डीएनए सेंपल के मिलान से ये साबित हो चुका है कि कार विस्फोट करने वाला जिहादी डॉक्टर उमर नबी मारा जा चुका है।
इंडिया टुडे के मुताबिक, जब उनकी टीम ने विश्वविद्यालय का दौरा किया, तो छात्रों और कर्मचारियों के खुलासे ने चौका दिया। छात्रों के मुताबिक, जिहादी डॉक्टर उमर नबी जब छात्रों को पढ़ाता था, तो क्लासरूम में काफी सख्त होता था। इस दौरान तालिबानी स्टाइल में लड़के-लड़कियों को अलग-अलग बैठाता था। दोनों एक साथ बैठने की इजाजत नहीं थी।
एक एमबीबीएस छात्र ने बताया कि उसने डॉक्टर मुजम्मिल को कभी नहीं देखा, लेकिन डॉक्टर उमर उन्हें पढ़ाया करता था। क्लास में अगर कोई लड़का और लड़की एक साथ मेज पर बैठे हैं, तो वह आकर उन्हें अलग कर देता था। छात्र के मुताबिक, उसने कार विस्फोट में इस्तेमाल की गई i20 कार कैंपस में कभी नहीं देखी।
इंडिया टुडे से बातचीत में यूनिवर्सिटी के एक कर्मचारी ने नाम न बताने की शर्त पर बात की। उसने कहा कि उमर काफी कम बोलता था और अलग-थलग रहना पसंद करता था। एक हॉस्टल के कमरे की ओर इशारा करते हुए कहा कि इस कमरे में वह रहता था।
यूनिवर्सिटी के एमबीबीएस के एक छात्र ने बताया कि कार ब्लास्ट की घटना के बाद अस्पताल आने वाले मरीजों की संख्या कम हो गई है। कुछ छात्रों ने पढ़ाई और सुविधाओं को लेकर नाराजगी जताते हुए कहा, “यहाँ टीचिंग कमजोर है, सुविधाएँ अच्छी नहीं है और प्रैक्टिकल वक्त पर नहीं हो पाते हैं।”
महिला जिहादी डॉक्टर शाहीन के बारे में छात्रों ने कहा कि वह हमें पढ़ाती थी, वह बहुत अच्छी टीचर थीं।
यूनिवर्सिटी के बाहर बाँयी और दाई तरफ जाने वाले रास्तों में अलग अलग दो कमरे जिहादी डॉक्टर मुजम्मिल ने ले रखा था। एक कमरे से 360 किलो विस्फोटक बरामद हुए थे, जबकि दूसरे कमरे से 2900 किलो अमोनियम नाइट्रेट बरामद किए गए थे।
कमरे के मकान मालिक के मुताबिक, मुजम्मिल 13 सितंबर को कमरे पर आया था। मैनें उससे कहा था कि अगर अकेले रहोगे तो 1200 किराया, बच्चों के साथ रहोगे तो 1500 किराया लगेंगे। उसने कहा कि उसे कमरा पसंद है, रात 9 बजे आया, सामान रखा और कहा कि दो महीने का किराया ले लो और 2400 रुपए दे दिए। उसके बाद कभी वापस नहीं आया।
मकान मालिक मद्रासी के मुताबिक, पिछले हफ्ते सिविल ड्रेस में दो पुलिसवाले आए और पूछने लगे कि कोई डॉक्टर यहाँ सामान छोड़कर गया है क्या। सुबह कुछ कश्मीरी आए और कमरा खोलकर पूरा सामान लेकर चले गए।

