केरल के सबरीमाला मंदिर में सोने की चोरी के मामले की जाँच अब एसआईटी करेगी। केरल हाईकोर्ट ने विशेष जाँच दल गठित करने का आदेश देते हुए कहा है कि जाँच पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी और कोई भी जानकारी लीक नहीं होनी चाहिए।
यह आदेश मंदिर में द्वारपालकों की मूर्तियों में सोने की परत चढ़ाने में अनियमितता पाए जाने के बाद आया है। न्यायमूर्ति राजा विजयराघवन वी और न्यायमूर्ति केवी जयकुमार की खंडपीठ ने निर्देश दिया कि एसआईटी का नेतृत्व अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक करें, जबकि सहायक निदेशक शशिधरन एस जमीनी स्तर पर जाँच का नेतृत्व करेंगे।
एसआईटी में अलग-अलग पुलिस थानों के निरीक्षक और सहायक उप-निरीक्षक शामिल होंगे, ताकि व्यापक रूप से जाँच की जा सके। कोर्ट ने कहा कि ‘सबसे ज्यादा निष्ठावान अधिकारियों’ की टीम ही इस मामले की प्रभावी जाँच कर सकती है और यह पता लगा सकती है कि इतनी बड़ी मात्रा में सोना कैसे गायब हुआ।
एसआईटी को एक महीने के भीतर अपनी जाँच पूरी करने और जाँच के दौरान मीडिया या जनता से बातचीत करने से परहेज करने को कहा गया है।
केरल उच्च न्यायालय ने कब किया हस्तक्षेप
सबरीमाला के गर्भगृह में द्वारपालकों की सोने की परत वाली मूर्तियों को मरम्मत के लिए चेन्नई की एक निजी आभूषण फर्म को भेजा गया था। इस पर उठे विवाद के बाद उच्च न्यायालय ने इस मामले को स्वतः संज्ञान लिया था।
दरअसल 2023 में कोर्ट ने स्पष्ट रूप से आदेश दिया था कि सबरीमाला के आभूषणों की कोई भी मरम्मत या रखरखाव विशेष आयुक्त को पूर्व सूचना देने के बाद ही किया जाना चाहिए। लेकिन ऐसा नहीं किया गया था।
2019 में, मंदिर का प्रबंधन देखने वाली त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड (टीडीबी) ने 40 साल की वारंटी के साथ मूर्तियों पर स्वर्ण परत चढ़ाने की जिम्मेदारी चेन्नई की फर्म स्मार्ट क्रिएशन्स को दिया था।
इस साल की शुरुआत में जब मूर्तियों को मरम्मत करने की जरूरत पड़ी, तो टीडीबी ने फिर से मूर्तियों को उसी फर्म को भेज दिया। लेकिन इस बार जरूरी अनुमति नहीं लिए गए।
अदालत ने मरम्मत कार्य चेन्नई को आउटसोर्स करने के टीडीबी के फैसले पर सवाल उठाते हुए मरम्मती कार्य को तत्काल प्रभाव से रोकने का आदेश दिया। साथ ही मंदिर की कीमती वस्तुओं और प्रतिमाओं को केरल वापस भेजने का निर्देश दिया।
सोने की परत चढ़ाने में अनियमितताएँ
साल 2019 में सबरीमला मंदिर के गर्भगृह (सन्निधानम) के द्वारपालकों की प्रतिमाओं पर सोने की परत चढ़ाने का काम शुरू हुआ। इसके लिए लगभग 42 किलो सोना मंदिर से लिया गया था। योजना के मुताबिक इन सोने की प्लेटों पर विशेष प्रक्रिया से गोल्ड प्लेटिंग कर उसे दोबारा गर्भगृह में लगाया जाना था।
जब ये प्लेटें वापस आईं और मंदिर में स्थापित की गईं, तब चौंकाने वाला सच सामने आया। 42.8 किलोग्राम सोने की जगह मात्र 38 किलोग्राम सोने का ही रिकॉर्ड फर्म के पास था। बाकि 4.5 किलोग्राम सोने गायब हो गया।
इसके बावजूद, टीडीबी ने 2025 में मूर्तियों की मरम्मती का काम उसी फर्म स्मार्ट क्रिएशन्स को दिया। इसके बाद विवाद बढ़ गया और कोर्ट को हस्तक्षेप करना पड़ा।
सतर्कता रिपोर्ट से पता चला कि द्वारपालक की मूर्तियों का स्वर्ण आवरण अदालत को सूचित किए बिना हटा दिया गया था, जो स्पष्ट निर्देशों का उल्लंघन था। रिपोर्ट में यह भी उजागर हुआ कि टीडीबी का रिकॉर्ड गलत और अविश्वसनीय था।
जांच के दौरान, सतर्कता अधिकारियों ने बोर्ड से जुड़े और बिचोलिए उन्नीकृष्णन पोट्टी की छोटी बहन के आवास की तलाशी ली और कुछ सोने से मढ़े हुए सामान जब्त किए, जिससे हेराफेरी का संदेह और बढ़ गया।
रिपोर्ट में यह भी पाया गया कि टीडीबी के कुछ अधिकारी भी इसमें शामिल थे, क्योंकि उन्होंने मंदिर प्रशासन के नियमों का पालन नहीं किया था।
इस मामले में अदालत के सामने एक ईमेल भी आया। ये ईमेल बिचोलिए पोट्टी ने टीडीबी अध्यक्ष को लिखे थे। इसमें पोट्टी ने पूछा था कि क्या वह मंदिर के काम से बचे हुए सोने का इस्तेमाल एक शादी के लिए कर सकते हैं।
कोर्ट की खंडपीठ ने कहा कि इससे स्पष्ट रूप से संकेत मिलता है कि यह मामला पोट्टी- टीडीबी अधिकारियों के मिलीभगत का नतीजा है।
अदालत ने अब मुख्य सतर्कता अधिकारी को सबरीमाला के स्ट्रांग रूम को खोलने और 2019 में ली गई तस्वीरों से मूर्तियों का मिलान करने की अनुमति दे दी है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि सोने की कमी और हेराफेरी कहाँ-कहाँ की गई है। अदालत ने मंदिर की कीमती वस्तुओं की पूरी सूची की निगरानी के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति केटी शंकरन को भी नियुक्त किया है।

