Monday, July 22, 2024
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‘हम सनातन के अंग, श्रीराम की आने की खुशी में लगाएँगे लंगर’: जिन निहंग सिखों ने पहली बार बाबरी में किया हवन, उनके वंशजों ने की घोषणा

अयोध्या में राम मंदिर से जुड़े इतिहास के पन्नों में 30 नवंबर 1858 का दिन बेहद खास है। इसी दिन बाबा फकीर सिंह खालसा की अगुवाई में 25 सिख निहंगों ने बाबरी ढाँचे पर कब्जा कर लिया था। अब उन्हीं बाबा फकीर सिंह खालसा के वंशज अयोध्या में दो माह तक लंगर लगाएँगे। उन्होंने साफ कहा है कि सिख सनातन हैं।

अयोध्या में सिख समाज दो माह तक लंगर लगाएगा। इसकी अगुवाई बाबा हरजीत सिंह रसूलपुर करेंगे। बाबा रसूलपुर बाबा फकीर सिंह खालसा की आठवीं पीढ़ी के हैं। बाबा फकीर सिंह खालसा की अगुवाई में निहंग सिखों ने सबसे पहले अयोध्या में बाबरी ढाँचे पर कब्जा किया था। बाबा ने कहा कि सिख समाज भी सनातन का हिस्सा है और उनके पूर्वजों ने इसकी रक्षा के लिए कुर्बानी दी है।

इस दौरान बाबा हरजीत सिंह ने खालिस्तानियों और हिंदू-सिख के बीच दरार पैदा करने वालों को भी करारा जवाब दिया। उन्होंने कहा, “हम पूरी दुनिया को बताना चाहते हैं कि सिख और सनातन एक हैं। जो हमारा देश है, वह अलग नहीं है। जो हमें तोड़ने की बातें कर रहे हैं, उन्हें इसके माध्यम से एक अच्छा मैसेज देना चाह रहे हैं।” उन्होंने आगे, “इस राम मंदिर को मुस्लिमों से जिन्होंने सबसे पहले कब्जा लिया था, वे हमारे पूर्वज थे।”

“हम भी सनातन का हिस्सा”

अयोध्या में लंगर लगाने का निर्णय लेने वाले निहंग सिखों की अगुवाई करने वाले बाबा रसूलपुर ने कहा कि वह अयोध्या में लंगर लगाकर भगवान राम के प्रति अपने पूर्वजों की भक्ति को आगे बढ़ाएँगे। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बाबा ने कहा, “अब जब 22 जनवरी को भगवान राम की प्राण प्रतिष्ठा की जा रही है तो मैं कैसे पीछे रह सकता हूँ।” उन्होंने कहा कि वह निहंगों के साथ 22 जनवरी को अयोध्या में लंगर चलाएँगे।

मीडिया से बातचीत की शुरुआत बाबा हरजीत सिंह ने ‘वाहे गुरु जी की खालसा, वाहे गुरु जी की फतेह’ और ‘जय श्रीराम’ के साथ की। उन्होंने कहा, “मैं समाज को गुरु तेग बहादुर सिंह की कुर्बानी को याद दिलाना चाहता हूँ। उन्होंने आज के दिन सनातन को बचाने के लिए बलिदान दिया था। उन्होंने चाँदनी चौक पर सनातन को बचाने के लिए शहादत दी।”

बाबा ने आगे कहा, “मैं पूरी दुनिया को बताना चाहता हूँ कि हम भी सनातन का हिस्सा हैं। यही हमारा धर्म है। हम ही वो हैं, जिन्होंने सनातन को बचाया। अयोध्या में श्री रामलला जी 22 जनवरी को पधार रहे हैं। हम सिख और हिंदू भाई इस खुशी को मिलकर मनाएँगे।”

बाबा रसूलपुर ने कहा, “हमारे बुजुर्ग थे जत्थेदार बाबा फकीर सिंह जी खालसा निहंग सिंह रसूलपुर। मैं उनकी विरासत में आठवीं पीढ़ी से हूँ। हम इसकी खुशी में अयोध्या में लंगर लगाने जा रहे हैं। मैं सबको यही बताने की कोशिश कर रहा हूँ कि हम सब साथ हैं।”

बाबा हरजीत सिंह ने कहा, “मेरा किसी भी राजनीतिक दल से कोई संबंध नहीं है और मैं केवल सनातन परंपराओं का वाहक हूँ। निहंगों और सनातन धर्म के बीच सद्भाव बनाए रखने के दौरान मुझे आलोचना का सामना करना पड़ा, क्योंकि एक तरफ मैं अमृतधारी सिख हूँ लेकिन दूसरी तरफ मैं अपने गले में रुद्राक्ष की माला पहनता हूँ”।

30 नवंबर 1858 को निहंगों ने किया था बाबरी पर कब्जा

अयोध्या में राम मंदिर से जुड़े इतिहास के पन्नों में 30 नवंबर 1858 का दिन बेहद खास है। इसी दिन बाबा फकीर सिंह खालसा की अगुवाई में 25 सिख निहंगों ने बाबरी ढाँचे पर कब्जा कर लिया था। उन्होंने कई दिनों तक बाबरी पर कब्जा बनाए रखा था और राम नाम का पाठ किया था। उन्होंने बाबरी ढाँचे पर राम नाम भी लिख दिया।

बाबरी पर गैर-मुस्लिमों के कब्जे का पहला प्रमाण यही है। इसको लेकर अवध के थानेदार शीतल दुबे ने बाबरी के अधिकारी की शिकायत पर 25 निहंग सिखों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। बाबा हरजीत सिंह रसूलपुर ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले में अवध के थानेदार की रिपोर्ट का हवाला दिया गया है।

राम जन्मभूमि पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले की कॉपी के पेज नंबर 164 पर इस एफआईआर का जिक्र है। इसमें कहा गया है कि दो दर्जन निहंग सिखों ने बाबा फकीर सिंह खालसा के नेतृत्व में 30 नवंबर 1858 को बाबरी ढाँचे पर कब्जा कर लिया था और हवन यज्ञ करने के साथ ही दीवारों पर राम नाम लिखा था।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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