Thursday, September 29, 2022
183 कुल लेख

Shiv Mishra

विक्की कौशल-कैटरीना की शादी में खाने का भी पंगा, मैक्सिकन चखा तो पंजाबी स्टॉल पर एंट्री नहीं: एग्रीमेंट-गेस्ट-मेन्यू की ‘रील लिस्ट’

कैटरीना कैफ की फाइनली शादी हो रही। विक्की कौशल से। बिरेंदर को यह खबर लगी तो कल्पना की उड़ान के साथ हाजिर हो गए।

सियासत होय जब ‘हिंसा’ की, उद्योग-धंधा कहाँ से होय: क्या अडानी-ममता मुलाकात से ही बदल जाएगा बंगाल में निवेश का माहौल

एक उद्योगपति और मुख्यमंत्री की मुलाकात आम बात है। पर जब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी हों और उद्योगपति गौतम अडानी तो उसे आम कैसे कहा जा सकता?

यूपीए है ही नहीं… विपक्षी एकता की मृगमरीचिका में खुद को राष्ट्रीय नेता साबित करने में लगीं ममता, लगाएँगी कॉन्ग्रेस को पलीता

अधीर रंजन चौधरी और ममता बनर्जी के बीच वक्तव्यों की यह लड़ाई चाहे जितनी गंभीर हो, कॉन्ग्रेस पार्टी और उसके केंद्रीय नेतृत्व को पता है कि बिना उनके विपक्षी एकता की कल्पना तो संभव है पर एकता संभव नहीं है।

एक तो वामपंथी, फिर भीतर का ‘ग्रेटा थनबर्ग’ भी उछाल मारे… जीसस खैर करें: आंदोलनजीवी से भारत ही नहीं, ऑस्ट्रेलिया भी त्रस्त

पर्यावरण की रक्षा के लिए बात-बात पर किए जा रहे आंदोलन और उसके लिए व्यवहारिक हल के तरीकों में हमेशा अंतर क्यों?

5 दिन से मोबाइल में चिपका है अकरम… क्या इसी ‘स्मार्ट तलब’ से डेटा महँगा: जानिए एयरटेल-VI-जियो ने क्यों बढ़ाए भाव

एक बार फिर रिलायंस जिओ, वोडाफोन आइडिया, भारती एयरटेल ने पिछले एक सप्ताह में अपने प्रीपेड प्लान की दरें औसत रूप से 20% से 25% तक बढ़ा दिए हैं।

बेचारा लोकतंत्र! विपक्ष के मन का हुआ तो मजबूत वर्ना सीधे हत्या: नारे, निलंबन के बीच हंगामेदार रहा वार्म अप सेशन

संसद में परंपरा के अनुरूप आचरण न करने से लोकतंत्र मजबूत होता है और उस आचरण के लिए निलंबन पर लोकतंत्र की हत्या हो जाती है।

त्रिपुरा में ऐसे खिला कमल, मुरझा गया सारा प्रोपेगेंडा: जानिए बीजेपी की नॉर्थ-ईस्ट पॉलिटिक्स के लिए ये नतीजे कितने शुभ

वर्तमान केंद्र सरकार द्वारा उत्तर-पूर्वी राज्यों में विकास प्राथमिकता देने का असर बाकी राज्यों की तरह त्रिपुरा में भी दिखाई दे रहा है।

बढ़ता आरक्षण हो, समान नागरिक संहिता या… कुछ और: संविधान दिवस बनेगा विमर्शों का कारण, पिछले 7 सालों में PM मोदी ने दी है...

विमर्शों का कोई अंतिम या लिखित निष्कर्ष निकले यह आवश्यक नहीं पर विमर्श हो यह आवश्यक है क्योंकि वर्तमान काल भारतीय संवैधानिक लोकतंत्र की यात्रा के मूल्यांकन का काल है।

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