Homeराजनीतिबजट 2019: जब संसद में गूँजा 'हाउ इज़ द जोश?'

बजट 2019: जब संसद में गूँजा ‘हाउ इज़ द जोश?’

कार्यवाहक वित्त मंत्री ने पीयूष गोयल ने कहा कि यह सरकार सैनिक, किसान, महिलाओं, स्वास्थ्य, रोज़गार जैसे विभिन्न मुद्दों के साथ 'नए भारत' के सपने को साकार करने के ले प्रतिबद्ध है।

हाल ही में सर्जिकल स्ट्राइक पर बनी विक्‍की कौशल की फ़िल्‍म ‘उरी: द सर्जिकल स्‍ट्राइक’ बहुत चर्चा में है। कार्यवाहक वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने भी बजट भाषण के बीच में इस फ़िल्म का ज़िक्र कर बजट भाषण के माहौल में और उत्साह झोंक दिया। इसके साथ ही आज के बजट भाषण में ₹5 लाख तक की वार्षिक आय पर टैक्स में छूट देने की जैसे ही घोषणा हुई, संसद ‘मोदी-मोदी’ के नारों से गूँजने लगी।

दरअसल पीयूष गोयल मनोरंजन जगत के लिए लिए बजट में किए गए प्रावधान की जानकारी दे रहे थे। इसके साथ ही उन्होंने फ़िल्‍म की जमकर तारीफ़ की और एनडीए के सांसदों ने How’s the Josh के डायलॉग को दोहराया। पीयूष गोयल ने कहा, “मनोरंजन जगत से कई लोगों को रोज़गार मिलता है और हम सभी फ़िल्‍में देखते ही हैं।”

अपने बजट भाषण के अंत में जैसे ही पीयूष गोयल ने ₹5 लाख के दायरे को टैक्स मुक्त करने की घोषणा की, सांसदों ने उत्साह में ‘मोदी-मोदी’ के नारे लगाना शुरू कर दिया।

यह बजट किसानों और माध्यम वर्ग को समर्पित है। कार्यवाहक वित्त मंत्री ने पीयूष गोयल ने कहा कि यह सरकार सैनिक, किसान, महिलाओं, स्वास्थ्य, रोज़गार जैसे विभिन्न मुद्दों के साथ ‘नए भारत’ के सपने को साकार करने के ले प्रतिबद्ध है।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

‘मेविस्तान’ बनाने का सपना, अलवर-भरतपुर में हिंसा और फिर गाँधी-नेहरू का हस्तक्षेप: जानिए मेवात के उस इतिहास की पूरी कहानी, जिसने बदल दिया इलाके...

मेविस्तान की माँग, 1933 का गोविंदगढ़ संघर्ष, 1947 का अलवर-भरतपुर घटनाक्रम और गाँधी-नेहरू के हस्तक्षेप से जुड़ी मेवात की पूरी कहानी जानिए।

59 करोड़ अकाउंट्स, लाखों करोड़ की कैपिटल और आखिरी व्यक्ति तक पहुँचता बैंकिंग सिस्टम… फिर क्यों जनधन योजना से सुभाष गर्ग को लगी मिर्ची?

सुभाष गर्ग ने जनधन योजना के 59 करोड़ खातों पर सवाल उठाए, जानिए जीरो बैलेंस, इनएक्टिव अकाउंट्स और DBT से जुड़ी पूरी कहानी।
- विज्ञापन -