दिल्ली में 10 नवंबर 2025 में हुए लाल किला धमाके की जाँच में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए अल-फलाह विश्वविद्यालय के संस्थापक जवाद अहमद सिद्दीकी को मंगलवार ( 19 नवंबर 2025) को गिरफ्तार कर लिया है। यह गिरफ्तारी PMLA (Prevention of Money Laundering Act) के तहत हुई है।
अधिकारियों का कहना है कि यह कदम आतंकवाद की फंडिंग से जुड़े नेटवर्क को तोड़ने के लिए उठाया गया है। कोर्ट ने जवाद को 13 दिन की रिमांड पर भेजा है। वह 1 दिसंबर तक ED की रिमांड में रहेगा।
NIA समेत अन्य सुरक्षा एजेंसियाँ इस ओर पर जाँच कर रही हैं कि क्या मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा पैसा सीधे तौर पर लाल किले पर धमाका करने वाले आतंकियों तक पहुँचा था। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि क्या यह धन अन्य आतंकी गतिविधियों को फंड करने में इस्तेमाल हुआ। इस दिशा में ED ने कई वित्तीय लेन-देन और संदिग्ध खातों की गहन जाँच शुरू कर दी है।
जवाद के इस यूनिवर्सिटी को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। अल फलाह के लिए जवाद ने 250 करोड़ रुपए कैसे जुटाए, छोटा सा कॉलेज चलाने वाला अचानक यूनिवर्सटी की मालिक कैसे बन गया और दिल्ली ब्लास्ट से कनेक्शन सामने आने पर वह फरार क्यों हो गया जैसे कई सवालों के जवाब अब जवाद को देना है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जवाद की गिरफ्तारी से पहले दिल्ली- NCR में लगभग 25 ठिकानों पर सुबह 5:15 बजे से छापे मारे गए। ED ने इस दौरान एल फलाह के ट्रस्टी और इससे जुड़े अन्य जगहों पर छापे में 48 लाख रुपए की नकदी भी जब्त की। इसके बाद जवाद को गिरफ्तार किया गया।
ED ने विश्वविद्यालय के ओखला स्थित कार्यालय में भी छापेमारी की कार्रवाई की। गौरतलब है कि दिल्ली के लाल किला मेट्रो स्टेशन के पास धमाका करने वाला डॉ. उमर अल फलाह विश्वविद्यालय के अस्पताल से जुड़ा हुआ था। इसके साथ ही व्हाइट कॉलर आतंकी मॉड्यूल की जाँच में शक के घेरे में आए कई अन्य लोग भी इसी संस्थान से जुड़े हुए हैं।
अल फलाह यूनिवर्सिटी से जुड़ी कई मुखौटा कंपनियों का भी जाँच में पता चला है,जिनका सिर्फ कागजों पर ही अस्तित्व था। इन कंपनियों का इस्तेमाल फर्जी लेनदेन और हवाला कारोबार में किए जाने का शक है। इसके अलावा अल फलाह ट्रस्ट और उससे जुड़े संस्थानों में भी बड़ी गड़बड़ियाँ सामने आई हैं। ट्रस्ट की 9 शेल कंपनियाँ एक ही पते पर पाई गईं, लेकिन उनमें कोई काम नहीं हो रहा था।

