चिकन नेक की सुरक्षा को मजबूत करने में जुटी मोदी सरकार, 3 राज्यों में बनाए आर्मी कैंट: किसी भी दुस्साहस का तुरंत जवाब देगी भारतीय सेना

भारत ने बांग्लादेश सीमा पर 3 नई सैन्य चौकियाँ स्थापित की हैं ताकि ‘चिकन नेक’ कहे जाने वाले ‘सिलीगुड़ी कॉरिडोर’ की सुरक्षा बढ़ाई जा सके। सिलीगुड़ी कॉरिडोर वही संकरा इलाका है जो मुख्यभूमि भारत को उसके उत्तर-पूर्वी राज्यों से जोड़ता है।

रिपोर्ट्स के अनुसार नई चौकियाँ असम के धुबरी जिले के बामुनी, बिहार के किशनगंज और पश्चिम बंगाल के चोपड़ा में बनाई गई हैं। असल में यह कदम भारत की पूर्वी सीमा को मजबूत करने और खतरे की स्थिति में तुरंत प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने के लिए किए जा रहे प्रयासों का हिस्सा है।

पूर्वी सेना कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल आरसी तिवारी ने गुरुवार (6 नवंबर 2025) को असम के धुबरी जिले में लाचित बोर्फुकन सैन्य स्टेशन की नींव रखी। यह असम में बांग्लादेश सीमा के पास बनने वाला पहला बड़ा सैन्य अड्डा होगा। यह स्टेशन बामुनी पार्ट-1 और पार्ट-2 गाँवों में सरकारी भूमि पर बनाया जा रहा है। इसे अवैध कब्जाधारियों से मुक्त कराया गया है।

यह अड्डा तेजपुर स्थित जीओसी-4 कोर के अधिकार क्षेत्र में आएगा। रक्षा जनसंपर्क अधिकारी लेफ्टिनेंट कर्नल एम रावत ने कहा कि इस स्टेशन की स्थापना भारतीय सेना की क्षमता और बुनियादी ढाँचे को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम है।

इस सैन्य अड्डे का प्रस्ताव मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने धुबरी में ईद के दौरान हुई साम्प्रदायिक तनाव की घटनाओं के बाद रखा था।

पूर्वी सेना कमांडर ने असम सरकार और नागरिक प्रशासन को सहयोग देने के लिए धन्यवाद दिया और गजराज कोर के सभी सैनिकों की प्रतिबद्धता और प्रयासों की सराहना की।

जहाँ असम का यह अड्डा पूर्ण सैन्य स्टेशन होगा, वहीं किशनगंज और चोपड़ा में स्थापित अड्डे ‘कम समय सीमा’ के लिए बनाए गए हैं। दोनों ही बांग्लादेश सीमा से सटे सिलीगुड़ी कॉरिडोर में स्थित हैं। उत्तर बंगाल का चोपड़ा रक्षा क्षेत्र बांग्लादेश के रंगपुर डिवीजन के पंचगढ़ जिले के टेटुलिया से एक किलोमीटर से भी कम दूरी पर है। यह सुविधा ब्रह्मास्त्र कोर के अधीन संचालित होगी।

किशनगंज में तीसरे अड्डे की आधारशिला भी हाल ही में लेफ्टिनेंट जनरल तिवारी ने रखी। सोशल मीडिया पोस्टों में पूर्वी कमान ने बताया कि उन्होंने किशनगंज और चोपड़ा सैन्य शिविरों का दौरा कर परिचालन तैयारियों की समीक्षा की।

अधिकारियों का कहना है कि यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब बांग्लादेश की नई सत्ता, अंतरिम मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस के तहत पाकिस्तान और चीन के और करीब जा रही है। यूनुस की पाकिस्तान की सैन्य प्रमुख से हालिया मुलाकात के बाद भारत की सुरक्षा एजेंसियाँ इन घटनाक्रमों पर कड़ी नजर रख रही हैं।

पूर्वी मोर्चे से किसी भी जोखिम का सामना करने के लिए भारत ने ‘चिकन नेक’ क्षेत्र में अपनी रक्षा को तेजी से मजबूत किया है।

यह कॉरिडोर केवल लगभग 22 किलोमीटर चौड़ा है। फिर भी भारतीय सेना की ये सर्वोच्च प्राथमिकता रही है। नई चौकियाँ भारतीय बलों को निगरानी, समन्वय और जमीनी गतिशीलता में सुधार करने में मदद करेंगी। अधिकारियों ने कहा कि दुश्मन की हर चाल चिकन नेक पर नाकाम होगी, क्योंकि ये नए अड्डे भारत की सीमा प्रबंधन को और मजबूती देंगे।

इस क्षेत्र की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार त्रि-शक्ति कोर पहले से ही राफेल लड़ाकू विमान, ब्रह्मोस मिसाइल प्रणाली और एस-400 व आकाश जैसे उन्नत वायु रक्षा तंत्र के साथ यहाँ तैनात है। ये सभी मिलकर पूर्वी कॉरिडोर के चारों ओर एक शक्तिशाली ढाल बनाते हैं।

भारतीय सेना प्रमुख ने भी कहा कि चिकन नेक कोई कमजोर बिंदु नहीं बल्कि वास्तव में भारत की सबसे मजबूत कड़ी है, जहाँ जरूरत पड़ने पर पश्चिम बंगाल, सिक्किम और उत्तर-पूर्व से पूरी सेना को एक साथ लाया जा सकता है।