उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में SC/ST विशेष अदालत ने झूठा रेप और SC/ST एक्ट का मामला दर्ज करवाने वाली रिंकी नामक महिला को साढ़े तीन साल जेल की सजा सुनाई है। अदालत ने माना कि महिला ने अपने पूर्व प्रेमी से बदला लेने के लिए कानून का दुरुपयोग किया है। रिंकी ने अपने पूर्व प्रेमी से बदला लेने के लिए उस पर झूठा रेप और SC/ST एक्ट का मुकदमा दर्ज करवाया था।
अदालत ने कहा कि भारतीय समाज में विवाहेतर संबंध, लिव-इन संबंध और अवैध रिश्तों के मामले बढ़े हैं। ऐसे मामलों के कारण पुलिस और अन्य संस्थाओं के सामने नई चुनौतियाँ पैदा हो रही हैं। कई बार लंबे समय तक संबंध रखने के बाद महिलाएँ पुलिस और अदालत में जाकर रेप का आरोप लगा देती हैं जिससे कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग होता है। अदालत ने माना कि इस मामले में भी SC/ST एक्ट और रेप के आरोप का गलत इस्तेमाल किया गया।
अदालत ने जिला मजिस्ट्रेट को निर्देश देते हुए कहा कि कोई भी मामला सिर्फ आरोप पत्र दाखिल होने से तय नहीं होता। मामला तभी बनता है जब पुलिस जाँच के बाद चार्जशीट अदालत में पेश करे। अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि FIR दर्ज होते ही राहत राशि बाँटने की प्रक्रिया फर्जी मामलों की बढ़ती प्रवृत्ति को बढ़ावा देती है।
3 जून को रिंकी ने मोहनलालगंज थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। उसने कहा था कि उसके गाँव के ही दीपक गुप्ता नामक युवक के साथ 5 साल से प्रेम संबंध था। रिंकी ने आरोप लगाया था कि दीपक ने शादी का झूठा वादा कर उससे शारीरिक संबंध बनाए। उसने यह भी आरोप लगाया कि 30 मई को दीपक के परिवारवालों ने उसे बुलाकर उसके साथ मारपीट की।
जाँच के दौरान महिला ने मेडिकल जाँच करवाने से इनकार कर दिया। इसके बाद पुलिस ने दीपक के खिलाफ अदालत में चार्जशीट दाखिल कर दी। अदालत ने केस की जाँच करते हुए पाया कि जिस दिन घटना का आरोप लगाया गया था उस दिन दीपक ने महिला के साथ कोई शारीरिक संबंध नहीं बनाए थे।
जाँच में पता चला कि दीपक की शादी इसी साल फरवरी में हो चुकी थी। यह बात जानने के बाद महिला का उद्देश्य उसे सजा दिलाना और उसकी वैवाहिक जिंदगी को बिगाड़ना था, इसलिए उसने झूठा मामला दर्ज कराया। अदालत ने माना कि यह मामला रेप नहीं बनता। महिला का उद्देश्य घर में घुसकर युवक के जीवन को नुकसान पहुँचाना और उसे मानसिक रूप से परेशान करना था।

