Tuesday, May 18, 2021

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पुलवामा के वीर

‘पुलवामा बलिदानी मेरे पति की प्रतिमा और शहीद पार्क नहीं बनने दे रहे कॉन्ग्रेस MLA’ – पत्नी मधुबाला का गंभीर आरोप

"MLA भरत सिंह ने ओम बिड़ला के खिलाफ मुझे चुनाव लड़ने को कहा, तब मैंने चुनाव लड़ने से मना कर दिया था। इस बात से वो नाराज हो गए थे और..."

पुलवामा हमले की पहली बरसी: वीरगति की 11 कहानियाँ, कोई जन्मदिन मनाकर लौटा था तो किसी की थी सालगिरह

14 फरवरी 2019 को हुए फिदायीन हमले की पहली बरसी पर हम आपके लिए लाए हैं वीरगति प्राप्त जवानों की झकझोर देने वाली कहानियॉं। उस दिन पुलवामा में हुए फिदायीन हमले में 40 जवान वीरगति को प्राप्त हो गए थे।

भारत के वीर: पुलवामा हमले के बाद वीरगति को प्राप्त जवानों के परिवार वालों के लिए 12 गुना ज्यादा दान

14 फरवरी को हुए पुलवामा अटैक के बाद पूरे देश में जवानों के लिए डोनेशन में काफी वृद्धि दर्ज की गई है। इस साल 18 जून तक ₹242.15 करोड़ की सहायता राशि मिल चुकी है। वीरों के लिए दिए जाने वाले डोनेशन में 12 गुना से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई।

मेरठ के वीर अजय: ढाई साल का पुत्र, 8 महीने गर्भवती पत्नी और एक बिलखती माँ

मेरठ के जानी ब्लॉक के बसा टीकरी गाँव के रहने वाले अजय की उम्र 27 साल थी। 7 अप्रैल 2011 में अजय सेना की 20 ग्रेनेडियर में भर्ती हुए।

पुलवामा के वीर: जन्मदिन मनाकर लौटे ही थे नसीर अहमद, किसे पता था यह आख़िरी होगा

14 फरवरी को इस आत्मघाती हमले का शिकार हुए नसीर एक दिन पहले ही यानि 13 फरवरी को अपना 46 वाँ जन्मदिन मनाकर ड्यूटी पर वापस लौटे थे।

पुलवामा के वीर: 20 साल देश सेवा के बाद भी था संजय का जज़्बा बरक़रार, ख़ुद बढ़वाई थी नौकरी के 5 साल

संजय के दो बच्चे हैं, जिनकी उम्र 13 और 10 साल है। उनके परिवार में चार भाई और एक बहन हैं। जिसमें से एक भाई को पहले ही परिवार एक्सिडेंट में खो चुका है।

पुलवामा के वीर: नितिन राठौर की पत्नी ने कहा ‘बेटे को करूँगी सेना को समर्पित’

नितिन की मौत की ख़बर सुनने के बाद गाँव के लोगों ने अपने घरों में खाना नहीं बनाया। लोगों में एक तरफ जहाँ गुस्सा था वहीं सरकार को पाकिस्तान के ख़िलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई करने की माँगें भी शामिल थी।

पुलवामा के वीर: कुलविंदर की अंतिम यात्रा में पहुँचीं मंगेतर, नवंबर में तय थी शादी

कुलविंदर की मंगनी गांव लोदीपुर वासी अमनदीप कौर से लगभग ढाई साल पहले हुई थी। आठ नवंबर को शादी होनी तय थी। कुलविंदर के पार्थिव शरीर को देख अमनदीप कौर कई बार बेहोश हुई।

पुलवामा के वीर: छिन गया सबसे छोटा बेटा, मज़दूर पिता ने कहा ‘ख़ून का बदला ख़ून’

अश्वनी कुमार घर के एकमात्र कमाऊ पूत थे। उनके पिता ने मज़दूरी कर बेटों को पढ़ाया- लिखाया। कॉलेज के समय से ही एनसीसी में रहे अश्वनी काफ़ी पहले से ही सीआरपीएफ में भर्ती होना चाहते थे। इसी वर्ष उनकी शादी भी तय होने वाली थी।

पुलवामा के वीर: बेटी की शादी के लिए लड़का देखने जाने वाले थे संजय, पत्नी को नहीं मिला चेक

शहीद संजय के दोस्तों के अनुसार, वह सिर्फ़ एक अच्छे जवान ही नहीं बल्कि एक अच्छे विचार वाले व्यक्ति भी थे। जब भी गाँव आते तो दोस्तों से ज़रूर मिलते थे। जिस वक़्त संजय के शहीद होने की सूचना मिली, उनकी माँ घर पर नहीं थी। सूचना मिलते ही जब वो घर पहुँची तो माहौल मातम में बदल गया।

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