Homeराजनीति'PM मोदी पर लगे 6 साल का प्रतिबंध': हाईकोर्ट ने ख़ारिज की 'ग़लतफ़हमी भरी'...

‘PM मोदी पर लगे 6 साल का प्रतिबंध’: हाईकोर्ट ने ख़ारिज की ‘ग़लतफ़हमी भरी’ याचिका, कहा – चुनाव आयोग को नहीं दे सकते आदेश

हाई कोर्ट ने कहा कि यह याचिका एकदम गलतफहमी भरी हुई थी क्योंकि याचिकाकर्ता ने पहले ही मान लिया कि चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन हुआ है। कोर्ट ने कहाकि वह चुनाव आयोग को कार्रवाई के लिए आदेश नहीं दे सकता।

दिल्ली हाई कोर्ट ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विरुद्ध लगाई गई एक याचिका को खारिज कर दिया। यह याचिका पीएम मोदी द्वारा दिए गए एक बयान के आधार पर लगाई गई थी और इसमें दावा किया गया था कि पीएम मोदी ने चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन किया है।

दिल्ली हाई कोर्ट की जस्टिस सचिन दत्ता की एकल सदस्यीय बेंच ने इस मामले में की सुनवाई की। हाई कोर्ट ने कहा कि यह याचिका एकदम गलतफहमी भरी हुई थी क्योंकि याचिकाकर्ता ने पहले ही मान लिया कि चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन हुआ है। कोर्ट ने कहाकि वह चुनाव आयोग को कार्रवाई के लिए आदेश नहीं दे सकता। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता पहले ही इस मामले की चुनाव आयोग के पास शिकायत कर चुका है। चुनाव आयोग इस मामले में एक्शन लेने के लिए स्वतंत्र है।

चुनाव आयोग के वकील ने कोर्ट को बताया कि वह याचिकाकर्ता की शिकायत पर नियामानुसार आगे की कार्रवाई करेगा। चुनाव आयोग ने कहा कि यह शिकायत 21 अप्रैल की है और उसके पास रोज ऐसी कई शिकायत आ रही हैं, ऐसे में वह इस पर काम करेगा क्योंकि वह एक संवैधानिक संस्था है।

दरअसल, आनंद जोंधाले नाम के एक वकील ने दिल्ली हाई कोर्ट के सामने एक याचिका लगाई थी कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को चुनाव लड़ने से 6 साल के लिए प्रतिबंधित कर दिया जाए क्योंकि उन्होंने कथित तौर पर धर्म के नाम पर वोट माँगे हैं। याचिकाकर्ता ने इसके लिए पीलीभीत में हुई एक रैली के भाषण का उदाहरण दिया था।

जोंधाले ने अपने याचिका में कहा था कि कोर्ट चुनाव आयोग को पीएम मोदी के विरुद्ध कार्रवाई को लेकर आदेश दे। उनको चुनावों से प्रतिबंधित कर दिया जाए और उन्हें वोट भी ना माँगने दिया जाए। जोंधाले का कहना था कि यह सब कुछ लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत किया जाए।

जोंधाले का यह भी कहना था कि उसने चुनाव आयोग से भी ऐसे ही एक्शन की माँग की थी लेकिन कुछ नहीं हुआ इसलिए वह कोर्ट आया है। हालाँकि, उसे कोर्ट से इस मामले में कोई राहत नहीं मिली और उसकी याचिका खारिज कर दी गई।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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