई 2022 में अवैध खनन की जाँच करने गए डीएसपी सुरेंद्र सिंह की हत्या कर दी गई थी।

उन्हें ट्रक से कुचल कर मार डाला गया था। उन्होंने ये भी इंगित किया कि अवैध खनन के मामले में भी जावेद अहमद का हाथ है, लेकिन फिर भी वो नहीं पकड़ा जाता। उन्होंने बताया कि जो भी अपराधी चोरी-चकारी वगैरह में पकड़ा जाता है, उन सबको जावेद छुड़वाता है। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि किसी को फँसाना हो तो जावेद अहमद सुंदर लड़कियों को भी प्रशिक्षित कर के भेजता है और फिर केस करवा देता है। उन्होंने बताया कि सोहना में हमेशा से बाहर का ही विधायक बनता रहा है।

उन्होंने बताया कि गुज्जर यहाँ से चुनाव लड़ते हैं, लेकिन उन्हें वोट नहीं पड़ते। इस दौरान उन्होंने एक गुज्जर नेता रोहतास की बात करते हुए कहा कि रिठोस गाँव में वो रहते हैं और 350 करोड़ रुपए की उनकी संपत्ति है, वो जीत सकते हैं लेकिन वो खड़े नहीं होते। उन्होंने ये स्वीकार किया कि इलाके में हिन्दुओं में एकता नहीं है। एक व्यक्ति ने बताया कि जावेद उस समय पुन्हाना में होने की बात कह रहा है, लेकिन मुंबई हाइवे से कहा कि 20-25 मिनट में उस टोल तक पहुँचा जा सकता है, जिस टोल का वीडियो सामने आया है।

एक स्थानीय व्यक्ति ने बताया कि अगर आम आदमी पर हत्या का आरोप होता तो उन्हें न सिर्फ उठा लिया जाता, बल्कि टॉर्चर भी किया जाता। उन्होंने बताया कि उस दिन कोई आम आदमी दंगों की सुन कर आता ही नहीं, फिर भी जावेद अहमद आया। उन्होंने बताया कि इलाके के लोग खुल कर नहीं कह रहे, लेकिन इसका (जावेद अहमद का) कहीं न कहीं इस दंगे में हाथ है। उन्होंने कहा कि AAP ऐसे लोगों को ही टिकट देती है, जावेद अहमद भी 2024 के विधानसभा चुनाव में ‘आम आदमी पार्टी’ से खड़ा होगा और जीतेगा।

जावेद इससे पहले दूसरे-तीसरे नंबर पर आता रहा है, ऐसे में बिखरे वोटों को इकट्ठा करने के लिए ये साजिश रची गई – ये भी स्थानीय व्यक्ति ने बताया। साथ ही कहा कि डर के कारण कुछ हिन्दू भी जावेद अहमद की पैरवी कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि AAP के कुछ नेता सोहना आए थे, दिल्ली से। इस दौरान उन्होंने सोहना के ‘चाइल्ड पॉइंट’ में एक गुज्जर समुदाय के लड़के की हत्या का मामला बताया, जो 8-10 साल पहले का है। उन्होंने बड़ा खुलासा किया कि जेल से निकल कर आने के बाद जावेद को कंधे पर उठा कर लाया गया था और उसका स्वागत किया गया था।

लोगों का सवाल है कि इतनी जल्दी छतों पर पत्थर कैसे आ गए, हथियार कैसे जुटा लिए गए? उन्होंने बताया कि ये सामान्य हथियार नहीं थे, 100-200 मीटर की रेंज में लड़कों को गोली लगी है। उन्होंने बताया कि जिधर दंगे हुए, उस तरफ जाने से पहले सोचना पड़ेगा, कहीं कुछ गड़बड़ न हो जाए – इसका डर रहेगा। उन्होंने इसे एक बहुत बड़ी घटना बताते हुए कहा कि जान-माल के साथ कारोबार का भी नुकसान हुआ है। उन्होंने इसे एक सोची-समझी साजिश करार देते हुए कहा कि बाहर के लोगों को भी इन्हीं लोगों ने बुलाया।

उन्होंने बताया कि किसी भी टोल तक 35-40 मिनट में पहुँचा जा सकता है, ऐसे में ये दावा सही नहीं है कि ये वहाँ से दूर था। साथ ही कहा कि सोहना में हुए दंगों में अधिकतर जावेद अहमद के लड़के थे, जो इसकी मर्जी के बिना पत्थर चलाना तो दूर, ये सड़क भी पार न करें। उन्होंने कहा कि इससे पहले भी जो हिंसा वगैरह हुई है, उसमें जावेद अहमद का हाथ था। साथ ही इलाके में 5-7000 रोहिंग्या मुस्लिमों के होने की बात भी कही गई।

स्थानीय लोगों ने बताया कि मम्मन खान, आफताब अहमद और जावेद अहमद का एक गिरोह है, जिसने ये दिखाने के लिए ये सब किया कि अभी भी हमारा दबदबा है और आपलोग खुल कर नहीं जी सकते। ये बात भी सामने आई है कि ‘जावेद कॉलोनी’ इसने खुद के नाम पर बसाई थी। स्थानीय लोगों ने ये भी बताया कि जंगल की जमीनों पर भी अवैध बस्तियाँ बसाई जा रही हैं। साथ ही उनका ये भी दावा है कि इन कॉलनियों में अधिकतर अपराधी किस्म के युवक ही रहते हैं।

सोहने में दंगा मतलब जावेद का नाम एक नंबर पर

इस दौरान ऑटो में यात्रा कर रहे कुछ लोगों से भी ऑपइंडिया की टीम ने बातचीत की। उन्होंने बताया कि दंगा मतलब जावेद का नाम एक नंबर पर। उन्होंने बताया कि जावेद का नाम इन दंगों में पक्का आ रहा है, सोहना में जब भी कोई हिंसा होती है तो जावेद का हाथ होता ही होता है। उन्होंने बताया कि जावेद का नाम भले ही राजनीति के कारण छिपाया जा रहा हो, लेकिन सोहना में कोई भी दंगा होता है तो जावेद का नाम एक नंबर पर आता ही आता है।

स्थानीय व्यक्ति ने ये भी बताया कि बाईपास के उधर उसने ‘जावेद कॉलोनी’ बसा रखी है, जहाँ मकान और कोठियाँ हैं, जहाँ सारी साजिश रची जाती है। उसने बताया कि 2-3 साल पहले एक लड़के की हत्या हुई थी और सड़कों पर पत्थर बिछा दिए गए थे। उसने कहा कि जावेद अहमद उस समय कहीं और जाने की बात कह रहा है। उसने जावेद के खतरनाक व्यक्ति होने की भी पुष्टि की। उसने कहा कि यहाँ दंगा होगा तो वही करवाएगा – ये निश्चित है। उक्त व्यक्ति लखवा गाँव का है।

AAP नेता जावेद अहमद का दावा – हत्याकांड के समय वो घटनास्थल से दूर था

जावेद अहमद ने ‘बजरंग दल’ के कार्यकर्ता प्रदीप कुमार हत्याकांड में संलिप्तता से इनकार करते हुए दावा किया कि वो उस समय घटनास्थल से 100 किलोमीटर की दूरी पर था। निरंकारी चौक थाने में उसके खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया गया है। कुछ CCTV फुटेज दिखा कर दावा किया कि वो टोल प्लाजा से गुजरा था। उसने कहा कि उसके गुजरने के 3 घंटे बाद ये घटना हुई और वो अगले दिन लौटा। उसने कहा कि उसे और पार्टी को बदनाम करने के लिए ये राजनीतिक प्रोपेगंडा चलाया जा रहा है।

AAP नेता जावेद अहमद के बचाव में पार्टी ने अपने कई नेता उतार दिए। AAP के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट अनुराग ढांडा ने जावेद अहमद पर दर्ज FIR पर सफाई देते हुए उल्टा बीजेपी पर ही पलटवार किया। उन्होंने कहा, “बीजेपी को हरियाणा के लोग सिरे से खारिज करने लगे हैं। इसलिए बीजेपी अब षड्यंत्र रचना चाहती है और समाज को बाँटने का काम कर रही है। आज पूरा देश जानता है कि कौन दंगे भड़काता है और उसके बाद झूठी FIR कर दूसरे पार्टी के नेताओं को फँसाने का काम करते हैं।”

प्रदीप कुमार की हत्या में जावेद अहमद का हाथ: FIR

शिकायतकर्ता पवन कुमार ने एफआईआर में कहा है कि 31 जुलाई की रात लगभग 10.30 बजे प्रदीप कुमार और बजरंग दल के अन्य कार्यकर्ताओं के साथ वह स्विफ्ट डिजायर कार से घर लौट रहे थे। इसी दौरान इस्लामवादियों की भीड़ ने उनकी कार पर जानलेवा हमला कर दिया। उनकी कार के पीछे बजरंग दल के अन्य कार्यकर्ताओं की दो कारें और एक पुलिस वैन साथ चल रही थी। उन्होंने आगे कहा कि जब उनकी कार सोहना रोड पर पहुँची तो पुलिस ने बजरंग दल के सदस्यों को खुद ही आगे बढ़ने के लिए कहा।

पुलिस ने उन्हें आश्वासन दिया कि सोहना क्षेत्र में तैनात पुलिस अधिकारियों ने सभी आवश्यक सुरक्षा जाँच कर ली है और रास्ता साफ है। पवन कुमार ने आगे कहा कि कुछ ही सेकंड में लगभग 150 इस्लामवादियों की भीड़ वहाँ आ गई और उनकी कार पर पथराव शुरू कर दिया। इसके कारण कार पर से उनका नियंत्रण हट गया और कार डिवाइडर से टकरा गई। जब कार रुकी तो उन्हें कार से बाहर निकलने के लिए मजबूर होना पड़ा। भीड़ का नेतृत्व कर रहा जावेद अहमद चिल्लाया, “उन सभी को मार डालो, जो होगा मैं संभाल लूँगा।”

पवन कुमार ने एफआईआर में कहा, “जावेद अहमद की शह पर लोहे की रॉड, पत्थर, बंदूकों और अन्य हथियारों से लैस 20-25 इस्लामवादी हमारी ओर बढ़े और हमें पीटना शुरू कर दिया। इस दौरान एक व्यक्ति ने प्रदीप के सिर पर रॉड मार दी और वह नीचे गिर गए। वहाँ पर गोलियाँ चलने लगी। तभी पुलिस की गाड़ी वहाँ आ गई।” शिकायतकर्ता ने एफआईआर में आगे कहा कि पुलिस ने उन्हें भीड़ से बचाया और अस्पताल लेकर जाने लगी तो उन्होंने देखा कि देखा कि इस्लामवादी प्रदीप कुमार को लगातार लोहे की छड़ों और लाठियों से पीट रहे थे।

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राहुल पाण्डेय
राहुल पाण्डेयhttp://www.opindia.com
धर्म और राष्ट्र की रक्षा को जीवन की प्राथमिकता मानते हुए पत्रकारिता के पथ पर अग्रसर एक प्रशिक्षु। सैनिक व किसान परिवार से संबंधित।

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