उत्तर प्रदेश के कानपुर से ‘I Love Mohammad’ के पोस्टर को लेकर शुरू हुए बवाल के बाद देशभर में प्रदर्शन किए जा रहे हैं। दावा किया जा रहा है कि ‘आई लव मोहम्मद’ के पोस्टर लगाने पर पुलिस ने FIR दर्ज कर ली और इसके विरोध में यूपी के कई जिलों जैसे कौशांबी, पीलीभीत, बरेली, भदोही, लखनऊ, उन्नाव और खुद कानपुर में प्रदर्शन हुए। साथ ही, अन्य राज्यों में भी इसे लेकर हिंसक प्रदर्शन हुए हैं।
रविवार (21 सितंबर 2025) की रात उत्तराखंड के उधम सिंह नगर जिले के काशीपुर में भी इसी मुद्दे पर प्रदर्शन हुआ, जो हिंसक हो गया। पुलिस के मुताबिक प्रदर्शन बिना अनुमति के निकाला गया था। पुलिस ने कहा कि भीड़ ने उनके वाहनों में तोड़फोड़ की और पुलिसकर्मियों पर हमला किया।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, एसएसपी मणिकांत मिश्रा ने बताया कि अब तक 7 लोगों को गिरफ्तार किया गया है और 10 को हिरासत में लिया गया है। घटना के मुख्य साजिशकर्ता नदीम अख्तर से भी पूछताछ जारी है।
पुलिस की बड़ी कार्रवाई के तहत करीब 500 प्रदर्शनकारियों की पहचान की जा रही है। पुलिस वीडियो फुटेज के जरिए चेहरों की पहचान कर रही है और घर-घर जाकर पूछताछ कर रही है। एक पुलिस अफसर की शिकायत के अनुसार, उसे लाउडस्पीकर से भीड़ को समझाने पर पीटा गया, गाली दी गई, वर्दी फाड़ी गई और सरकारी काम में बाधा डाली गई।
पुलिस की गाड़ी, इमरजेंसी रिस्पॉन्स वाहन और थाने की सरकारी गाड़ी को भी नुकसान पहुँचाया गया। अब मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इसे लेकर स्पष्ट कर दिया है कि दंगाई किसी भी सूरत में नहीं छोड़े जाएँगे और नुकसान की वसूली बवालियों से की जाएगी।
प्रशासन की जवाबी कार्रवाई:
प्रशासन ने BNSS की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू कर दी है, जिससे अगले सात दिनों तक इलाके में भीड़ जुटने पर रोक रहेगी। इसके अलावा एक संयुक्त अभियान चलाया गया जिसमें राजस्व विभाग, नगर निगम काशीपुर, विद्युत विभाग, प्रदूषण नियंत्रण विभाग और पुलिस विभाग शामिल थे।
इस अभियान के अंतर्गत 17 अवैध बिजली कनेक्शन काटे गए, 11 FIR दर्ज की गईं, एक जन आधार केंद्र के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की गई और करीब 200 अतिक्रमण हटाए गए। इसके साथ-साथ बिना लाइसेंस व्यापार कर रहे दुकानदारों पर 16,000 रुपए का जुर्माना लगाया गया और राशन कार्डों की जाँच शुरू की गई है और सिफारिश की गई कि जो फर्जी पाए जाएँगे उन्हें रद्द किया जाए।
यह विवाद अब सिर्फ एक पोस्टर तक सीमित नहीं रहा। पुलिस और प्रशासन इसे गंभीर कानून-व्यवस्था की समस्या मान रहे हैं और बड़े स्तर पर कार्रवाई कर रहे हैं। उत्तराखंड में हुई हिंसा के बाद प्रशासन सख्ती से निपट रहा है और पूरे इलाके में छानबीन और कार्रवाई तेज कर दी गई है।

