Thursday, May 6, 2021

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Ayodhya Dispute

छोटे भाई को घर से खींचा… सिर उड़ा दी… बड़े भाई के गले को पार कर गई गोली: राम मंदिर के लिए बलिदान की...

शरद और रामकुमार राम मंदिर आंदोलन की कहानी बन गए थे। उन्होंने मुलायम के दावे "परिंदा भी पर नहीं मार सकता" की हवा निकाल दी। लेकिन 2 नवंबर को...

#RebuildBabri: सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए मुस्लिमों को बरगलाने की कोशिश, पोस्टर के जरिए बाबरी ढाँचे के पुनर्निर्माण का आह्वान

अदालत ने बुधवार को बाबरी विध्वंस मामले में सभी 32 आरोपितों को बरी कर दिया। वहीं इस फैसले से बौखलाए मुस्लिमों ने सोशल मीडिया पर लोगों से बाबरी ढाँचे के पुनर्निर्माण का आह्वान किया है।

27 साल बाद बाबरी विध्वंस केस में 30 सितंबर को आएगा कोर्ट का फैसला: आडवाणी, जोशी, कल्याण सहित 49 हैं आरोपित

बाबरी विध्वंस मामले में 27 साल से सुनवाई कर रही सीबीआई की एक विशेष अदालत अब 30 सितंबर को अपना फैसला सुनाएगी।

बाबरी विध्वंस केस: SC ने CBI कोर्ट को दिया 30 सितंबर तक फैसला सुनाने का समय, आडवाणी सहित कई बड़े नेता आरोपित

सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई कर रहे स्पेशल जज एस. के. यादव की रिपोर्ट देखने के बाद ट्रायल को पूरा करने की समय सीमा को और एक महीना बढ़ाकर 30 सितंबर तक कर दिया है।

हमें पाँच एकड़ अलॉट कीजिए, हम बनाएँगे अस्पताल: शिया वक्फ बोर्ड

"शिया वक्फ बोर्ड ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के फैसले से बिलकुल इत्तेफाक नहीं रखता, न ही वह एआईएमपीएलबी का हिस्सा है। रिज़वी ने यह भी कहा कि देश के मुसलमानों ने सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का स्वागत किया है।"

अयोध्या में राम मंदिर: पुनर्विचार याचिका दाखिल नहीं करेगा सुन्नी वक्फ बोर्ड, 6-1 से लिया फैसला

मस्जिद के लिए जमीन कबूल करने को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। बोर्ड के एक सदस्य ने कहा है कि इस संबंध में अभी फैसला नहीं हुआ है। वहीं, कुछ रिपोर्टों में कहा गया है कि इस्लामिक यूनिवर्सिटी बनाने के लिए जमीन ली जाएगी।

वामपंथियों का खोखलापन, लिब्रहान रिपोर्ट की इन बातों पर साध लेते हैं चुप्पी

लिब्रहान आयोग की रिपोर्ट में माना गया है कि भगवान राम का जन्म अयोध्या में ही हुआ था। इस रिपोर्ट में हिन्दू धर्म ग्रन्थ रामायण के आधार पर कमीशन ने राम और अयोध्या दोनों के अस्तित्व को स्वीकार किया है। ऐसे में इन वामपंथी इतिहासकारों से पूछा जाना चाहिए कि...

अयोध्या पर फैसला सुनाने वाले 5 जज उस समय पैदा भी नहीं हुए थे, जब दायर हुआ था पहली बार मुकदमा

साल 1950 में 16 जनवरी को फैजाबाद जिले के स्थानीय कोर्ट में पहली बार इस संबंध में मुकदमा दर्ज हुआ था। राम मंदिर पर फैसला सुनाने वाले सीजेआई रंजन गोगोई इन पाँचों न्यायधीशों में उम्र के लिहाज से सबसे बड़े हैं, जिनकी जन्मतिथि 18 नवंबर 1954 है।

‘5 एकड़ जमीन मिली तो बनवाएँगे स्कूल या अस्पताल’ – 14 कोस में जगह माँगने वाले इकबाल अंसारी

"अगर सरकार हमें जमीन देती है तो हम वहाँ पर स्कूल या फिर अस्पताल बनवाएँगे। कोर्ट के फैसले के बाद दोनों समुदाय के बीच पैदा हुई नफरत खत्म हो गई हैं। इसलिए अब वे नहीं चाहते कि हिंदुस्तान में माहौल में बिगड़े। मोदी और योगी सरकार में अमन शांति है..."

अयोध्या अधिनियम 1993 की वो धारा, जिसके तहत बनेगा राम मंदिर के लिए ट्रस्ट

इस मामले में अयोध्या अधिनियम की वैधता को डॉक्टर एम इस्माइल फारुकी और अन्य बनाम भारत संघ व अन्य 1994 SCC (6) 360 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा बरकरार रखा गया था। अगर उस समय ऐसा नहीं होता तो अधिनियम की धारा 4(3) को रद्द कर दिया जाता और जो सुनवाई अयोध्या पर हुई, वो कभी संभव ही नहीं होती।

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