Friday, May 7, 2021

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Shekhar Gupta

जहाँ ‘खबर’ वहीं द प्रिंट वाले गुप्ता जी के ‘युवा रिपोर्टर’! बस अपना पोर्टल पढ़ना और सवाल पूछना भूल जाते हैं

कोरोना का ठीकरा मोदी सरकार पर फोड़ने पर अमादा शेखर गुप्ता के 'द प्रिंट' ने नया कारनामा किया है। प्रोपेगेंडा के लिए उसने खुद को ही झूठा साबित कर दिया है।

सुबह का ‘प्रोपेगेंडाबाज’ शाम को ‘पलटी मारे’ तो उसे शेखर गुप्ता कहते हैं: कोरोना वैक्सीन में ‘दाल-भात मूसलचंद’ का क्या काम

स्वदेशी वैक्सीन पर दिन-रात अफवाह फैलाने वाले आज पूछ रहे हैं कि सब को वैक्सीन पहले क्यों नहीं दिया? क्या कोरोना वॉरियर्स और बुजुर्गों को प्राथमिकता देना 'भूल' थी?

शेखर गुप्ता के द प्रिंट का नया कारनामा: कोरोना संक्रमण के लिए ठहराया केंद्र को जिम्मेदार, जानें क्या है सच

कोरोना महामारी की शुरुआत में भले ही भारत सरकार ने पूरे देश में एक साथ हर राज्य में लॉकडाउन लगाया, मगर कुछ ही समय में सरकार ने हर राज्य को अपने हिसाब से फैसले लेने का अधिकार भी दे दिया।

‘राहुल गाँधी का ‘फालतू स्टंट’, झोपड़िया में आग… तमाशे की जिंदगानी हमार’ – शेखर गुप्ता ने की आलोचना, पिल पड़े कॉन्ग्रेसी

शेखर गुप्ता ने एक वीडियो में पूर्व कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी की आलोचना की, जिससे भड़के कॉन्ग्रेस नेताओं ने उन्हें जम कर खरी-खोटी सुनाई।

भारत-विरोधी फंडिंग का खुलासा, The Print ने ‘गलती’ से छाप भी दिया… बाद में चुपके से किया डिलीट

शेखर गुप्ता के 'द प्रिंट' ने ग्रेटा वाली टूलकिट के भारतीय मीडिया संस्थानों से लिंक को उजागर करने वाले वीडियो को हटाए जाने के सम्बन्ध में प्रकाशित एक रिपोर्ट को अपनी वेबसाइट से हटा दिया है।

शेखर ‘कूप्ता’ के ‘दी प्रिंट’ ने छापा झूठ, राहुल गाँधी ने आगे बढ़ाया, रूसी राजदूत ने पकड़ा प्रपंच

रूसी राजदूत ने राहुल गाँधी को भारत और रूस के संबंधों के बारे में अफवाह फैलाने पर फटकार लगाते हुए इसे वास्तविकता से एकदम हटकर बताया है।

‘पंजाब सरकार रेलवे ट्रैक खाली कराने में फेल’- शेखर गुप्ता को कोई समस्या नहीं, मोदी ने ट्रेन रद्द करवा दी इससे परेशानी

पत्रकार शेखर गुप्ता ने पंजाब सरकार की निष्क्रियता का बचाव करते हुए अव्यवस्था का आरोप उलटा मोदी सरकार पर लगा दिया है।

पत्रकारों पर हमला और शेखर गुप्ता बॉलीवुड के साथ: कौन सी ‘जर्नलिज्म’ के दायित्वों का निर्वहन कर रहे हैं एडिटर्स गिल्ड के चीफ?

अभिव्यक्ति की आजादी को तहस-नहस करने वाले बाहर निकल कर आ रहे हैं और बॉलीवुड की सराहना कर रहे हैं ताकि अपने प्रतिद्वंदियों की आवाज को दबाव सके।

हुई गवा? करवा ली बेइज्जती? ‘दी प्रिंट’ ने पहले थूका, फिर पकड़े जाने पर चाटा

'द प्रिंट' ने 'लव जिहाद' के बारे में 'एक अभियान चलाने' के लिए भी स्वाति गोयल को निशाना बनाया और कहा कि उन्होंने 'लव' में 'जिहाद' देखा।

एक लेख में 8 बार बु* शब्द का प्रयोग बताता है कि ‘दि प्रिंट’ का दिमाग कहाँ घुसा हुआ है

ऐसे लेखों का औचित्य क्या है? इससे किसका भला हो रहा है? क्या इसका औचित्य भोजपुरी बोलने वालों को नीचा दिखाना नहीं है।

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