विषय: Article 35-A

जम्मू कश्मीर, अनुच्छेद 370

‘आर्टिकल 370 पर इंडिया के फ़ैसले का स्वागत’ – यूरोपियन पैनल से PM मोदी ने कहा – आतंक पर Zero Tolerance

पीएम मोदी ने यूरोपियन पैनल को "आतंकवाद के प्रति कोई रहम नहीं, कोई समझौता नहीं" के भारतीय पक्ष से अवगत कराया। 28 सदस्यीय अंतरराष्ट्रीय पैनल को जम्मू-कश्मीर का दौरा करवा कर यह दिखाया जाएगा कि वहाँ सब कुछ ठीक है और पाकिस्तान प्रोपेगेंडा करके भ्रम फैला रहा है।
आतंकवादी संगठन कर सकते हैं कश्मीर में बड़ा हमला

कश्मीर में हमला कर सकता है इस्लामिक आतंकी संगठन: ख़ुफ़िया एजेंसी की रिपोर्ट

जम्मू-कश्मीर के हालत को लेकर ख़ुफ़िया रिपोर्ट की मानें तो कश्मीर में इस्लामिक आतंकवादी संगठन हमला कर सकता है। यही वजह है कि कश्मीर पर भारत सरकार और सेना दोनों कड़ी नज़र रखे हुए हैं।

कश्मीर में तीन आतंकी ढेर, श्रीनगर में कानून व्यस्था के लिए चुनौती हयात अहमद भट गिरफ्तार

सुरक्षाबलों की ओर शुरू किये गए घेराबंदी एवं तलाशी अभियान के वक़्त मुठभेड़ हो गई जिसमें सुरक्षाबलों ने तीन आतंकवादियों को मार गिराया है। वहीं शांति और स्थिरता की स्थिति बनाए रखने के लिए जम्मू कश्मीर पुलिस ने श्रीनगर के डाउनटाउन इलाके के प्रमुख दंगाई हयात अहमद भट को भी गिरफ्तार कर लिया है।
शाहनवाज़ हुसैन

इस्लाम के ख़िलाफ़ था अनुच्छेद 35A, इसे हिन्दू बनाम मुस्लिम का मुद्दा न बनाएँ : शाहनवाज़ हुसैन

भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता ने कहा कि पूरे देश में एनआरसी लागू करने से किसी को क्या समस्या हो सकती है। दुनिया का कोई भी देश अवैध रूप से अपनी सीमाओं घुसने वाले लोगों को बर्दाश्त नहीं करता। भारत में भी अवैध लोगों को रहने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
प्रोपेगेंडा ऊँचा रहे हमारा

काश! कश्मीर में दंगे हो जाते, घरों में आग लगाई जाती, सैकड़ों लोग मारे जाते! कितना मजा आता…

प्रपंच फैलाया जा रहा है कि अस्पतालों में लोग मर रहे हैं, जीवनरक्षक दवाइयाँ नहीं हैं। आप सोचिए कि आखिर यही चार-पाँच मीडिया वाले, इसी एक तरह की रिपोर्टिंग क्यों कर रहे हैं? आखिर दो लोगों के बयान के आधार पर पूरी सेना को बर्बर कहने की रिपोर्टिंग का लक्ष्य क्या है? अमेरिकी अखबार को भारत के एक हिस्से के अस्पतालों पर झूठ लिखने की क्यों जरूरत पड़ती है?

रवीश जी, इतने दुबले क्यों हो रहे हैं कश्मीर को लेकर?

किताबें तो मैंने भी बहुत पढ़ी हैं, और पेज नंबर मुझे भी याद हैं, लेकिन मैं अभी तक इतना धूर्त नहीं बन पाया कि उस ज्ञान का इस्तेमाल अपनी फर्जी विचारधारा और मालिकों के प्रोपेगेंडा की रोटी सेंकने में कर सकूँ। वो तरीके रवीश को ही मुबारक हों।

370 का ‘पावर’ खत्म होने पर लिबरलों और मीडिया गिरोह की आँखों में आए आँसू, ट्विटर पर छलका दर्द

राज्यसभा में गृहमंत्री अमित शाह द्वारा कश्मीर में लागू अनुच्छेद-370 और 35 A को खत्म करने के प्रस्ताव को पेश करते ही विपक्षी पार्टियों और लिबरल गैंग को झटके लगने शुरू हो गए हैं। बरखा दत्त ने ट्वीट किया, “एक डेस्क में दो विधानसभा, दो प्रधान, दो निशान नहीं हो सकते।”
लाल चौक

भारतीय कानून लागू नहीं, लेकिन यूपी से भी ज्यादा पैसा पाता है 1% आबादी वाला जम्मू-कश्मीर

केन्द्र सरकार राज्यों को दो तरीके से वित्तीय मदद प्रदान करती है। पहला, अनुदान के जरिए और दूसरा, कर्ज देकर। जम्मू-कश्मीर को केन्द्र से जो पैसा मिलता है उसमें 90 फीसदी अनुदान होता है। अन्य राज्यों को केन्द्र से मिलने वाले पैसे में करीब 70 फीसदी कर्ज होता है।
35A/370

35A उन्मूलन: 370 हटाने का वह ‘द्वार’, जिस पर ‘कश्मीरियत’ के जिहादी नेता दे रहे पहरा

हिन्दुस्तान की संसद की तरफ से 370 का हटाया जाना जिहादी मानसिकता वाले 'अलगाववादी' स्वीकार नहीं करेंगे। इसे रोकने के लिए 35A के पक्ष में 'कश्मीरियत' के तीनों गुट हार्डकोर जिहादी (लश्कर, जमाते-इस्लामी), 'सॉफ़्ट' जिहादी (हुर्रियत, आसिया अंद्राबी) और जिहादियों के हिमायती नेता...
पीडीपी नेता महबूबा मुफ़्ती

’35A के साथ छेड़छाड़ बारूद को हाथ लगाने के बराबर, सारा जिस्म जल कर राख हो जाएगा’

"हमारे पास जो कुछ भी है, उसे बचाने के लिए हमें कश्मीरियों की जरूरत है, हमारा अपना संविधान है, हमारे पास एक ऐसा दर्जा है जो बाहर के लोगों को यहाँ संपत्ति खरीदने की अनुमति नहीं देता है। आज घाटी में जो हालात हैं, वे डरावने हैं, जम्मू कश्मीर बैंक खत्म हो चुका है और धीरे-धीरे वे सब कुछ खत्म करने की कोशिश कर रहे हैं।"
प्रतीकात्मक चित्र

‘370 और 35-A पर मतदान करा लो, गद्दारों की पहचान हो जाएगी’

"संसद का सत्र चल रहा है। सरकार को यह जानने के लिए मतदान कराना चाहिए कि संविधान के अनुच्छेद 370 और अनुच्छेद 35-A को कौन-कौन रद्द कराना चाहते हैं। इससे राष्ट्र को राष्ट्रवादियों और गद्दारों के बारे में जानकारी मिलेगी।"

मनमोहन सिंह जो अपने समुदाय के लिए नहीं कर सके वह नरेंद्र मोदी ने करने का वादा किया है

विस्थापितों की अधिकांश जनसंख्या को शेख अब्दुल्ला ने रोक लिया और उन्हें यह भरोसा दिलाया कि उन्हें राज्य में सब कुछ दिया जाएगा। सब कुछ देने के नाम पर पश्चिमी पाकिस्तान से आए शरणार्थियों को 1954 में अनुच्छेद 35-A का संवैधानिक छल उपहार स्वरूप दिया गया।

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