अंधविश्वासी औरतों को दोस्ती करके फँसाओ, फिर लालच देकर बनाओ ईसाई: रायपुर में ‘लेडी मिशनरियों’ ने बदला धर्मांतरण कराने का तरीका; पादरी कहता है- ‘मरे लोगों को भी कर दूँगा जिंदा’

छत्तीसगढ़ के कई शहरों और गाँवों में मिशनरियों ने धर्मांतरण का तरीका बदल दिया है। अब महिला प्रचारक (लेडी मिशनरी) अपनी असली पहचान छिपाकर काम कर रही हैं। वे बीमारियों, परेशानियों या अंधविश्वास से जूझ रही महिलाओं से पहले दोस्ती करती हैं, उनका भरोसा जीतती हैं, फिर उन्हें ‘चंगाई सभा’ (प्रार्थना सभा) में लेकर आती हैं।

जाँच में क्या आया सामने?

कोरबा और जांजगीर जिलों में की गई जाँच में पता चला कि ‘चंगाई सभा’ के नाम पर बड़े पैमाने पर महिलाओं और बच्चियों को ईसाई धर्म अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। धर्म बदल चुकी महिलाएँ और युवतियाँ अब नन नहीं बनतीं, बल्कि अपने पुराने नाम और पहचान के साथ ही समाज में रहकर गुप्त रूप से धर्म प्रचार करती हैं।

इसके लिए मिशनरियाँ मजदूर और गरीब वर्ग की महिलाओं से नजदीकी बनाती हैं। उनके दुख-दर्द सुनकर ‘प्रार्थना’ के जरिए मुक्ति का रास्ता बताती हैं। इसके बाद उन्हें चर्च ले जाकर आवेदन भरवाया जाता है, जिसमें हर रविवार प्रार्थना करने का वादा किया जाता है और कहा जाता है कि यदि वे हर रविवार चर्च आएँगी तो प्रभु उनकी बीमारी और परेशानी दूर करेंगे।

बीमार या परेशान महिलाएँ राहत की उम्मीद में नियमित रूप से चर्च जाने लगती हैं। यहाँ इलाज एलोपैथिक दवाओं से किया जाता है, लेकिन इसे ‘प्रभु की कृपा’ बताया जाता है। जाँच में पाया गया कि लगभग 90% महिलाएँ धर्म बदल लेती हैं, जबकि करीब 10% महिलाएँ तब लौट जाती हैं जब उन्हें लाभ नहीं मिलता।

बच्चियों पर भी ध्यान:

इसके अलावा 3 साल से लेकर 13-14 साल तक की बच्चियों को पढ़ाई के नाम पर चर्च के छात्रावासों में रखा जा रहा है। उन्हें पढ़ाई के साथ धर्म प्रचार की ट्रेनिंग दी जाती है। हर रविवार वे बाइबल के वचन याद कर चर्च में लोगों को सुनाती हैं।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, कोरबा जिले के कोथारी गाँव के पास्टर बाबूलाल मिरी का कहना है कि वे परमेश्वर की कृपा से हर रोग, जादू-टोना और परेशानी का इलाज करते हैं। उन्होंने यहाँ तक दावा किया कि प्रार्थना से मरे हुए इंसान को भी जिंदा किया जा सकता है। उनके घर के पास ही एक बड़ा चर्च बना है, जिसे उन्होंने भक्तों द्वारा निर्मित बताया।

इसी तरह पहंदा और भोजपुर जैसे इलाकों में भी मकानों या खेतों में चर्च चल रहे हैं, जहाँ हर रविवार बड़ी संख्या में महिलाएँ पहुँचती हैं। वहाँ उन्हें ‘पवित्र जल’ पिलाकर सभी परेशानियों से मुक्ति का वादा किया जाता है।

अब धर्म परिवर्तन करने वालों से नाम या सरनेम बदलने के लिए नहीं कहा जा रहा है, ताकि सरकारी रिकॉर्ड में वे हिंदू ही दिखें और आरक्षण जैसी सुविधाएँ मिलती रहें। यहाँ तक की कई पास्टर भी अब हिंदू नामों से ही प्रचार कार्य कर रहे हैं।

हाल ही में डिप्टी सीएम और गृह मंत्री विजय शर्मा ने इस पर सख्त कदम उठाने और नया कानून लाने की बात कही है। गृह मंत्री विजय शर्मा ने कहा, “अगले विधानसभा सत्र में हम एक ऐसा अधिनियम लाएँगे जो मेरा मानना है कि सभी राज्य स्तरीय कानूनों (धर्मांतरण विरोधी) से एक कदम आगे होगा क्योंकि हमने इन सभी कानूनों का अध्ययन करने के बाद इसका ड्राफ्ट तैयार किया है।”

उन्होंने कहा, “चंगाई सभा जैसे आयोजन, जिनके बारे में हम सभी जानते हैं कि ये लोगों को भ्रमित करने के लिए किए जाते हैं को रोका जाना चाहिए। चंगाई सभा से निपटने के लिए कानून में एक प्रावधान की आवश्यकता है जो इस अधिनियम में किया जाएगा।”