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गेस्ट हाउस कांड: मायावती ने मुलायम के खिलाफ केस लिया वापस, आजम, शिवपाल… चलता रहेगा मुकदमा

सपा-बसपा का गठबंधन के दौरान ही गेस्ट हाउस कांड से केस वापस लेने की पथकथा लिखी गई थी। जब लोकसभा चुनाव 2019 के मद्देनज़र समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के बीच गठबंधन हुआ था तो अखिलेश ने मायावती से मुलायम सिंह यादव के खिलाफ गेस्ट हाउस कांड में.......

साल 1995 के चर्चिच लखनऊ गेस्ट हाउस कांड मामले में बसपा सुप्रीमो मायावती ने मुलायम सिंह यादव के खिलाफ केस वापस ले लिया है। गेस्ट हाउस कांड के बाद से ही सपा और बसपा एक दूसरे के धुर विरोधी हो गए थे। लेकिन आपसी मतभेदों को भुलाकर पिछले लोकसभा चुनाव में दोनों ही दलों ने गठबंधन किया था और एक साथ चुनाव लड़ा था। इसके बाद आखिरकार मायावती ने मुलायम सिंह के खिलाफ केस वापस ले लिया है। 

जानकारी के मुताबिक मायावती ने केस वापसी के लिए बीते फरवरी में ही शपथ पत्र दिया था। सपा-बसपा का गठबंधन के दौरान ही गेस्ट हाउस कांड से केस वापस लेने की पथकथा लिखी गई थी। बताया जा रहा है कि जब लोकसभा चुनाव 2019 के मद्देनज़र जनवरी में समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के बीच गठबंधन हुआ था तो अखिलेश यादव ने मायावती से मुलायम सिंह यादव के खिलाफ गेस्ट हाउस कांड में मुकदमा वापस लेने का आग्रह किया था।

जिसके बाद फरवरी में केस वापस लेने का शपथ पत्र दे दिया गया, लेकिन इसे गोपनीय रखा गया। मायावती ने इसकी जानकारी दो दिन पहले अपने नेताओं को दी। बसपा के राष्ट्रीय महासचिव सतीश चंद्र मिश्रा ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि उनके पार्टी प्रमुख मायावती ने उच्चतम न्यायालय में मामले को वापस लेने के लिए एक आवेदन दिया था। हालाँकि, सतीश चंद्र ने इस पर अधिक जानकारी नहीं दी। वहीं समाजवादी पार्टी के प्रमुख प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी ने कहा कि फिलहाल उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। इसके बारे में पता करने के बाद ही वो कुछ कहेंगे।

बता दें कि लखनऊ गेस्ट हाउस कांड मामले में मुलायम सिंह यादव, उनके भाई शिवपाल सिंह यादव, बेनी प्रसाद वर्मा और आजम खान सहित कई नेताओं के खिलाफ मायावती की ओर से हजरतगंज थाने में मुकदमा दर्ज करवाया गया था। हालाँकि, मायावती ने सिर्फ मुलायम सिंह यादव पर ही नरमी दिखाई है। मामले में दर्ज अन्य लोगों के खिलाफ केस चलता रहेगा।

उल्लेखनीय है कि बाबरी विध्वंस के बाद 1993 में सपा-बसपा ने गठबंधन कर साथ चुनाव लड़े थे। इसके बाद मुलायम सिंह यादव मुख्यमंत्री बने और गठबंधन सरकार भी बनाई, लेकिन दो साल में ही रिश्तों में खटास आ गई। 2 जून 1995 को मायावती ने गठबंधन तोड़ने को लेकर स्टेट गेस्ट हाउस में बसपा विधायकों की बैठक बुलाई, जहाँ सपा नेताओं ने सैकड़ों समर्थकों के साथ गेस्ट हाउस पर हमला कर दिया। सपा नेताओं के हमले से बचने के लिए मायावती ने खुद को कमरे में बंद कर लिया था। आरोप है कि सपा के नेताओं ने मायावती के साथ बदसलूकी भी की थी।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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