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राहुल गाँधी पर FIR से तिलमिलाई कॉन्ग्रेस, ओडिशा पुलिस को पढ़ा रही थी कानून: IG लाल ने कर दिया शंट, जानिए क्या है मामला

ओडिशा में राहुल गाँधी के खिलाफ FIR होने पर अधिकार क्षेत्र का रोना रोने वाली कॉन्ग्रेस ने कुछ ही महीनों पहले कर्नाटक में FIR दर्ज करके उत्तर प्रदेश में एक राष्ट्रवादी पत्रकार पर कार्रवाई के लिए टीम भेजी थी। यह FIR राहुल गाँधी के खिलाफ किए गए एक ट्वीट के आधार पर दर्ज की गई थी।

राहुल गाँधी के विवादित बयान पर ओडिशा में हुई FIR को लेकर कॉन्ग्रेस ने सवाल उठाए हैं। कॉन्ग्रेस ने दावा किया है कि राहुल गाँधी के खिलाफ ओडिशा में FIR नहीं दर्ज की जा सकती। कॉन्ग्रेस ने दावा किया है कि इसके लिए पहले अनुमति लेना जरूरी है।

वहीं पुलिस ने स्पष्ट कर दिया है कि उनके पास राहुल गाँधी के खिलाफ FIR दर्ज करने और उसकी जाँच का पूरा अधिकार है। राहुल गाँधी के खिलाफ यह FIR ओडिशा के झारसुगुडा में हिन्दू संगठनों ने उनके ‘इंडियन स्टेट से लड़ रहे’ वाले बयान पर दर्ज करवाई है।

ओडिशा कॉन्ग्रेस के नेताओं ने FIR को लेकर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की है। कॉन्ग्रेस नेता सुदर्शन दास ने FIR पर सवाल उठाते हुए कहा है कि क्या राहुल गाँधी का मामला झारसुगुडा के अंतर्गत आता है। उन्होंने पूछा कि क्या पुलिस FIR दर्ज करते समय उच्चाधिकारियों से सलाह ली थी।

कॉन्ग्रेस ने इस मामले में DGP ओडिशा से मिलने की बात कही है। कॉन्ग्रेस नेता सिबानंद रे ने दावा किया है कि पुलिस ने राज्य की भाजपा सरकार को खुश करने के लिए यह मामला दर्ज किया है। कॉन्ग्रेस नेताओं ने कहा है कि CRPC कानून के तहत किसी सरकारी पद पर बैठे व्यक्ति के खिलाफ जाँच के लिए पहले अनुमति जरूरी होती है।

वहीं इस मामले में FIR का आदेश देने वाले IG संबलपुर हिमांशु लाल ने कॉन्ग्रेस नेताओं को कानून समझाया है। IG लाल ने कहा, “आम तौर पर किसी अपराध के खिलाफ FIR वहीं दर्ज होती है जहाँ वह घटित होते हैं, लेकिन बयान अगर किसी दूसरे राज्य में प्रकाशित किया गया या उसे लोगों ने देखा तो वहाँ भी कार्रवाई का अधिकार पुलिस को है।”

IG हिमांशु लाल ने कहा है कि राहुल गाँधी के विवादित बयान से शिकायतकर्ता को ठेस पहुँची है, ऐसे में मामला दर्ज किया गया है। उन्होंने अधिकार क्षेत्र के अलावा सरकारी पद वाले व्यक्ति के खिलाफ FIR दर्ज करने के नियम भी समझाए हैं।

IG हिमांशु लाल ने बताया, “CRPC की धारा 197 के तहत किसी भी लोकसेवक के अपराध की जाँच के लिए कोई भी अनुमति जरूरी नहीं है। अनुमति केवल मुकदमा चलाने के मामले में ली जाती है और वह भी तब जब अपनी ड्यूटी करते समय आरोपित लोकसेवक ने अपराध किया हो, यह इस मामले में लागू नहीं है।”

गौरतलब है कि 7 फरवरी, 2025 को राहुल गाँधी के खिलाफ झारसुगुडा में FIR दर्ज की गई थी। इसको लेकर हिन्दू संगठनों के कार्यकर्ताओं ने शिकायत दी थी, जिसके बाद IG हिमांशु लाल ने इस मामले पर जाँच के बाद FIR के आदेश दिए थे।

ओडिशा में राहुल गाँधी के खिलाफ FIR होने पर अधिकार क्षेत्र का रोना रोने वाली कॉन्ग्रेस ने कुछ ही महीनों पहले कर्नाटक में FIR दर्ज करके उत्तर प्रदेश में एक राष्ट्रवादी पत्रकार पर कार्रवाई के लिए टीम भेजी थी। यह FIR राहुल गाँधी के खिलाफ किए गए एक ट्वीट के आधार पर दर्ज की गई थी।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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