PM आवास और राष्ट्रपति भवन के पास तक गाड़ी लेकर गया था आतंकी उमर: जाँच एजेंसियों ने 24 घंटे की मूवमेंट को खँगाला, जानिए धमाके से पहले कहाँ-कहाँ घूमा

दिल्ली पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियाँ लगातार इस बात की तह तक जाने की कोशिश कर रही हैं कि सोमवार (10 नवंबर 2025) को लालकिला मेट्रो स्टेशन के पास हुए धमाके से ठीक पहले आतंकी डॉक्टर मोहम्मद उमर नबी के मन में क्या चल रहा था।

जाँच में यह तथ्य साफ उभरकर आया है कि 9 नवंबर की रात 11:30 बजे से लेकर धमाके की घड़ी तक वह बिना रुके दिल्ली और एनसीआर में घूमता रहा। उसकी यह अनवरत मूवमेंट इस बात की ओर संकेत करती है कि वह किसी उपयुक्त स्थान की तलाश में था, जहाँ भीड़, ऐतिहासिक महत्व वाली जगहें या संभवतः वीआईपी क्षेत्र उसके निशाने पर हो सकते थे।

चौंकाने वाली बात यह है कि वह प्रधानमंत्री आवास और कर्तव्य पथ जैसे अत्यंत संवेदनशील इलाकों के आसपास भी देखा गया, जिससे एजेंसियों के संदेह और बढ़ गए हैं।

दिल्ली में उमर की संदिग्ध यात्राएँ

उमर की गतिविधियों का विश्लेषण बताता है कि उसने 9 नवंबर 2025 की रात एमपुर और दिल्ली–मुंबई एक्सप्रेसवे के संगम बिंदु रिवासन टोल के पास से दिल्ली में प्रवेश किया। वहाँ से वह फिरोजपुर झिरका गया, जहाँ से थोड़ी देर बाद ही वापस फरीदाबाद होकर बदरपुर के रास्ते दिल्ली में दाखिल हुआ। उसके बाद की रात में आश्रम चौक उसका मुख्य घूमने का बिंदु बन गया।

सबसे पहले वह आश्रम चौक से डीएनडी होकर मयूर विहार और नोएडा की ओर गया और फिर वापस आश्रम लौट आया। इसके बाद उसने आश्रम चौक से नई दिल्ली की ओर रुख किया और इंडिया गेट, अकबर रोड, तुगलक रोड और आईएनए मार्केट जैसे इलाकों में घूमने के बाद रिंग रोड के रास्ते फिर आश्रम चौक पहुँच गया।

तीसरी बार वह आश्रम से नई दिल्ली की ओर गया और कर्तव्य पथ, राष्ट्रपति भवन, धौला कुंआ, पंजाबी बाग और वजीरपुर होते हुए वापस सेंट्रल दिल्ली लौट आया। अंत में वह कनॉट प्लेस से होते हुए लालकिला के पास पहुँचा और पार्किंग में अपनी कार लेकर रुका। इसके बाद वही कार लेकर वह मेट्रो स्टेशन के पास गया और विस्फोट को अंजाम दिया।

फरार साथी और आतंक का नेटवर्क

स्पेशल सेल के अधिकारियों का कहना है कि उमर के दो अन्य साथी अभी फरार हैं, जो संभवतः दिल्ली–एनसीआर में ही छिपे हुए हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि मॉड्यूल अकेला नहीं था, बल्कि यह एक संगठित और योजनाबद्ध नेटवर्क का हिस्सा था।

अल-फलाह यूनिवर्सिटी और जावेद सिद्दीकी की भूमिका

जाँच का दायरा जैसे-जैसे बढ़ता गया, फरीदाबाद की अल-फलाह यूनिवर्सिटी और उसके चेयरमैन जावेद अहमद सिद्दीकी का नाम उभरकर सामने आया। 61 वर्षीय सिद्दीकी का अतीत विवादों से भरा रहा है। वह चिट फंड से जुड़े मामलों में तीन साल जेल में रह चुका है और उसके खिलाफ 2000 में 7.5 करोड़ रुपए की हेराफेरी सहित कई गंभीर आरोप लगे थे, हालांकि बाद में वह सभी मामलों से बरी हो गया।

सिद्दीकी ने इंदौर से सिविल इंजीनियरिंग में बीटेक किया था और 1992 से 1994 तक जामिया मिलिया इस्लामिया में असिस्टेंट प्रोफेसर रहा था। उसकी दोनों बहनें और बेटे दुबई में रहते हैं  और उसका आर्थिक नेटवर्क वहाँ भी फैला हुआ है। वह अल-फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट का अध्यक्ष है, जिसके अंतर्गत अल-फलाह यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च सेंटर चलता है।

यह यूनिवर्सिटी 1997 में एक इंजीनियरिंग कॉलेज के रूप में शुरू हुई थी और धीरे-धीरे कई संस्थानों और नौ कंपनियों से जुड़ी, जिनमें निवेश, शिक्षा, ऊर्जा, सॉफ्टवेयर और कंसल्टेंसी जैसे सेक्टर शामिल हैं। इन सभी कंपनियों का पता जामिया नगर के अल-फलाह हाउस का ही है, जहाँ से पूरा ट्रस्ट संचालित होता है।

गिरफ्तार आतंकियों, उमर उन नबी, मुजम्मिल गनाई और शाहीन सईद का अल-फलाह यूनिवर्सिटी से सीधा संबंध था, जो इस मॉड्यूल की आतंकी संरचना को और गंभीर बनाता है।

डेड ड्रॉप ईमेल और सुरक्षित कम्युनिकेशन का इस्तेमाल

पुलिस द्वारा दर्ज नई FIR में इस मॉड्यूल के काम करने के तरीके का महत्वपूर्ण खुलासा किया गया है। जाँच में सामने आया है कि आतंकियों ने खुफिया एजेंसियों से बचने के लिए जासूसी नेटवर्क की तरह ‘डेड ड्रॉप ईमेल’ तकनीक का उपयोग किया।

इस तरीके में एक ही ईमेल अकाउंट का इस्तेमाल किया गया जिसमें संदेश टाइप तो किया जाता था, लेकिन भेजा नहीं जाता था, बल्कि ड्राफ्ट में सेव कर दिया जाता था। दूसरा सदस्य उसी अकाउंट में लॉगइन कर ड्राफ्ट पढ़ लेता और बातचीत बिना किसी डिजिटल निशान छोड़े आगे बढ़ जाती।

इसके साथ ही थ्रीमा और टेलीग्राम जैसे ऐप का उपयोग किया गया, जो बिना फोन नंबर या ईमेल के चलते हैं। शक है कि मैप और लोकेशन साझा करने के लिए एक निजी सर्वर भी बनाया गया था।

विस्फोटक और शुरुआती निष्कर्ष

घटनास्थल से मिले नमूनों की जाँच जारी है, लेकिन पुलिस को शुरुआती तौर पर संदेह है कि धमाके में सैन्य-स्तर के उच्च क्षमता वाले विस्फोटक इस्तेमाल किए गए। चूँकि कार स्वयं उमर नबी चला रहा था, यह पूरे मॉड्यूल की प्रशिक्षित और आत्मघाती प्रवृत्ति को दर्शाता है।