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मोदी सरकार ने तोड़ी आतंकवाद की कमर तो कश्मीरी युवाओं का फितूर भी उतरा, AK-47 वाला ‘टैटू’ मिटाने को क्लीनिकों में उमड़ी भीड़: हाथ, गर्दन, छाती पर गुदवा रखे थे

कश्मीर में युवा अब एके-47 जैसे टैटू अपने शरीर से मिटवा रहे हैं। इसके पीछे मजहबी कारण से लेकर घाटी के माहौल में आए बदलाव तक का असर है।

जम्मू-कश्मीर में अब युवा आतंक से मुँह मोड़ रहे हैं। कुछ वर्ष पहले तक आतंकवादियों को अपना नायक मानने वाले युवा अब इस जाल में नहीं फँस रहे। जो युवा कभी रियाज नाइकू और बुरहान वानी बनने का सपना देखने वाले सेना में जाने को अपनी पहली पसंद मान रहे हैं। इसी कड़ी में जम्मू-कश्मीर के युवा अब अपने टैटू हटवा रहे हैं।

जम्मू-कश्मीर के युवा अब तक अपने हाथ, गर्दन और छाती पर AK-47 और बिच्छू जैसे टैटू बनवा रहे थे। लेकिन टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट बताती है कि अब कश्मीर में युवा यह टैटू हटवाने के लिए भाग रहे हैं।

रिपोर्ट बताती है कि बीते 4 सालों में कई हजार युवा अपने टैटू मिटवा चुके हैं। टैटू विशेषज्ञों का कहना है कि अब लोग कश्मीरी संस्कृति और धर्म के बारे में जागरूक हो रहे हैं। अब जो लोग नए टैटू बनवा रहे हैं, उनकी भी प्राथमिकता में बदलाव आया है।

सबसे ज्यादा मिट रहे AK-47 वाले टैटू

रिपोर्ट के अनुसार, यहाँ के टैटू स्टूडियो में पूरे दिन युवाओं की भीड़ रहती है। वहाँ से कुछ दूरी पर लेजर पेन से टैटू मिटाने वाले विशेषज्ञ बासित बशीर का क्लीनिक भी है। उनके क्लीनिक पर युवाओं की भीड़ हाल के दिनों में बढ़ गई है। बासित ने बताया कि सबसे अधिक AK-47 वाले टैटू हटवाने के लिए युवा आ रहे हैं। ब्वायफ्रेंड और गर्लफ्रेंड के टैटू भी मिटवाए जा रहे हैं।

सालों से हिंसा और आतंक की परछाई में रहे युवाओं के मन-मस्तिष्क पर भी आतंक की छाप आ गई थी। इसी के चलते उनके टैटू भी AK-47, कंकाल की खोपड़ी, बिच्छू, साँप और शेर जैसे टैटू शरीर के अलग अलग हिस्सों में बनवाने लगे। रिपोर्ट में बशीर ने बताया कि अब तक वह लगभग एक लाख लोगों के शरीर से ऐसे टैटू मिटा चुके हैं।

जोश में बनवा लिया था, अब उससे जुड़ाव नहीं

Wion की रिपोर्ट कहती है कि टैटू हटवाने के लिए आने वाले लोग कैमरे पर या आधिकारिक तौर पर बात नहीं करना चाहते। ऐसा इसलिए है क्योंकि कश्मीर में टैटू को एक टैबू के तौर पर देखा जाता है। इसके अलावा कई लोगों का कहना है कि ट्रेंड के दौरान बनवाए गए टैटू से अब लोगो का उतना जुड़ाव नहीं रहा।

इसके अलावा टैटू हटाने के पीछे मजहबी कारण भी है। इस्लाम मजहब में भी स्थायी टैटू की इजाजत नहीं है। टैटू बनवाकर मस्जिद में जाना हराम है। मस्जिद के इमाम भी टैटू के खिलाफ लगातार तक़रीर देते रहते हैं। इसके चलते भी बड़ी संख्या में युवा अपने शरीर के अलग-अलग हिस्सों में बने टैटू हटवाने के लिए पहुँच रहे हैं।

अब कौन से टैटू ट्रेंड में

टैटू बनवाने के शरीर पर कई नुकसान भी हैं, लेकिन अभी भी लोगों में टैटू बनवाने को लेकर क्रेज बना हुआ है। कहा जा रहा है कि कश्मीर में अब मजहबी की बातें ज्यादा हावी हो रही हैं। बड़े पैमाने पर लोग मजहब के प्रति झुकाव महसूस कर रहे हैं। ऐसे में टैटू बनवाने वालो में अल्लाह, 786 और धर्म से जुड़े अन्य प्रतीक गुदवा रहे हैं।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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