हरियाणा विधानसभा चुनाव में ‘वोट चोरी’ का आरोप लगाते हुए कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग सीसीटीवी फुटेज नष्ट कर रहा है। जबकि नियमों के मुताबिक चुनाव आयोग मतदान केंद्रों के सीसीटीवी फुटेज 45 दिनों तक अपने पास रखता है और उसे केवल सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर ही जारी करता है।
4 नवंबर 2025 को हुए इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में विपक्ष के नेता राहुल गाँधी ने एक बार फिर चुनाव आयोग पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि बीजेपी के साथ आयोग मिला हुआ है और मतदान केंद्रों से सीसीटीवी फुटेज हटाकर ‘सबूत नष्ट करने’ की कोशिश की गई।
Congress Leader Rahul Gandhi Alleges 'Vote-Chori' in Haryana Polls.
— TIMES NOW (@TimesNow) November 5, 2025
A lady appears 223 times in two booths with the same photo. EC has the data about how many times she votes… This is the reason why ECI destroys CCTV footage: @rahulgandhi pic.twitter.com/BShVG9Pr9t
हालाँकि, गाँधी का दावा जनता को भ्रम में डालने वाला है। आधिकारिक रिकॉर्ड और आरटीआई के जवाबों के अनुसार, चुनाव आयोग ने स्पष्ट रूप से कहा है कि मतदान केंद्रों से सीसीटीवी फुटेज 45 दिनों तक सुरक्षित रखी जाती है और इसे केवल सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों पर ही जारी किया जा सकता है। सीसीटीवी फुटेज को सुरक्षित रखने का मुद्दा फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। जयराम रमेश ने भारत संघ के विरुद्ध कोर्ट में रिट याचिका दायर की थी।
इंडिया टुडे को दिए गए आरटीआई के जवाब में, चुनाव आयोग ने 45 दिनों के नियम के बारे में विवरण साझा करने से इनकार कर दिया और कहा कि मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। संबंधित अपीलीय प्राधिकारी ने इस निर्णय को बरकरार रखा और निर्देश दिया कि संबंधित जानकारी सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के बाद ही जारी की जाएगी।
राहुल गाँधी का यह दावा कि चुनाव आयोग ‘वोट चोरी’ को छिपाने के लिए सीसीटीवी फुटेज को हटा या नष्ट कर रहा है, तथ्यात्मक रूप से गलत है। चुनाव आयोग एक तय कानूनी प्रक्रिया का पालन करता है, सीसीटीवी रिकॉर्डिंग को 45 दिनों तक सुरक्षित रखता है और उन्हें केवल कोर्ट के आदेश पर ही जारी करता है। ये किसी राजनीतिक दलों या व्यक्तियों के माँगने पर नहीं दिखा सकता।

