35 साल पहले भी कश्मीर ने ऐसा ही नरसंहार देखा था। फर्क बस इतना है आज कश्मीर घूमने गए हिंदुओं को निशाना बनाया गया है और उस समय स्थानीय हिंदुओं को चुन-चुनकर मारा गया था।
भाजपा नेता ने बताया कि कैसे मुर्शिदाबाद हिंसा में पीड़ितों को निशाना बनाकर उनकी जमापूँजी खाक की गई थी, उन्होंने वो जले हुए नोट भी दिखाए और जानकारी दी कि दो परिवारों को उन्हें सहायता दे दी है।
मृत शरीर के भी कुछ अधिकार होते हैं, सम्मानजनक अंतिम संस्कार के। दुर्भाग्य से, भारत देश में ये आतंकियों को तो सहज उपलब्ध है लेकिन बेचारे हिन्दुओं को नहीं।
मुर्शिदाबाद हिंसा में हिंदुओं के घरों के बाहर काली स्याही से निशान बनाए गए थे। मुस्लिम भीड़ जब हिंसा करने पहुँची तो काली स्याही वाले घरों पर ही धावा बोला, आग लगाई और बम फेंका
फिरोज अब राहुल बन गया है जबकि इमरान का नाम अब ईश्वर है। आदिल को आदित्य नाम दिया गया है जबकि मुस्तफा को मारुति नंदन के नाम से अब लोग जानेंगे। इनलोगों ने जीवन की नई शुरुआत की है।