धर्मस्थल में शव दफनाने का दावा करने वाला सफाईकर्मी कोर्ट में पलटा, कहा- कुछ लोगों के इशारे पर दिया झूठा बयान: 2 दशक तक कई लोगों के रेप-हत्या का किया था दावा

कर्नाटक के धर्मस्थल में सामूहिक दफन मामले का शिकायतकर्ता और गवाह सीएन चिन्नैया ने कोर्ट में अपना बयान पलट दिया। चिन्नैया ने स्वीकार किया कि उसका दावे झूठे थे, जिसमें उसने हत्या, शव और दफनाने जैसी कहानियाँ गढ़ी थीं। उसने कहा कि पिछले बयान उसने कुछ खास व्यक्तियों के इशारे पर दिया था।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, रविवार (28 सितंबर 2025) बेल्थांगडी के अतिरिक्त सिविल न्यायाधीश एवं न्यायिक प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट में सीएन चिन्नैया के BNSS की धारा 183 के तहत बयान रिकॉर्ड किए गए। फिलहाल वह शिवमोग्गा की जेल में बंद है।

मामले की जाँच कर रही SIT ने उसे पहले ही झूठी गवाही देने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया था। उस पर आरोप है कि 11 जुलाई 2025 को कोर्ट में उसने झूठे दावे किए थे। इनमें धर्मस्थल में महिलाओं और बच्चियों के शवों को दफनाए जाने जैसे झूठे दावे थे। उसने 15 जगहों का भी जिक्र किया था, जहाँ SIT ने खुदाई की लेकिन कुछ ठोस हाथ नहीं लगा।

अब इस बयान से चिन्नैया पूरी तरह पलट गया है। उसने कोर्ट में कहा कि कुछ खास लोगों के कहने पर उसने यह झूठे दावे किए थे। हालाँकि, पुलिस ने उन खास लोगों के नाम तकनीकी कारणों से उजागर नहीं किए। यह भी सामने आया कि चिन्नैया ने सबूत के तौर पर जो खोपड़ी पेश की थी, वह पीड़ितों में से ही एक के चाचा विट्ठल गौड़ा ने उसे सौंपी थी।

क्या है पूरा मामला

यह पूरा मामला तब शुरू हुआ जब धर्मस्थल मंदिर के एक पूर्व सफाईकर्मी सीएन चिन्नैया ने आरोप लगाया था कि उसे 1995 से 2014 के बीच महिलाओं और लड़कियों के शवों को दफनाने के लिए मजबूर किया गया था।

सफाईकर्मी ने 3 जून को अपनी शिकायत के साथ कुछ ‘सबूत’ भी दिखाए थे। एक हफ्ते बाद, वह अपनी पहचान छिपाकर और नाकाब के साथ चेहरा ढके कोर्ट में पेश हुआ था। उसने कुछ हड्डियाँ भी दिखाईं और कहा कि ये कब्र से निकाली गई हैं। मामले में एक महिला ने भी शिकायत दर्ज कर बताया था कि उसकी बेटी धर्मस्थल यात्रा के दौरान लापता हो गई थी।

SIT की जाँच

यह पूरा मामला बहुत गंभीर था। इसलिए, कर्नाटक सरकार ने इसकी जाँच के लिए 19 जुलाई 2025 को एक SIT गठित की। शिकायत करने वाले ‘सफाईकर्मी’ ने टीम को 15 जगहों के बारे में बताया, जहाँ शव दफनाने का आरोप था। SIT ने 17 जगहों की खुदाई शुरू कर दी।

खोदे गए 17 स्थानों में से कुछ भी नहीं मिला। यहाँ तक कि उस व्यक्ति ने कोर्ट में जो खोपड़ी दी थी, वह भी एक आदमी की निकली। जाँच से पता चला कि वह खोपड़ी करीब 30 साल पहले मरे हुए एक शख्स की थी। खुदाई के समय एक जगह पर कुछ पहचान पत्र भी मिले, जो एक ऐसे व्यक्ति के थे जिसकी बीमारी से मौत हो चुकी थी।